डेनमार्क के राजदूत ने मिर्जापुर में ग्रामीण जलापूर्ति योजना का समुदाय को किया हस्तांतरण
0 दुहौआ गांव में ‘जल अर्पण’ समारोह में शामिल हुए राजदूत रासमुस अबिल्डगार्ड क्रिस्टेंसनय ग्रामीण जल सेवा की जिम्मेदारी समुदाय के हाथों में
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मीरजापुर। भारत में डेनमार्क के राजदूत रासमुस अबिल्डगार्ड क्रिस्टेंसन ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के दुहौआ गांव का दौरा किया और ‘जल अर्पण’ समारोह में भाग लिया। यह समारोह जल जीवन मिशन के अंतर्गत गांव की ग्रामीण जलापूर्ति योजना को औपचारिक रूप से स्थानीय समुदाय को सौंपे जाने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार, मुख्य विकास अधिकारी विशाल कुमार, अपर जिलाधिकारी नमामि गंगे विजेता, अपर जिलाधिकारी वि0/रा0 विनोद सिंह, कंट्री मैनेजर, यूएनओपीएस इंडिया सहित 400 से अधिक समुदाय के सदस्यों, विशेष रूप से महिलाओं, ने सहभागिता की। राजदूत ने दिन की शुरुआत लालगंज के नरैना कला गांव स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट डब्लूटीपी) के भ्रमण से की। उन्होंने संयंत्र का निरीक्षण किया और इसके संचालन तथा पर्यवेक्षी नियंत्रण एवं डेटा अधिग्रहण (एस0सी0ए0डी) प्रणाली के बारे में जानकारी प्राप्त की। इस दौरान उन्होंने जल के स्रोत से लेकर घरों में नल तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया को समझा। जल जीवन मिशन के अंतर्गत इस संयंत्र से उपचारित जल 258 गांवों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करा रहा है। इनमें तीन गांव-अमरावती, भवानीपुर और दुहौआ, यूएनओपीएस इंटरवेंशन वाले गांव हैं। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल दुहौआ गांव पहुंचा, जहां यूएनओपीएस के सहयोग से प्रशिक्षित जल सखियों ने पारंपरिक तरीके से राजदूत का स्वागत किया।
परसिया स्थित ओवरहेड टैंक में राजदूत ने पंप संचालक से बातचीत की और ‘जल बंधन’ गतिविधि में भाग लिया, जो जल संरक्षण के प्रति समुदाय की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने परिसर में पौधारोपण भी किया।
इन सभी गतिविधियों जल शोधन संयंत्र से लेकर गांव और स्थानीय स्तर पर जल संबंधी बुनियादी ढांचे के अवलोकन, ने जल स्रोत से नल तक की पूरी यात्रा और इसे लंबे समय तक बनाए रखने के लिए आवश्यक सामुदायिक स्वामित्व की एक समग्र झलक प्रस्तुत की। यही सामुदायिक स्वामित्व की भावना इसके बाद आयोजित ‘जल अर्पण’ कार्यक्रम का केंद्र रही। जल अर्पण सामुदायिक स्वामित्व का उत्सव जल अर्पण कार्यक्रम का आयोजन जय प्रकाश नारायण सर्वोदय बालक विद्यालय, परसिया में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत, दीप प्रज्वलन तथा ग्राम प्रधान, दुहौआ के संबोधन के साथ हुआ। इस अवसर पर जल गुणवत्ता परीक्षण का लाइव प्रदर्शन किया गया और समुदाय के सदस्यों के साथ संवाद भी किया गया। डेनमार्क के राजदूत के मिर्जापुर आगमन पर उनका स्वागत करते हुए, यूएनओपीएस इंडिया के कंट्री मैनेजर विनोद मिश्रा ने जल जीवन मिशन के समर्थन में यूएनओपीएस और डेनमार्क के बीच साझेदारी तथा एक “आदर्श गांव” मॉडल विकसित करने की परिकल्पना पर प्रकाश डाला। उन्होंने जल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए तीन प्रमुख आयामों-जल की उपलब्धता, पहुंच और गुणवत्ता, पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी पीछे न छूटे। उन्होंने फील्ड टेस्ट किट (एफटीके) के माध्यम से समुदाय स्तर पर जल गुणवत्ता की निगरानी के महत्व को भी रेखांकित किया और मिर्जापुर के अधिक से अधिक गांवों तक यूएनओपीएस का सहयोग विस्तार करने में रुचि व्यक्त की।
उत्साहपूर्ण जनसमूह को संबोधित करते हुए, भारत में डेनमार्क के राजदूत श्री रासमुस अबिल्डगार्ड क्रिस्टेंसन ने कहा “जल के क्षेत्र में डेनमार्क और भारत के बीच लंबे समय से चली आ रही और बेहद मजबूत साझेदारी है। दोनों देश इस साझा समझ पर एकमत हैं कि जल संसाधनों का सतत और कुशल प्रबंधन किया जाना चाहिए तथा इसमें उन समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए, जो इन जल संसाधनों पर निर्भर हैं।”
