मीरजापुर।
राष्ट्र सेविका समिति विन्ध्याचल विभाग की ओर से बुधवार, 19 नवंबर को वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई जयंती कार्यक्रम का आयोजन शौर्य दिवस के रुप मे आवास विकास कालोनी स्थित लक्ष्मीबाई पार्क मे मातृशक्ति बहनो ने आयोजित किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ पथ संचलन से हुआ। पीत वस्त्र धारी मातृशक्तियो के साथ लक्ष्मीबाई की शोभायात्रा आवास विआस कालोनी के विभिन्न मार्गो पर भारत माता की जय, लक्ष्मीबाई अमर रहे का उदघष करते हुए पार्क मे पहुचा, जहा दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम शुरु हुआ।
मंच परिचय इन्दू गुप्ता ने कराते हुए कहा- नारी जब गरजती है तब इतिहास बदल देती है। मुख्य अतिथि झासी की बेटी प्रभारी नगर नियोजन विकास प्राधिकरण मीरजापुर डाँ. प्रीति जायसवाल एवं मुख्य वक्ता सह प्रान्त कार्यवाहिका एवं संस्कृत विभागाध्यक्ष बीएचयू डाँ. रंजना श्रीवास्तव रही।
प्रान्त कार्यवाहिका माया पाण्डेय जी, विभाग कार्यवाहिका संध्या त्रिपाठी, सह शारीरिक प्रमुख प्रियंका जी, जिला कार्यवाहिका चम्पा जी, वीना सिंह, निरुपमा जी, खंड कार्यवाहिका प्रियंका जी, नगर कार्यवाहिका सीता जी, आर एस एस के सह जिला कार्यवाह नीरज द्विवेदी, नगर संघचालक अशोक सोनी जी, बौद्धिक शिक्षण प्रमुख विमलेश, पूर्व चेयरमैन मनोज जायसवाल, चेयरमैन श्याम सुंदर केशरी, सभासद हकुम चंद मौर्य जी, राम मिलन जी आदि का अंगवस्त्र ओढाकर सम्मान किया गया। तत्पश्चात बहनो ने आत्मरक्षा के लिए एसटी का प्रदर्शन किया और बाल कलाकारो ने लक्ष्मीबाई के जीवन पर एकांकी का मंचन किया।
मुख्य वक्ता सह प्रान्त कार्यवाहिका एवं संस्कृत विभागाध्यक्ष बीएचयू डाँ. रंजना श्रीवास्तव ने कहाकि राष्ट्र सेविका समिति भारत की एक सांस्कृतिक, सामाजिक और राष्ट्रवादी महिला संगठन है, जिसकी स्थापना वंदनीय लक्ष्मीबाई केलकर (मौसीजी) ने वर्ष 1936 में नागपुर के वर्धा में किया था। यह संगठन विशेष रूप से नारी जागरण, नारी सशक्तिकरण, संस्कार निर्माण और राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित है। समिति का मूल उद्देश्य “सशक्त नारी सशक्त राष्ट्र” है।
राष्ट्र सेविका समिति मानती है कि राष्ट्र निर्माण में नारी की भूमिका सर्वोपरि है, इसलिए यह संगठन महिलाओं को तीन प्रमुख क्षेत्रों शारीरिक, बौद्धिक, सांस्कृतिक और सेवा कार्य मे प्रशिक्षित करता है। देशभर में समिति की हजारों शाखाएँ चलती हैं, जहां बालिकाओं से मातृशक्ति तक सभी आयु वर्ग की बहनें जुडकर राष्ट्रनिर्माण में योगदान दे रही हैं। कहा गया है कि जो चुनौतियों से नहीं डरते, वे ही इतिहास रचते हैं, इसलिए समिति की बहने हर एक चुनौती के सामना का प्रशिक्षण प्राप्त करती है।
मु ख्य अतिथि झासी की बेटी प्रभारी नगर नियोजन विकास प्राधिकरण मीरजापुर डाँ. प्रीति जायसवाल ने कहाकि राष्ट्र सेविका समिति किसी राजनीतिक उद्देश्य के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज के लिए नारी शक्ति का संगठन करने के लिए कार्यरत है। यह एक अनुशासित, मूल्य-आधारित और राष्ट्रभक्ति प्रेरित संगठन है जिसने लाखों महिलाओं के जीवन में आत्मविश्वास, कर्तव्यबोध और सांस्कृतिक मूल्यों का संचार किया है। राष्ट्र सेविका समिति भारत की एक ऐसी राष्ट्रीय संस्था है जो मातृशक्ति के जागरण, राष्ट्रभक्ति, चरित्र निर्माण और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है, जिससे समाज में कर्तव्यनिष्ठ, संस्कारवान एवं आत्मविश्वासी महिलाओं का निर्माण हो सके।
