मीरजापुर।
पुलिस महानिदेशक उ0प्र0 के निर्देश पर चलाये जा रहे अभियान “ऑपरेशन कन्विक्शन” के तहत “पीयूष मोर्डिया” अपर पुलिस महानिदेशक वाराणसी जोन, वाराणसी के निर्देशन व “आर.पी.सिंह” पुलिस महानिरीक्षक विन्ध्याचल परिक्षेत्र मीरजापुर के नेतृत्व में “सोमेन बर्मा” पुलिस उपमहानिरीक्षक/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मीरजापुर द्वारा जनपद में महिला सम्बन्धित अपराध सहित लूट, हत्या, डकैती, धर्म परिवर्तन, गोवध अधिनियम व अन्य जघन्य अपराधों में प्राथमिकता के आधार पर लगातार गुणवत्तापूर्ण विवेचना तथा अभियोजन की सशक्त एवं प्रभावी पैरवी करायी जा रही है।
अभियोजन के अनुसार थाना अदलहाट पर युवक की हत्या एवं मारपीट व आगजनी की घटना से सम्बन्धित अभियोग में पुलिस द्वारा प्रभावी पैरवी करते हुए गवाहों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर गवाही करायी गयी, जिसके परिणाम स्वरूप न्यायालय विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट मीरजापुर द्वारा दोषसिद्ध 2 अभियुक्तों को आजीवन सश्रम कारावास एवं ₹ 61200/- के अर्थदण्ड की सजा सुनायी गयी।
अभियोजन के अनुसार 9 मई 2002 को थाना अदलहाट पर वादी राजकुमार पुत्र जयकरन निवासी भुइली खास थाना अदलहाट जनपद मीरजापुर द्वारा नामजद अभियुक्तों के विरुद्ध एकराय होकर वादी के घर पर आकर गाली गलौज व जान माल की धमकी देते हुए मड़ई में आग लगा देने, वादी के साले विकास को पत्थर से मारकर मृत्यु कारित कर देने तथा अन्य पारिवारिक सदस्यों के चोटिल हो जाने के सम्बन्ध में दिए गये प्रार्थना पत्र पर थाना अदलहाट पर मु0अ0सं0-120/2002 धारा 147,302,336,436,504,506 भादवि व 3(2)(5) एससी/एसटी एक्ट पंजीकृत कर नामजद अभियुक्तों को गिरफ्तार कर न्यायालय/जेल भेजा गया।
अभियोजन अधिकारी एडीजीसी विनोद कुमार गुप्ता, विवेचक- क्षेत्राधिकारी चुनार ए0के0सिंह, कोर्ट मुहर्रिर उपनिरीक्षक राजेश कुमार तिवारी व आरक्षी विनोद गोस्वामी तथा पैरोकार मुख्य आरक्षी प्रदीप कुमार द्वारा प्रभावी पैरवी कर समस्त साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। जिसके फलस्वरूप गुरूवार 29.जनवरी.2026 को न्यायालय विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट मीरजापुर ऋचा जोशी द्वारा दोषसिद्ध 2 अभियुक्तों गुड्डू उर्फ छोटे पुत्र अबुल मजीद व ताज मोहम्मद पुत्र अब्दुल कलाम निवासीगण भुली खास थाना अदलहाट जनपद मीरजापुर को अन्तर्गत धारा 147,302/149,336,436,504,506(2),323/149 भादवि में आजीवन सश्रम कारावास एवं ₹ 61200/- के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया, अर्थदण्ड अदा न करने की दशा में एक वर्ष के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा सुनायी गयी।



