इतिहास राष्ट्र की सामूहिक स्मृति है, इसे प्रमाणों तथा शोध के आधार पर समझना जरूरी: प्रोफेसर इंदू भूषण द्विवेदी
0 इतिहास विज्ञान आधारित गोष्ठी संपन्न
मीरजापुर। भारतीय इतिहास संकलन समिति की जिला इकाई के तत्वावधान में जीडी बिनानी पीजी कॉलेज में बुधवार को विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में इतिहास को वैज्ञानिक दृष्टि से समझने और साक्ष्यों के आधार पर इतिहास लेखन की आवश्यकता पर मंथन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने भाग लेकर विषय पर अपने विचार रखे। गोष्ठी का विषय इतिहास विज्ञान आधारित अंत्याधुनिक दृष्टि रखा गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए समिति के जिलाध्यक्ष प्रोफेसर इंदू भूषण द्विवेदी ने कहा कि इतिहास राष्ट्र की सामूहिक स्मृति है और इसे प्रमाणों तथा शोध के आधार पर समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि इतिहास को साक्ष्यों की कसौटी पर नहीं परखा गया तो आने वाली पीढ़ियों को वास्तविक ऐतिहासिक दृष्टि नहीं मिल सकेगी। भारतीय इतिहास संकलन समिति का उद्देश्य देश के विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतों का संकलन कर उन्हें शोध के लिए उपलब्ध कराना है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जीडी बिनानी पीजी कॉलेज के प्राचार्य एवं काशी प्रांत के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रोफेसर अशोक सिंह ने कहा कि इतिहास केवल घटनाओं का विवरण नहीं बल्कि प्रमाणों पर आधारित ज्ञान की विधा है। इतिहास लेखन में पुरातात्विक साक्ष्य, अभिलेखीय दस्तावेज, शिलालेख, साहित्यिक स्रोत और वैज्ञानिक अनुसंधान की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इन स्रोतों के समन्वित अध्ययन से ही किसी राष्ट्र की ऐतिहासिक चेतना को सही दिशा मिलती है।समिति की प्रांतीय उपाध्यक्ष प्रोफेसर अनुराधा सिंह ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा और ऐतिहासिक विरासत अत्यंत समृद्ध है। इतिहास के अध्ययन को केवल राजनीतिक घटनाओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता। समाज, संस्कृति, लोकजीवन और ज्ञान परंपरा भी इतिहास की महत्वपूर्ण धारा हैं।
उन्होंने नई पीढ़ी में इतिहास के प्रति जिज्ञासा और शोध की भावना विकसित करने पर जोर दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ शशिधर शुक्ला ने किया ।इस अवसर पर डॉ ध्रुव जी पांडे, डॉ ऋषभ कुमार और श्याम मोहन उपाध्याय,प्रो राजेश पाण्डेय ने भी विषय पर अपने विचार व्यक्त किए।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे। अंत में इतिहास के क्षेत्र में शोध, दस्तावेजीकरण और स्थानीय ऐतिहासिक स्रोतों के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया गया।





