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1936 मे वंदनीया केलकर ने वर्धा मे खडा किया विश्व का सबसे बडा हिन्दू महिलाओ का संगठन
0 संस्कृति-परम्पराओं की अक्षुण्णता हेतु मातृशक्तियो को सबल, सशक्त और सामर्थ्यवान बनाने का रहा उद्देश्य
0 एक जगह एकत्रित होकर शारीरिक कार्यक्रम, खेलकूद, लाठी चलाना सीख रही बहने
0 आज संकल्प दिवस के रूप मे मनेगा राष्ट्र सेविका समिति की संस्थापक लक्ष्मी बाई केलकर का जन्म दिवस
0 विभाजन के समय पाकिस्तान में फंसी हिन्दू महिलाओं को सुरक्षित भारत लाने का किया साहसिक कार्य
फोटोसहित
विमलेश अग्रहरि
मीरजापुर।
भारत की धरती ने अनेकों नारी रत्नों को जन्म दिया है, जिन्होंने न केवल देश की संस्कृति की रक्षा की, बल्कि उन्हें निरन्तर जारी रखा है। उन्हीं की देन है कि भारत संस्कृति के बल पर खड़ा है और इसका आधार है भारत की बेटियां।
ऐसी ही दृढ़ विचार खखने वाली ईश्वर भक्त, राष्ट्र सेवी, तेजस्वी, सरल स्वभाव बाली तेजस्वी – लक्ष्मी बाई केलकर जी ने हिन्दू राष्ट्र का पुननिमीण हेतु 1936 में महाराष्ट्र के वर्धा में भारतीय संस्कृति व परम्पराओं को अक्षुण्ण बनाये रखने के लिये विश्व का सबसे बड़ा हिन्दू महिलाओं का एक संगठन खड़ा किया, जिसका नाम है ‘राष्ट्र सेविका समिति।

इस संगठन का उद्देश्य है कि नारी सशक्त बने शारीरिक, मानसिक और आत्मिक रूप से, ताकि वे अपनी सुरक्षा स्वयं कर सके। जिस समय भारत परतन्त्र था, उस समय महिलाएं सुरक्षित नही थी। महिलाओ का बुरा हाल था। ऐसी परिस्थिति में बन्दनीय लक्ष्मी बाई केलकर (बन्दनीया मौसी जी) के मन में सुन्दर आचरण जागृत होता है कि कुछ ऐसा किया जाय जिससे नारी, सामर्थ्यवान बन सके। इसके लिए उन्होने संघ के संस्थापक डा० हेडगेवार जी से मिलकर 25 अक्टूबर 1936 में राष्ट्र सेविका समिति की स्थापना की।
परिणाम स्वरूप महिलाओं का साहस बढ़ा और वे एक जगह एकत्रित होकर शारीरिक कार्यक्रम, खेलकूद, लाठी चलाना आदि का अभ्यास करने लगी। उनका मानना था कि स्त्री ही राष्ट्र की आधारशिला है। उसी कल्पना को साकार करने के लिए उन्होने समिति रूपी छोटे से पोधे का रोपण किया, जो आज वटवृक्ष के रूप में देश में ही नहीं, विदेशों में भी इसकी शाखाएं कार्यरत है।

वन्दनीया मौसी जी असामान्य व्यक्तित्व की धनी थी। कुरीतियों को दूर करने वाली हम सभी के लिए प्रेरणा स्रोत है। जिन्होने मातृशक्तियो मे राष्ट्र धर्म को जगाया और राष्ट्र के अन्दर राष्ट्र भक्ति को जगाया है।

जब भारत का विभाजन हो रहा था उस समय पाकिस्तान में फंसी हिन्दू महिलाओं को सुरक्षित भारत लाने का एक साहसिक कार्य किया। हम सभी को इनसे प्रेरणा लेनी चाहिये। हम सभी समिति की बहने बन्दनीया मौसी जी के जन्म दिवस को संकल्प दिवस के रूप मे मनाते आ रहे है।
राष्ट्र सेविका समिति विन्धयाचल विभाग की विभाग कार्यवाहिका श्रीमती संध्या त्रिपाठी ने बताया कि 5 जुलाई को ऐसी राष्ट्र सेविका समिति की संस्थापक वंदनीया लक्ष्मी बाई केलकर का जन्म दिवस संकल्प दिवस के रूप में साई मण्डपम् में सायं 4 बजे से मनाया जायेगा।

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