देशभक्ति से ओतप्रोत स्वतंत्रता, समता, आत्मीयता और बंधुता की आवश्यकता: जिला प्रचारक रजत प्रताप
0 आद्य सरसंघचालक प्रणाम कर पूर्ण गणवेश मे सवयंसेवको ने मनाया वर्ष प्रतिपदा उत्सव
0 कहा- डा. हेडगेवार साहब का चिंतन राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत रहा
0 प्रत्येक हिन्दू को संघ की शाखा में जाकर शारीरिक एवं बौद्धिक क्षमता का संवर्धन करना चाहिए: जिला प्रचारक
मीरजापुर।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मिर्जापुर नगर के तत्वावधान में वर्ष प्रतिपदा उत्सव एवं आद्य सरसंघचालक प्रणाम कार्यक्रम का आयोजन नगर के बाजीराव कटरा स्थित ग्रैंड इन के सभागार में बुधवार, 18 मार्च को सायंकाल संपन्न हुआ। घोष वादन के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक के आद्य सरसंघचालक डाक्टर केशवराव बलिराम हेडगेवार जी को सामूहिक रूप से स्वयंसेवकों ने प्रणाम किया। तत्पश्चात भगवा ध्वज आरोहण कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। मंचासीन मुख्य वक्ता आरएसएस के जिवा प्रचारक रजट प्रताप जी, जिला संघचालक शरद चंद्र उपाध्याय जी एवं नगर संघचालक अशोक कुमार सोनी एवं अध्यक्षता कर रहे सम्राट अशोक राजकीय इंजीनियरिंग कालेज मीरजापुर के रजिस्ट्रार आशीष मोहन ने आद्य सरसंघचालक के चित्र के समक्ष पुष्पार्चन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
नगर कार्यवाह लखन ने मंच परिचय कराया। अमृत वचन एवं एकल गीत “हमे वीर केशव मिले आप जब से, नई साधना की डिर मिल गयी है” के उपरांत मीरजापुर जिला प्रचारक रजत प्रताप जी का पाथेय प्राप्त हुआ।
अपने उद्बोधन मे जिला प्रचारक रजत प्रताप जी ने कहाकि संघ संस्थापक डा. हेडगेवार जी के संकल्प कि ‘देश को स्वतंत्रता मिले और दोबारा गुलामी न आए’, इसके लिए राष्ट्र मे देशभक्ति से ओतप्रोत स्वतंत्रता, समता, आत्मीयता और बंधुता की आवश्यकता है। इस आवश्यकता को सफलीभूत करने के लिए, हिन्दू समाज को एक सूत्र में पिरोने का काम संघ की दैनिक शाखा पर होता आ है। उन्होंने कहाकि पूज्य डा हेडगेवार ने उच्च शिक्षा प्राप्त कर समाज के लिए अपना जीवन पूरा समर्पित कर दिया और आज हिंदू समाज मे शाखाओ का विस्तार होता जा रहा है।
हिंदू नववर्ष संकल्प का दिन है। आज के दिन ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि के निर्माण का दिवस, वासन्तिक नवरात्र का प्रारम्भ, त्रेतायुग में प्रभु श्रीराम का गज्याभिषेक, द्वापर युग में युधिष्ठिर सम्वत् का प्रारम्भ, कलियुग में विक्रम संवत् का प्रारम्भ, वरूणावतार झुलेलाल प्राकट्य दिवस (चेटीचण्ड), महर्षि गौतम का जन्म तिवस, गुरु अंगददेव जी का जन्म दिवस के साथ साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार जी का जन्म दिवस का दिन है। इसी दिन महर्षि दयानन्द सरस्वती जी ने आर्य समाज की स्थापना की।
