0 ज्ञानवीर योजना ने बदली तक़दीर- दी उपाधि
0 प्रशिक्षण और आजीविका; कंप्यूटर विज्ञान विभाग में चयनित चार प्रतिभाओं में एक नूर मोहम्मद भी शामिल
मिर्जापुर। जनपद के चुनार स्थित दरगाह शरीफ़ एवं गाजीपुर जनपद के रेवतीपुर के मूल निवासी रहे इंजी. नूर मोहम्मद पुत्र वाजिद अली ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अद्वितीय उपलब्धि प्राप्त की है। उन्हें जेपी इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (जे.आई.आई.टी.) नोएडा में नियमित सहायक आचार्य (असिस्टेंट प्रोफेसर) पद हेतु चयनित किया गया है।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (यूजीसी-नेट) को दो बार सफलता पूर्वक उत्तीर्ण किया। जून 2024 में उन्हें 91.6 प्रतिशतांक प्राप्त हुए, जबकि जून 2025 में उन्होंने 94.9 प्रतिशतांक के साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इस उपलब्धि के आधार पर उन्हें आजीवन सहायक आचार्य (असिस्टेंट प्रोफेसर) पद की पात्रता प्राप्त हुई, साथ ही पीएच.डी. पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए भी वे योग्य घोषित किए गए।
ज्ञानवीर योजना बनी मार्गदर्शक
इनका चयन वर्ष 2019 में जेपी उच्च शिक्षा प्रणाली (JHES) द्वारा प्रारंभ की गई ज्ञानवीर योजना के अंतर्गत हुआ, जिसका उद्देश्य प्रतिभाशाली अभियंता स्नातकों को शिक्षण और अनुसंधान क्षेत्र में प्रशिक्षित कर उन्हें भावी शिक्षकों के रूप में तैयार करना है। विशेष बात यह रही कि इस योजना के अंतर्गत कंप्यूटर विज्ञान विभाग में देशभर से केवल चार अभ्यर्थियों का चयन हुआ था, जिनमें एक नाम नूर मोहम्मद का भी था।
योजना के अंतर्गत उन्हें ₹45,000 मासिक छात्रवृत्ति प्रदान की गई। इसके साथ ही, प्रथम तथा द्वितीय वर्ष में शैक्षणिक प्रदर्शन के आधार पर प्रोत्साहन राशि भी दी गई। योजना के अंतर्गत उन्होंने कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी में एम.टेक. उपाधि प्राप्त की, जिसमें उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमता (Artificial Intelligence) एवं मशीन शिक्षण (Machine Learning) में विशेषज्ञता अर्जित की। इस दौरान उन्हें प्रायोगिक शिक्षण एवं शोध प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया, जिससे उनके शिक्षण एवं अनुसंधान कौशल में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। उन्होंने एम.टेक. उपाधि 92% अंकों के साथ पूर्ण की तथा अपने शोध कार्य के अंतर्गत पोस्टर प्रस्तुति में प्रथम पुरस्कार भी प्राप्त किया।
ज्ञानवीर योजना मेरे जीवन में परिवर्तन का माध्यम: इंजी. नूर मोहम्मद
“ज्ञानवीर योजना मेरे जीवन में परिवर्तन का माध्यम बनी। इसने न केवल आर्थिक और शैक्षिक स्थिरता प्रदान की, बल्कि मुझे एक योग्य शोधकर्ता एवं शिक्षक बनने का मार्ग भी प्रशस्त किया।”
वे अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार, गुरुजनों, सरस्वती चिराग कोचिंग सेंटर और जेपी संस्थान की प्रगतिशील नीति को देते हैं। उनकी इस विशिष्ट उपलब्धि मिर्जापुर एवं गाज़ीपुर जनपद में हर्ष एवं गौरव का वातावरण है। वे अब क्षेत्रीय युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुके हैं।



