गुरु तेगबहादुर के 350 वे शहादत दिवस पर संघ के अखिल भारतीय बैठक का प्रताव गुरुद्वारे मे किया भेंट
0 श्री गुरुतेगबहादुर जी भारतीय परंपरा के दैदीप्यमान नक्षत्र: कौशल किशोर
0 गुरुजी ने निर्भयता और धर्म रक्षा का भाव जागृत किया: केशव तिवारी
0 शहादत के 350 वे वर्ष मे गुरुतेगबहादुर जी को किया नमन
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मीरजापुर। गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा की ओर से गुरुतेगबहादुर जी की शहादत के 350 वा प्रेरणादायी दिवस मंगलवार को धूमधाम से मनाया गया। गुरू जी के शहादत को नमन करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारीगण भी गुरुद्वारा पहुंचे और कार्यक्रम मे हिस्सा लिया। सिखों के नौवें गुरु जी के 350 शहीदी दिवस पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक जो विगत 30 अक्टूबर से 01 नवंबर को जबलपुर में आयोजित की गई थी, में श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350 वीं जयंती में विभिन्न सामाजिक एवं जन जागरण कार्यक्रम कराए जाने के लिए प्रस्ताव पास हुआ था, उस प्रस्ताव को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विंध्याचल विभाग के विभाग प्रचारक श्रीमान किशोर किशोर, विभाग संपर्क प्रमुख केशव नाथ तिवारी एवं एकल अभियान के अंचल के अध्यक्ष श्याम सिंह यादव, सेमफोर्ड स्कूल के प्रबंधक ई० विवेक बरनवाल ने गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, रतनगंज मीरजापुर के अध्यक्ष एवं समस्त कार्यकारिणी को भेंट किया।
जबलपुर मे संपन्न हुए कार्यकारी मंडल की बैठक मे सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले का वक्तव्य/पारित प्रस्ताव का स्मृति चिन्ह भी भेंट किया गया।
इस पारित प्रस्ताव मे सरकार्यवाह होसबाले जी ने कहा है कि सिख परम्परा के नवम गुरु, श्री गुरुतेगबहादुर जी की शहादत के 350 वें प्रेरणादायी दिवस पर इस वर्ष विभिन्न धार्मिक-सामाजिक संस्थाओं सहित भारत के सम्पूर्ण समाज द्वारा श्रद्धा एवं सम्मान के साथ अनेकानेक कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है।
विभाग प्रचारक कौशल किशोर ने बताया कि सरकार्यवाह जी ने कहा- संघर्ष के उस कालखंड में भारत का अधिकांश भू-भाग विदेशी शासक औरंगजेब के क्रूर अत्याचारों से त्रस्त था। सम्पूर्ण भारतवर्ष में अनादिकाल से चली आ रही धर्माधिष्ठित संस्कृति एवं आस्थाओं को नष्ट करने हेतु बलपूर्वक मतांतरण किया जा रहा था। उसी कालखंड में कश्मीर घाटी से समाज के प्रमुख जन एकत्र होकर पं. कृपाराम दत्त जी के नेतृत्व में गुरुतेगबहादुर जी के पास मार्गदर्शन हेतु आए। श्री गुरुजी ने परिस्थिति की भीषणता को समझते हुए समाज की चेतना एवं संकल्प शक्ति को जगाने हेतु निज के देहोत्सर्ग का निश्चय किया और औरंगजेब की क्रूर सत्ता को चुनौती दी। धर्मांध कट्टरपंथी शासन ने उन्हें गिरफ्तार कर मुसलमान बनो या मृत्युदंड स्वीकार करने को कहा। गुरु तेगबहादुरजी ने अत्याचारी शासन के सामने सिर झुकाने के स्थान पर आत्मोत्सर्ग का मार्ग स्वीकार किया। श्री गुरुतेगबहादुर जी के संकल्प और आत्मबल को तोड़ने की कुचेष्टा में मुगल सल्तनत ने उनके शिष्यों, भाई दयाला (देग में गरम तेल में उबालकर), भाई सतीदास (रुई-तेल में लपेटकर जीवित जलाकर) तथा भाई मतिदास (आरे से चीर कर) की नृशंसतापूर्वक हत्या की।
तदुपरांत तेगबहादुरजी मार्गशीर्ष शुक्ल 5, संवत् 1732 (सन् 1675) को दिल्ली के चांदनी चौक में धर्म की रक्षा के लिए दिव्य ज्योति में लीन हो गए। उनकी शहादत ने समाज में धर्म की रक्षा के लिए सर्वस्वार्पण एवं संघर्ष का वातावरण खड़ा कर दिया, जिसने मुगल सत्ता की नींव हिला दी। श्री गुरु तेगबहादुर जी का जीवन समाज में धार्मिक आस्था के दृढ़ीकरण हेतु, रूढ़ि-कुरीतियों से समाज को मुक्त कर समाज कल्याण के लिए समर्पित था। उन्होंने श्रेष्ठ जीवन के लिए हर्ष-शोक, स्तुति-निंदा, मान-अपमान, लोभ-मोह, काम-क्रोध से मुक्त जीवन जीने का उपदेश दिया। मुगलों के अत्याचारों से आतंकित समाज में उनके संदेश “भै कहु को देत नाहि, न भय मानत आनि” (ना किसी को डराना और न किसी से भय मानना) ने निर्भयता और धर्म रक्षा का भाव जागृत किया।
विभाग संपर्क प्रमुख केशव नाथ तिवारी ने कहाकि भारतीय परंपरा के इस दैदीप्यमान नक्षत्र श्री गुरुतेगबहादुर जी की शिक्षाएं और उनके आत्मोत्सर्ग का महत्व जन-जन तक पहुँचाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सभी स्वयंसेवकों सहित सम्पूर्ण समाज से आवाह्न करता है कि उनके जीवन के आदर्शों और मार्गदर्शन का स्मरण करते हुए अपने जीवन का निर्माण करें एवं इस वर्ष आयोजित होने वाले सभी कार्यक्रमों में श्रद्धापूर्वक भागीदारी करें।
शहादत दिवस कार्यक्रम मे गुरुद्वारा के अध्यक्ष जसबीर सिंह, धार्मिक मंत्री भूपेन्द्र सिंह डंग, सचिव हरदीप सिंह खुराना, खजांची हरविन्दृ सिंह, प्रधान जसवीर सिंह चंड्योक, जगजीत सिंह डंग, हरभजन सिंह सरना, अमरीक सिंह मोंगा, बलबीर सिंह सरना, गुरुविंदर सिंह सरना, सुरजीत सिंह सरना, बलदेव सिंह सलूजा, रविंद्र सिंह नामधारी, अमरदीप सिंह चड्ढा, महेंद्र सिंह चड्योक, हरविंदर सिंह चड्योक, सुरजीत कौर, भूपेंद्र कौर, पिंकी सरना, रितु सरना समेत सिख समाज एवं संघ परिवार के कार्यकर्ता मौजूद रहे।