उन्होंने कहा, “भारत के साथ सहयोग के माध्यम से, डेनमार्क को जल जीवन मिशन का समर्थन करने पर गर्व है। इस दिशा में यूएनओपीएस के साथ मिलकर ग्रामीण परिवारों तक विश्वसनीय और सुरक्षित पेयजल पहुंचाने के लिए कार्य किया जा रहा है। डेनमार्क को इस बात पर भी गर्व है कि वह जल जीवन मिशन का समर्थन करने वाला एकमात्र अंतरराष्ट्रीय साझेदार देश है। डेनमार्क इसे भारत के साथ अपनी साझेदारी में निहित विश्वास और उसकी गहराई का प्रतिबिंब मानता है।”
जल अर्पण कार्यक्रम में जल वंदना, अर्थात जल के प्रति बच्चों की प्रार्थना, के बाद जल श्रृंगार का आयोजन किया गया, जिसके माध्यम से जलापूर्ति योजना को औपचारिक रूप से समुदाय को सौंपा गया। बच्चों ने जल संरक्षण के महत्व पर आधारित ‘A Future without Water’ (जल बिना भविष्य) विषय पर एक लघु नाटिका प्रस्तुत की। कार्यक्रम का समापन सामूहिक जल शपथ के साथ हुआ, जिसमें जल के संरक्षण और उसके जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग के प्रति सभी ने अपनी साझा जिम्मेदारी दोहराई। कार्यक्रम में बच्चों द्वारा ‘जल वंदना’ प्रस्तुत की गई, जिसके बाद ‘जल शृंगार’ के माध्यम से जलापूर्ति योजना को औपचारिक रूप से समुदाय को सौंपने का समारोह आयोजित किया गया। बच्चों ने जल संरक्षण पर आधारित एक लघु नाटक ‘जल बिना भविष्य’ प्रस्तुत की। कार्यक्रम का समापन सामूहिक ‘जल शपथ’ के साथ हुआ, जिसमें जल संरक्षण तथा जल के जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग के प्रति साझा दायित्व को दोहराया गया।
ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (वीडब्लूएससी) की सदस्य सुश्री अमृता ने योजना के संचालन एवं प्रबंधन में समुदाय की भूमिका के बारे में जानकारी दी। उन्होंने जल सेवाओं की निरंतर और टिकाऊ आपूर्ति सुनिश्चित करने वाली स्थानीय संस्थाओं के रूप में वीडब्लूएससी की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। ‘जल अर्पण’ कार्यक्रम ने यह प्रदर्शित किया कि टिकाऊ ग्रामीण जल सेवाएं केवल बुनियादी ढांचे पर निर्भर नहीं करतीं, बल्कि इनके लिए सामुदायिक स्वामित्व, स्थानीय संस्थाओं की सक्रिय भूमिका, महिलाओं की भागीदारी, जागरूकता तथा जल के जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग का भी उतना ही महत्व है।
अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे) ने कहा कि मिर्जापुर की ऊबड़-खाबड़ एवं दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां जिले में जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विशेष चुनौतियां प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने कार्यक्रम के समर्थन में यूएनओपीएस और उसकी टीम द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की तथा कहा कि अब जिले के अधिकांश हिस्सों में जल की उपलब्धता और पहुंच में सुधार हुआ है। उन्होंने यूएनओपीएस के निरंतर सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया और क्षेत्र के समुदायों तक जल की बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में टीम द्वारा किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की। कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस अवसर ने एक बार फिर यह रेखांकित किया कि सतत जल सुरक्षा केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके केंद्र में समुदाय, विशेष रूप से महिलाएं, हैं, जो जल सेवाओं के प्रबंधन, रखरखाव और उन्हें निरंतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। भारत और डेनमार्क की सरकारों के बीच ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप (Green Strategic Partnership) के अंतर्गत यूएनओपीएस, जल जीवन मिशन (जेजेएम) को उत्तर प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु और असम के कुल 478 गांवों में ग्रामीण परिवारों तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाने में सहयोग प्रदान कर रहा है। उत्तर प्रदेश में, 2021 में इस पहल की शुरुआत के बाद से 2026 तक इसका विस्तार 11 जिलों के 200 से अधिक गांवों तक हो चुका है। अक्टूबर 2022 में परियोजना के दूसरे चरण की शुरुआत के बाद से समुदायों को सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया गया है, विशेषकर मिर्जापुर जैसे जिलों में, इसके तहत स्थानीय प्रणालियों को मजबूत करना, क्षमता निर्माण करना तथा महिलाओं और स्थानीय संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देना शामिल है, ताकि ग्रामीण जल सेवाओं का दीर्घकालिक और समुदाय-आधारित स्वामित्व सुनिश्चित किया जा सके।


