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जीएसटी सुधारों पर फोकस: काशी हिंदू विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन  

0 राजीव गांधी दक्षिण परिसर बीएचयू बरकछा मे सप्ताह भर चलने वाली कार्यशाला का शुभारंभ

मीरजापुर।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के राजीव गांधी दक्षिणी परिसर के वाणिज्य विभाग द्वारा “वस्तु एवं सेवाएँ: कर सरलीकरण और अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना” विषयक सात दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ 15 से 21 सितंबर 2025 तक किया गया। इस कार्यशाला में शिक्षाविदों, कर विशेषज्ञों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और विद्यार्थियों को एक मंच पर लाकर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की बदलती रूपरेखा तथा भारत की आर्थिक प्रगति पर उसके प्रभाव पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए वाणिज्य संकायाध्यक्ष प्रो. एच. के. सिंह ने कहा कि भारत सरकार द्वारा हाल ही में घोषित जी०एस०टी० सुधारों के परिप्रेक्ष्य में यह कार्यशाला विशेष महत्व रखती है। इन सुधारों का उद्देश्य कर संरचना को तार्किक बनाना, अनुपालन को सरल करना तथा कर आधार का विस्तार करना है, जिससे आर्थिक वृद्धि को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि ये सुधार व्यापार जगत को राहत देंगे, पारदर्शिता को बढ़ाएंगे और राजस्व संग्रह में वृद्धि कर भारतीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करेंगे।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि चार्टर्ड अकाउंटेंट श्रीमती सुदेशना बसु, पूर्व अध्यक्ष, आईसीएआई वाराणसी शाखा एवं एनिमोटल केयर ट्रस्ट की सह-संस्थापक तथा विशिष्ट अतिथि कंपनी सेक्रेटरी सुश्री अनु जालान ने उद्घाटन सत्र की शोभा बढ़ाई। श्रीमती सुदेशना बसु ने अपने उद्बोधन में जी०एस०टी० रिटर्न फाइलिंग, व्यवसायों एवं आम नागरिकों के लिए कर सरलीकरण तथा विद्यार्थियों हेतु व्यवहारिक प्रशिक्षण मॉड्यूल पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जीएसटी में हालिया संशोधन एक पारदर्शी एवं विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

प्रो. विनोद कुमार मिश्र, प्रोफेसर-इन-चार्ज, राजीव गांधी दक्षिणी परिसर ने इस पहल को विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह कार्यशाला शैक्षणिक अनुसंधान को नीति और व्यवहार से जोड़ने का प्रयास है। उनके अनुसार, जी०एस०टी० प्रावधान तेज आर्थिक विकास और एक ईमानदार व्यवस्था की मजबूत नींव प्रदान करेंगे।

उद्घाटन सत्र में प्रो. अचिन्त्य सिंघल, डॉ. मनोज सिंह, डॉ. वीनीता, डॉ. पल्लवी, डॉ. रजय, श्री अनिल, डॉ. सिराजुद्दीन, डॉ. नेहा, डॉ. आलोक, डॉ. अञ्जनेय, श्री प्रदीप सहित अनेक विद्वानों, उद्योग और सरकारी क्षेत्र के विशेषज्ञों ने सहभागिता की तथा अपने विचार साझा किए। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने इसमें भाग लेकर कर एवं आर्थिक सुधारों की जानकारी को समृद्ध किया।

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