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भक्शी नदी पुल के शिलान्यास पत्थर का होगा जीर्णोद्धार, सिद्धनाथ सिंह ने लिया संकल्प

अहरौरा मिर्जापुर। मड़िहान विधानसभा क्षेत्र अहरौरा के इमिलिया चट्टी में भक्शी नदी पर बने पुल के शिलान्यास पत्थर को पुनर्जनन देने का निर्णय लिया गया है। इस पुल का उद्घाटन 18 नवंबर 1995 को भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के संस्थापक और किसानों के मसीहा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने किया था। अब, इस ऐतिहासिक शिलान्यास पत्थर के विलुप्त होने की कगार पर पहुंचने के बाद भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष सिद्धनाथ सिंह ने इसे चबूतरा बनाकर जीर्णोद्धार कराने का संकल्प लिया है।शिलान्यास और उद्घाटन का ऐतिहासिक महत्व
17 नवंबर 1995 को चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत चुनार विधानसभा के चुनार फैक्ट्री में आयोजित विशाल किसान महापंचायत को संबोधित करने मिर्जापुर आए थे। महापंचायत के बाद वे कोलना गांव में डॉ. रामसागर सिंह के आवास पर रुके। अगले दिन, 18 नवंबर को, उन्होंने भक्शी नदी पर नवनिर्मित पुल का उद्घाटन किया। इस पुल ने इमिलिया चट्टी और आसपास के गांवों को जोड़कर बेचू वीर मंदिर और बन इमिलिया आने-जाने वालों के लिए सुगम रास्ता प्रदान किया। उद्घाटन के बाद टिकैत ने सरिया न्याय पंचायत के किसानों और मजदूरों को भी संबोधित किया था।शिलान्यास पत्थर की दयनीय स्थिति जून 2025 को भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष सिद्धनाथ सिंह और जिला पंचायत सदस्य सुषमा सिंह बेचू वीर मंदिर दर्शन के लिए जा रहे थे। रास्ते में भक्शी नदी पुल पर स्व. चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत द्वारा स्थापित शिलान्यास पत्थर को देखा, जो पूरी तरह जर्जर और विलुप्त होने की कगार पर था।सिद्धनाथ सिंह ने इस ऐतिहासिक स्मृति को संरक्षित करने के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्णय लिया। उन्होंने घोषणा की कि पत्थर के चारों ओर चबूतरा बनाकर इसका जीर्णोद्धार किया जाएगा, ताकि टिकैत की विरासत और उनके योगदान को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाया जा सके।किसानों के मसीहा की विरासत चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत भारतीय किसान यूनियन के संस्थापक थे, जिन्होंने किसानों के हक के लिए कई ऐतिहासिक आंदोलन किए। 1988 में दिल्ली के बोट क्लब रैली जैसे उनके आंदोलनों ने सरकारों को झुकने पर मजबूर किया था। मिर्जापुर में भक्शी नदी पुल का उद्घाटन भी उनके किसान हितैषी प्रयासों का हिस्सा था। सिद्धनाथ सिंह ने कहा, “बाबा टिकैत ने किसानों के लिए अपना जीवन समर्पित किया। इस शिलान्यास पत्थर को संरक्षित करना उनकी स्मृति और संघर्ष को सम्मान देना है।”जीर्णोद्धार का संकल्प
सिद्धनाथ सिंह ने स्थानीय किसानों और भाकियू कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर जीर्णोद्धार कार्य शुरू करने की योजना बनाई है। इस मौके पर चौधरी जय पाल सिंह, स्वामी दयाल सिंह, चौधरी विजय पाल सिंह, प्रदीप सिंह, शेखर सिंह और काजू सिंह मौजूद रहे। सुषमा सिंह ने कहा कि यह कार्य न केवल टिकैत की स्मृति को जीवित रखेगा, बल्कि क्षेत्र के किसानों में एकता और प्रेरणा का संदेश भी देगा।
मांग और अपेक्षित कार्रवाई
जीर्णोद्धार कार्य: शिलान्यास पत्थर के आसपास चबूतरा निर्माण और सौंदर्यीकरण कार्य जल्द शुरू किया जाए।
जागरूकता अभियान: टिकैत के योगदान को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए स्थानीय स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित हों।प्रशासनिक सहयोग: स्थानीय प्रशासन से जीर्णोद्धार कार्य में सहयोग और सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग।निष्कर्ष भक्शी नदी पुल का शिलान्यास पत्थर चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की किसान हितैषी विरासत का प्रतीक है। सिद्धनाथ सिंह का जीर्णोद्धार का संकल्प इस स्मृति को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह प्रयास न केवल टिकैत के योगदान को सम्मान देगा, बल्कि मिर्जापुर के किसानों को उनकी लड़ाई और एकता की प्रेरणा भी देगा।संदर्भ: स्थानीय भाकियू कार्यकर्ताओं के बयान, जून 2025। चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की जीवनी, भारतीय किसान यूनियन।

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