विभाग कार्यवाहिका संध्या त्रिपाठी ने कहाकि विन्ध्याचल विभाग में भी समिति अनेक सामाजिक, सांस्कृतिक तथा सेवा कार्यों के माध्यम से मातृशक्ति को संगठित और सशक्त बनाने का कार्य कर रही है। समिति समाज की तीन मातृ विभूतियों को मातृत्व, कृतित्व और नेतृत्व के आदर्श रूप में लेकर कार्य कर रही है। मातृत्व के आदर्श रूप में माता जीजा बाई, कृतित्व के आदर्श के रूप में रानी अहिल्याबाई होलकर जी और नेतृत्व के आदर्श के रूप में रानी लक्ष्मी बाई जी को लेकर कार्य कर रही है। 19 नवंबर को रानी लक्ष्मी बाई जी के जन्मदिवस के शुभ अवसर पर यह आयोजन भी इसी सतत प्रयास का प्रतीक है।
रानी लक्ष्मी बाई जी का जन्म काशी में हुआ था और उनका बचपन के नाम मणिकर्णिका था। और लोग उन्हें प्यार से मनु नाम से बुलाते थे। रानी लक्ष्मी बाई, वीरता, अदम्य साहस और स्वाभिमान की जीयंत प्रतिमा है। जिन्होंने मात्र 23 वर्ष की आयु में अंग्रेजी साम्राज्य को ललकार कर भारतीय स्वाधीनता संग्राम को नई दिशा दी। “मैं अपनी झाँसी नहीं दूंगी” केवल एक वाक्य नहीं था, बल्कि पूरे राष्ट्र की पुकार थी। घुडसवारी, तलवारबाजी, युद्धकला- हर क्षेत्र में वे अद्वितीय थीं। लक्ष्मी बाई की वीरता ने नारी शक्ति के सम्मान को स्थापित किया और पीढ़ियों को प्रेरित किया कि नारी केवल घर की सीमा तक नहीं, बल्कि राष्ट्र की रक्षा में भी अग्रणी हो सकती है। आज भी उनका जीवन प्रत्येक भारतीय को साहस, त्याग और मातृभूमि के प्रति कर्तव्य का संदेश देता है।
आज भी उनका कहा वाक्य, मैं रहूं या ना रहूं, ये देश रहना चाहिए, हमारे मन को झकझोर दे देते हैं। हमें गर्व है कि आज का यह कार्यक्रम रानी लक्ष्मी बाई जी पार्क में आयोजित हो रहा है।
इस अवसर पर मंजूलता जायसवाल, बिनानी कालेज की पूर्व प्रचार्या प्रोफेसर वीना सिंह जी, प्रोफेसर नम्रता मिश्रा, नगर भाजपा अध्यक्ष डाली जी, सीता जी, प्रियंका जी, दीपा ऊमर जी, चंपा जी, इन्दु गुप्ता जी, शशि कला अग्रहरि जी, नीलम जी, कल्पना जी, रजनी जी, अंजना जी, गायत्री जी, श्रुति जी, कल्याणी गोंड, सहित तमाम मातृशक्तिया मौजूद रही। संचालन सूर्या जी ने किया। समापन भारत माता की आरती से किया गया।

राष्ट्र सेविका समिति की पहल पर हुआ पार्क का नामकरण, शीघ्र होगी प्रतिमा स्थापना: विभाग कार्यवाहिका संध्या त्रिपाठी
इस पार्क की स्थापना राष्ट्र सेविका समिति की प्रांत कार्यवाहिका माया दीदी और उनके साथ राष्ट्र सेविका समिति मीरजापुर की पहल पर मातृशक्ति के सहयोग से इस इस पार्क का नामकारण रानी लक्ष्मी बाई के नाम पर करवाया गया। साथ ही उनकी भव्य मूर्ति की स्थापना का प्रस्ताव भी समिति द्वारा प्रस्तुत किया गया था, जिसे नगर पालिका अध्यक्ष श्याम सुंदर केशरी ने स्वीकृति दी है और कुछ ही दिनों में स्मारक मूर्ति की स्थापना इस पार्क में होने वाली है। यह स्मारक मूर्ति हमें रानी की अदम्य वीरता का प्रत्यक्ष स्मरण कराएगी। यह पार्क अब केवल एक स्थल नहीं, बल्कि नारी शक्ति के स्वाभिमान और राष्ट्र समर्पण की प्रेरणा-भूमि बन चुका है। वीरांगना के पावन स्मृति दिवस पर उन्हें कोटिश: नमन करती हूँ।