कहाकि यह स्वाभिमान का दिन है। क्योकि जब जब देश को आवश्यकता पडी, लोग खडे हुए। 13 वर्ष की अवस्था मे शिवाजी युद्ध मैदान मे आ गये। स्वामी विवेकानंद जी ने दुनिया के अंदर भारतीय संस्कृति को बताया। लोगो ने विवेकानंद से कहा राजनीतिक बन जाइय, तब विवेकानंद ने कहा था कि- मै राजनीतिक नेतृत्व करूंगा और देश आजाद हो जाएगा, लेकिन क्या गारंटी है कि पुन: गुलाम नही होगा।
उन्होने कहाकि विवेकानंद के पद चिन्हो पर चलकर डा. साहब का चिंतन राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत था। संघ संस्थापक हेडगेवार जी ने बाल्यकाल मे सरकारी स्कूल मे पढाई के दौरान बिक्टोरिया के राज्याभिषेक का मिठाई नही खाया हाथ से मसलकर कूडेदान मे डाल दिया, सुरंग खोदकर यूनियन जैक पर भारत के झंडे को लहरा दिया और अंग्रेजी शिक्षा अधिकारी के सामने सामूहिक रूप से कक्षा के अंदर वंदे मातरम के साथ क्रांति का सूत्रपात किया। डाक्टरी की पढाई के दौरान कलकत्ता को केंद्र बनाया। अनुशीलन समिति और कांग्रेस मे कुछ समय तक कार्य किया और आजीवन मातृभूमि और हिंदू समाज के लिए समर्पित रहे। और इन सारे कार्यो का केंद्रबिंदु अपनी नित्य की शाखा ही रही। शाखा का उददेश्य व्यक्ति से राष्ट्र निर्माण थी। उस समय हम बंटे और बिखरे हुए थे।
जिला प्रचारक रजत प्रताप ने कहाकि फाहयान जब ‘सोने की चिडिया’ को देखने भारत आया, तो एक जगह देखा दो किसान नोकझोक कर रहे थे, एक ने जमीन बेची और दूसरे ने खरीदी थी। जब उसी खेत मे सोने के सिक्के से भरा घडा मिला, तो दोनो उस पर एक दूसरे का अधिकार बताकर देना चाह रहे थे। एक ने कहा मैने खेत बेच दिया, खेत से जो मिला वह आपका तो दूसरे ने कहा खेत भले मैने खरीदी लेकिन यह संपत्ति आपके पूर्वजो की संचित पूजी है।
यह देखकर फाहयान समझ गया कि भारत पर अधिकार जमाना है, तो शक्ति पर नही, आत्मीयता पर वार करना होगा और आक्रांताओ ने यही किया। फूट डाला और राज किया। लक्ष्मीबाई, अहिल्याबाइ, शिवाजी, विवेकानंद जैसे लोगो ने हिंदुत्व भारतीय संस्कृति के लिए काम किया। गुरुपुत्रो का बलिदान इसी के लिए हुआ।
उन्होने कहाकि संघ का उद्देश्य परं वैभव और मा भारती की जयकार है। संघ की शाखा साधना का केंद्र बिंदु है। संस्कृति के लिए तन मन धन समर्पण के भाव जागरण से राम मंदिर का निर्माण संभव हुआ है। कश्मीर मुद्दे का समाधान हुआ। संघ के 101 वे वर्ष मे हम कार्य कर रहे है। परिवार से समाज के अंदर पंच परिवर्तन का विकेंद्रीरण हो, इस हेतु हम सभी लगे हुए है।
ऐसे मे उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रत्येक हिन्दू को संघ की शाखा में जाकर शारीरिक एवं बौद्धिक क्षमता का संवर्धन करें।
इस अवसर पर दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री सोहन लाल श्रीमाली, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष मनोज जायसवाल सहित नगर के विभिन्न बस्तियो से संघ एवं विचार परिवार के लोग भारी संख्या मे शामिल हुए। अध्यक्षता सम्राट अशोक राजकीय इंजीनियरिंग कालेज मीरजापुर के रजिस्ट्रार आशीष मोहन जी ने किया।





