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मीन संक्रांति पर रविवार को सूर्यदेव करेंगे गोचर; मीनार्क के खरमास में किया जाएगा श्राद्ध-तर्पण पितृ पक्ष के समान मिलता है पिंडदान का पुण्य बाणगंगा तालाब के तट पर होगा तर्पण

मुंबई। ग्रहों के राजा सूर्यदेव शनिवार 14 मार्च की मध्य रात्रि (रविवार 15 मार्च को सुबह) 1:08 बजे देवगुरु बृहस्पति की मीन राशि में प्रवेश करेंगे। रविवार को सूर्य की मीन संक्रांति के साथ ही मीनार्क का खरमास प्रारंभहो जाएगा। इसके चलते एक महीने के लिए सभी मांगलिक कार्य बंद हो जाएंगे। सनातन धर्म में पितरों (पूर्वजों) को भी ईश्वर के समतुल्य स्थान प्राप्त है। पितृदेव की कृपा पाने के लिए पितृ पक्ष का विशेष काल निर्धारित किया गया है।

इस दौरान लोग पिंडदान, तर्पण श्राद्ध आदि कर्म करते हैं। भाद्रपद की पूर्णिमा से अश्विन माह की अमावस्या तक चलने वाले पितृपक्ष में लोग पितरों को पिंडदान करते हैं। इसी तरह से चैत्र माह में एक माह के लिए लगने वाले ‘मीनार्क’ के खरमास में भी पिंडदान, तिलांजलि, तर्पण आदि अनुष्ठान किए जाते हैं। ज्योतिषाचार्य डॉ. अशोक मिश्र के अनुसार, इस वर्ष 15 मार्च से 14 अप्रैल तक खरमास में पितरों का तर्पण किया जाएगा। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य के मीन राशि में गोचर (संक्रांति) को मीनार्क और धनु राशि में गोचर (संक्रांति) को धनार्क कहा जाता है।

दक्षिण मुंबई के मालाबार, वालकेश्वर स्थित पौराणिक बाणगंगा तालाब पर वैसे तो प्रत्येक अमावस्या को लोग पितरों को संतुष्ट करने के लिए तर्पण आदि अनुष्ठान करने आते हैं, लेकिन पितृ पक्ष, धनार्क और मीनार्क केख रमास में अधिक संख्या में तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध आदि कार्य के लिए आते हैं। इसके चलते यहां पिंडदान, श्राद्ध, तर्पण आदि अनुष्ठान कराने के लिए विशेषज्ञ कर्मकांडी महापात्र उपलब्ध रहते हैं।

 

सौर वर्ष का समापन

सनातन संवाटर हिंदू वर्ष के चंद्र मास (पूर्णिम से पूर्णिमा तक) में जहां 12 महीने (चैत्र से फाल्गुन तक) होते हैं तो सौर वर्ष (सूर्य का 12 राशियों के क्षमण) में भी 12 होर मात होते हैं। यह मेघ की संक्रांति से मीन की संक्रांति तक चलता है। इस तरह से सूर्य की मीन संभांति सर वर्ष का अंतिम मह होता है। पंचांग के अनुसार, जब सूर्य देव निरंतर बरण के दौरान मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तो खैर वर्ष के अंतिम माह में गोचर करते हैं। यह समय प्रकृति और ब्रह्मांड में एक बड़े बदलाव का सूचक होता है, जो विवाई और नई शुरुआत के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी है।

 

सूर्यदेव की पूजा करना शुभ

जमीन संक्रांति पर शुभ मुहूर्त में स्वान-ध्यान करता व सूर्यवंव की पूजा करना शुभ होता है। जीत संक्रांति का पुण्य फाल सुबह 6:41 बजे से वोहर 12:40 बजे तक रहेगा। महा पुण्य काल सुबह 6:41 बजे से सुबह 8:41 बजे तक है। पुण्य क्षण मध्य रात 1:08 बजे तक है।

सनातन धर्म में साल भर अनेक पर्व, त्येहार तथा देवी-देवता पूजन की समय और तिथि का निर्धारण किया गया है। सनातन धर्म पूर्णल वैज्ञानिक अधार पर है। इसी के तहत पूर्वजे के पूजन के लिए पितृ पक्ष, बनार्क तथा मनार्क के खरमास की वावस्था की गयी है। इस दौरान शुभ कार्य वर्जित राहते हैं।

-ज्योतिषाचार्य डॉ. अशोक मिश्र (गोल्ड मेडलिस्ट)

पितरों की अनदेखी करने वाले जातक अवसर पितृदोष से पीडित होते है। सथन सुलभ होते हुए भी जीवन अभाव रहता है। बनते काम बिगड़ जाते हैं, इसलिए पूर्वजों की पूत का विधान बकया गया है। पितृ बोध का निवारण तर्पण आदि से होता है। -पं. पवन पाठक, महामात्र

||समाज-संस्था ब्रीफ।।

 

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