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राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ के साथ निकाली चेतना यात्रा; सम्राट अशोक शिलालेख महोत्सव हुई सम्पन्न

0 बद्रीनाथ में बुद्ध की मूर्ति, श्रृंगार के बाद दिखाई देती है: स्वामी प्रसाद मौर्य
अहरौरा, मीरजापुर। सम्राट अशोक शिलालेख महोत्सव भण्डारी देवी पहाड़ अहरौरा पर सम्राट अशोक क्लब विन्ध्य मंडल के तत्वावधान में संपन्न हुई, जिसमे पूरे नगर में राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ के साथ चेतना यात्रा निकाली गई। इसके बाद शिलालेख पहाड़ी भंडारी देवी पर पहूंची जहां ध्वजारोहण व अतिथियों का सम्मान किया गया। अध्यक्ष प्रवेश मौर्य द्वारा राष्ट्रीय चिन्ह अशोक स्तंभ और अंग वस्त्रम देकर सम्मानित किया गया।

मुख्य अतिथि पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि भंडारी देवी पहाड़ पर क्या इस ऐतिहासिक स्थल पर शिलालेख हैं, अखंड भारत का निर्माण किया, जानकारी के लिए पढ़ाई करनी चाहिए और समाज अंधेरे से उजाले की तरफ चल चुका है। शिक्षा की देवी का नाम सावित्री बाई फुले का नाम आता है, भारत की पहचान दुनिया को बुद्ध से पहचान होती है, जहां बुद्ध वहां युद्ध है। सत्ता के लोग का मांग था चार सौ पार मगर आया एकदम कम, जिससे सत्ता के लोग वैशाखी पर आ गए।

उन्होंने कहा कि बद्रीनाथ मंदिर में जो मूर्ति हैं, वो बुद्ध की मूर्ति है, सुबह जब श्रृंगार होता है और कपड़ा आभूषण, मुकुट जब पहनते है तो एक दम बुद्ध की मूर्ति दिखाई देती है जिसको देखना है, वो जाकर खुद देख सकता। डॉ. सच्चिदानंद मौर्य (राष्ट्रीय प्रवक्ता सम्राट अशोक क्लब भारत) ने बताया कि अहरौरा के मां भंडारी देवी मंदिर के पास सम्राट अशोक के शिलालेख हैं, पुरातत्व विभाग ने इस शिलालेख को संरक्षित किया है और इसे एक कमरे में रखा गया है।

पुरातत्व विभाग के मुताबिक, यह शिलालेख ब्राम्ही भाषा में लिखा गया है, इतिहास के मुताबिक, सम्राट अशोक बौद्ध धर्म अपनाने के बाद प्रचार-प्रसार के लिए आए थे। अहरौरा पहाड़ियों से घिरा हुआ है और यहां कालांतर से ही राजाओं का आगमन हो रहा है, अहरौरा व्यवसायिक दृष्टि से भी संपन्न इलाका रहा है, अशोक के शिलालेखों को शिलालेख, स्तंभालेख, और गुफा अभिलेख में बांटा गया है।

अशोक ने अपने शासनकाल में 269 ईसा पूर्व से 231 ईसा पूर्व तक कुल 33 अभिलेख अभिलिखित कराए थे। अशोक द्वारा लिखा गया पहला ज्ञात शिलालेख, कंधार द्विभाषी शिलालेख है। यह ग्रीक और अरामी में लिखा गया था और भंडारी देवी के पहाड़ पर स्थित गुंबद में ऐतिहासिक अशोक शिलालेख है।

विशिष्ट अतिथि पुष्पा तीग्गा, आर. एस. पटेल, स्मेश चंद्र नेगी, प्रोफेसर किरण यादव, डॉ रवि गुप्त मौर्य, तेज प्रताप सिंह, जवाहर लाल मौर्य रहे। कार्यक्रम के संचालन प्रेम शंकर मौर्य ने किया।
इस दौरान अध्यक्ष प्रवेश मौर्य, रामवृक्ष वर्मा, एड. सुशीला वर्मा, सुजिन्दर वर्मा, शैलेंद्र मौर्य, डॉ गुरुचरन मौर्य, प्रेमशंकर मौर्य, विवेक मौर्य, बाबूलाल मौर्य डीह, कुलदीप कुशवाहा, बजरंगी कुशवाहा सहित सैकड़ों मौर्यवंश उपस्थित रहे।

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