मीरजापुर।
उत्तर प्रदेश राजकीय अभिलेखागार संस्कृति विभाग लखनऊ और के.बी.पी.जी. कॉलेज मीरजापुर के संयुक्त तत्वावधान में “इतिहास का पुनर्पाठ और भारत बोध” विषय पर एक दिवसीय अभिलेख प्रदर्शनी और संगोष्ठी का आयोजन सोमवार को शिक्षक सामुदायिक भवन में किया गया।
मुख्य वक्ता वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता एवं प्रख्यात विचारक अभय जी ने संगोष्ठी को रेखांकित करते हुए बताया कि “इतिहास का पुनर्पाठ एवं भारत बोध” जैसे मूल विचार आज अत्यंत मूल्यवान, प्रासंगिक और अनिवार्य हैं। यह इतिहास पुनर्पाठ या लेखन पर आधारित एक ऐसा केंद्रीय विचार है, जिसमें देशज सांस्कृतिक, राजनैतिक, अर्थशास्त्रीय, ऐतिहासिक, मनोवैज्ञानिक और समाजशास्त्रीय विमर्शों की रचना की जा सकती है।

मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय मीरजापुर के कुल सचिव राम नारायण ने कहाकि अकादमिक ज्ञान-विमर्श में औपनिवेशिक मानस रचना के मूल में एक कथित इतिहास है, जो आधुनिक शिक्षा से प्रसारित मिथकों का व्याख्यान जान पड़ता है। इसलिए, भारत की ऐतिहासिक ज्ञान, परंपरा और इसके पारंपरिक मूल स्रोतों के लिए इतिहास की पुनर्पाठ की महती आवश्यकता है, जो भारतीय ज्ञान परंपरा में भारत की मूल सांस्कृतिक दृष्टि से भी आवश्यक है।
डॉ. देवेंद्र नाथ दुबे ने भारत के औपनिवेशिक इतिहास और वैदिक कालखंड को संदर्भित कर पुनर्पाठ या पुनर्लेखन का अर्थ इतिहास को नया दृष्टिकोण के साथ ऐतिहासिक लेखन में मौजूद पूर्वाग्रहों को दूर करना है, न कि ऐतिहासिक तथ्यों को बदलना बताया, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय पहचान को मजबूत करना, ऐतिहासिक अन्याय को सुधारना और युवा पीढ़ी को आत्म-बोध से जोड़ना है।
प्रोफेसर अमिताभ तिवारी ने भारतीय इतिहास पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए बताया कि स्कॉटिश इतिहासकार जेम्स मिल ने “ब्रिटिश भारत का इतिहास” नामक पुस्तक लिखी, जिसने भारत के इतिहास को तीन खंडों में विभाजित किया: हिंदू काल, मुस्लिम काल और ब्रिटिश काल। उनका कार्य एक औपनिवेशिक दृष्टिकोण अपनाता था, जिसमें उन्होंने तर्क दिया कि भारतीय समाज असभ्य है और ब्रिटिश शासन सुधार और प्रगति के लिए आवश्यक है। इसलिए, भारत के इतिहास का पुनर्पाठ और बोध होना अत्यंत आवश्यक है, ताकि हम अपने अतीत को सही मायने में समझ सकें और भविष्य के लिए सही दिशा में आगे बढ़ सकें।
अभिलेख प्रदर्शनी और संगोष्ठी में मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. महेंद्र कुमार, प्रोफेसर बालकेश्वर, डॉ. ऋषभ कुमार, अमित कुमार अग्निहोत्री और शिवकुमार यादव ने भी अपने विचार व्यक्त किए। केबीपीजी कालेज के प्राचार्य प्रोफेसर अशोक कुमार सिंह ने अतिथियों के प्रति आभार जताया और कार्यक्रम का संचालन डॉ. कुलदीप पांडेय ने किया।
इस अवसर पर प्रोफेसर राकेश कुमार शुक्ल, प्रोफेसर अशोक कुमार सिंह चंदेल, प्रोफेसर अर्चना पाण्डेय, प्रोफेसर रमेश चंद्र ओझा, प्रोफेसर मकरंद जायसवाल, प्रोफेसर नम्रता मिश्रा, प्रोफेसर ज्योतिश्वर मिश्र, डॉ. रीता मिश्रा, डॉ. शरद महरोत्रा, डॉ. अंबुज पांडेय, डॉ. अशोक कुमार पांडेय, डॉ. आशुतोष द्विवेदी, डॉ. मुकेश कुमार उपाध्याय, डॉ स्नेहलता पटेल, डॉ. प्रीतम कुमार सिंह, डॉ गुरुप्रसाद ओझा, डॉ. अमित कुमार, डॉ प्रभात सिंह, डॉ. प्रताप सिंह रत्नेश वर्मा और राजेश तिवारी समेत बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।



