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पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष ने किया न्याय;
0 लगाया गया आरोप अनुचित एवं निराधार पाया, कहा- पिछडे वर्ग के उत्पीडन की संज्ञा में है यह मामला
0 राजीव कुमार गुप्ता की रोकी गयी एक वेतनवृद्धि एवं अब तक के समस्त बकाये वेतन भुगतान दिया फैसला
फोटोसहित
मीरजापुर।
उत्तर प्रदेश पिछडा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष सोहन श्रीमाली की अदालत ने मीरजापुर सीएमओ ऑफिस के कनिष्ठ लिपिक राजीव कुमार गुप्ता को न्याय प्रदान करते हुए उनके ऊपर लगाए गये आरोप को अनुचित एवं निराधार पाया और कहा है कि यह पिछडे वर्ग के उत्पीडन की संज्ञा में है। उपाध्यक्ष श्रीमादी ने राजीव कुमार गुप्ता की रोकी गयी एक वेतनवृद्धि एवं अब तक के समस्त बकाये वेतन भुगतान का फैसला दिया है। लगभग चार साल बाद न्याय मिलने से श्रीगुप्ता ने हर्ष व्यक्त किया है।

प्रकरण में शिकायतकर्ती किरन गुप्ता निवासी टंडनपुरी कालोनी ने आरोप लगाया था कि उनके पति को कतिपय प्रकरणों में अनाधिकृत तरीके से धनार्जन करने एवं अन्य भ्रष्टाचार में लिप्त होने की प्राप्त शिकायतों के आधार पर विन्ध्यायल मण्डल मीरजापुर से अन्यत्र किये जाने के अनुरोध पर उनका स्थानान्तरण किया गया।शिकायतकर्ती के पति विन्ध्याचल मण्डल मीरजापुर में 26 वर्षों से तैनात है। प्रकरण की सुनवाई में विभाग से श्री गुप्ता के अनाधिकृत तरीके से धनार्जन करने एवं भ्रस्टाचार में लिप्त होने का साक्ष्य उपलब्ध कराने हेतु कहा गया, तो विभाग द्वारा कहा गया कि मण्डलायुक्त के पत्र दिनांक 22 मई, 2021 के परिप्रेक्ष्य में शिकायतकर्ती के पति राजीव कुमार गुप्ता का स्थानान्तरणमीरजापुर से निदेशक (प्रशासन), चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं उ०प्र० लखनऊ द्वारा अपने पत्र 29 जून, 2021 द्वारा मुख्य चिकित्साधिकारी महोबा किया गया। तत्पश्चात मण्डलायुक्त मीरजापुर को श्री गुप्ता के अनाधिकृत तरीके से धनार्जन करने एवं भ्रस्टाचार में लिप्त होने का साक्ष्य उपलब्ध कराने हेतु पत्र आयोग द्वारा प्रेषित किया गया। मण्डलायुक्त के प्रतिनिधि सुनवाई में उपस्थित हुए एवं उनके द्वारा प्रकरण के सम्बन्ध में आख्या उपलब्ध करायी गयी, परन्तु उनके द्वारा भ्रस्टाचार में लिप्त होने का कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया। सुनवाई में उपस्थित विभागीय प्रतिनिधि द्वारा मौखिक रूप से स्वीकार किया गया कि शिकायतकर्ता के पति राजीव कुमार गुप्ता के साथ अन्याय हुआ है। इस आरोप से श्री गुप्ता की सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल हुई तथा सहकर्मी के साथ कार्य करने में लज्जा एवं हीन भावना महसूस होने लगी।

विशेष सचिव, चिकित्सा अनुभाग-4, उ०प्र० शासन के पत्र संख्या-डब्लू-154(1)/पाँच-4-2025, दिनांक- 4 अप्रैल, 2025 में दिये गये निर्देश के कग में निदेशक (प्रशासन) द्वारा अपने पत्र संख्या-4डी (1)/04/2015/पार्ट-2/1936, दिनांक-07-04-2025 द्वारा अपने पूर्व कार्यालय ज्ञाप संख्या-4डी (1)/04/2015/पार्ट-2/1930-35, दिनांक-07-04-2025 द्वारा महानिदेशालय द्वारा पूर्व में निर्गत कार्यालय ज्ञाप संख्या-4डी (1)/04/2015/ पार्ट 2/ 4321-25, दिनांक-29-06-2021 में से संगत अंश (अनाधिकृत तरीके से धनार्जन एवं अन्य भ्रष्टाचार में लिप्ट) विलोपित कर दिया गया, जिससे स्पष्ट है कि विभाग द्वारा प्रार्थिनी के पति श्री गुप्ता पर पूर्व लगाये गये आरोप मिथ्या था, जिसका कोई औचित्य ही नहीं था। जिससे स्वतः स्पष्ट है कि राजीव कुमार गुप्ता पर लगाये आरोप अनुचित एवं निराधार था, एक पिछडे वर्ग के उत्पीडन की संज्ञा में है। साथ यह भी उल्लेखनीय है कि श्री गुप्ता पर लगाये उक्त आरोपों के कारण अधिकारी एवं सहकर्मियों द्वारा उपेक्षित दृष्टिकोण अपनाने के कारण उनके बीच कार्य करने में अपने को अराहज महसूस करने लगें। मुख्य चिकित्सा अधिकारी महोबा द्वारा श्री गुप्ता के पत्रों को रिसीव किये जाने से मना किया जाना, अपीलीय-पत्र को अग्रसारित न किया जाना एक प्रकार से उनका मानसिक उत्पीड़न किया गया, जिससे हताश-निराश होकर शिकायतकर्ता के पति की कार्यालय में उपस्थिति अवरूद्ध हुई।
आयोग के उपाध्यक्ष सोहन लाल श्रीमाली ने कहा है कि वर्णित तथ्यों एवं परिस्थित्तियों को दृष्टिगत रखते हुए सम्यक विचारोपरान्त आयोग का मत है कि राजीव कुमार गुप्ता की रोकी गयी एक वेतनवृद्धि एवं अब तक के समस्त बकाया वेतन का भुगतान किया जाय तथा कृत कार्यवाही एक माह के अन्दर अवगत कराया जाय। उपरोक्तानुसार संस्तुति की जाती है।

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