मीरजापुर।
विकास खण्ड स्तरीय रबी कृषि निवेश मेला दिनांक 11.12.2025 प्रातः 11.00 बजे से विकास खण्ड परिसर, पटेहरा कला, मीरजापुर में आयोजित किया गया। जिसमें श्री रमाशंकर पटेल, विधायक मड़िहान, मीरजापुर द्वारा दीप प्रज्जवल कर उद्घाटन किया गया।
उक्त कार्यक्रम में विधायक रमाशंकर पटेल द्वारा कृषि विभाग द्वारा लगाये गये प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित कृषक बन्धुओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि यह कृषि निवेश मेला आपके लिए आयोजित किया गया है। आप सभी साथी जानते हैं कि भारत सरकार ने किसानों की आमदनी दुगनी करने का संकल्प लिया है और यह संकल्प पूरा करने के लिए सरकार ने अनेक नीतिगत निर्णय भी किए हैं अनेक प्रकार की कृषि कल्याणकारी योजनाओं को भी संचालित किया जा रहा है कुल मिलाकर उद्देश्य यह है की खेती की लागत कम हो फसलों का मूल्य अधिक हो खेती की उत्पादकता बढ़े और विभिन्न प्रकार की फसलों को हमारे किसान भाई पैदा करना शुरू करें।
साथ ही बताया गया कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में सरकार ने अनेक योजनाओं की घोषणा की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि है जिसके अंतर्गत हमारे किसान भाइयों को ₹2000 की किस्त यानी कुल ₹6000 की आर्थिक सहायता भारत सरकार के द्वारा सीधे उनके खाते में पहुंचाई जा रही है ताकि खेती से जुड़ी हुई आवश्यकताओं के लिए किसानों को कहीं से भी कर्ज न लेना पड़े।
उप कृषि निदेशक, मीरजापुर विकेश कुमार द्वारा विभाग से सम्बन्धित योजनाओं की जानकारी दी गयी।
साथ ही बताया गया कि जनपद में किसानों को तकनीकी जानकारी देने हेतु प्रत्येक ग्राम पंचायत में किसान पाठशाला का आयोजन दिनांक 12 दिसम्बर 2025 से 29 दिसम्बर 2025 तक चलायी जा रही है। कृषि विज्ञान केन्द्र के अध्यक्ष प्रो0 श्रीराम सिंह द्वारा उपस्थित कृषकों को प्राकृतिक खेती के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की गयी। साथ ही जीवामृत, बीजामृत, ब्रम्हास्त्र, नीमास्त्र व घनजीवामृत के बनाने के तरीकों के बारे में बताया गया।
डा0 एस0एन0 सिंह, वैज्ञानिक भारतीय भू उपयोगिता एवं सर्वेक्षण, नई दिल्ली द्वारा उपस्थित कृषकों को बताया गया कि अंधाधुंध उर्वरकों/रसायनों के प्रयोग से किस प्रकार से मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम होती जा रही है, बल्कि इससे मानव के शरीर पर गम्भीर दुष्परिणाम देखने को मिल रहे है, जिससे मनुष्य विभिन्न प्रकार की गम्भीर बीमारियों से ग्रसित होता चला जा रहा है। मानव ही नहीं मिट्टी में जीवांष कार्बन की मात्रा बहुत ही कम होती जा रही है, जिसके परिणामस्वरूप उपज में निरन्तर गिरावट देखने को मिल रही है।
बताया गया कि किसान भाई अपने खेतों के जिप्सम का प्रयोग करें, तिलहन में दो बोरी प्रति बीघा व दलहन व खाद्यान्न में एक बोरी प्रति बीघा की दर से जिप्सम का प्रयोग करें, जिससे रोग/व्याधि नहीं लगते व तिलहन में तेल का प्रतिशत बढ़ जाता है। जिससे गुणवत्तायुक्त उत्पाद प्राप्त कर अपनी आय में वृद्धि कर सकते है।
डा0 पंकज कुमार मिश्रा, व0प्रा0सहा0 ग्रुप-बी द्वारा उपस्थित कृषकों को श्रीअन्न (मिलेट्स) जैसे- ज्वार, बाजरा, कोदो, सांवा, रागी के महत्व व उपयोग पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला गया तथा इन श्रीअन्न से किस प्रकार उत्पाद/व्यंजन बनाकर अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते है।
कार्यक्रम में विकास खण्ड पटेहरा कला के उपस्थित किसानों को प्रश्नोत्तरी के माध्यम से किसानों को नैनो यूरिया निःशुल्क उपलब्ध कराया गया। कार्यक्रम का संचालन संतोष कुशवाहा, व0प्रा0सहा0 ग्रुप-बी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में उप निदेशक कृषि रक्षा श्री दीपक चौधरी, श्रीमती साक्षी सिंह, एस0एम0एस0, अंकित सिंह, स0वि0अ0 (कृषि) व कृषि विभाग के अधिकारी व कर्मचारीगण उपस्थित रहे।



