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प्रोत्साहन राशि बहाल हो, नहीं तो बंद होने की स्थिति में पहुंच जाएंगी यूपी की राइस मिलें: केशव नाथ तिवारी
0 कहा- लगातार घाटे के कारण प्रदेश का चावल उद्योग बंदी की कगार पर पहुंच रहा
0 प्रोत्साहन राशि बहाल करने और रिकवरी में छूट बढ़ाकर 2 प्रतिशत करने की मांग
फोटोसहित
मीरजापुर। राइस मिलर्स एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष केशव नाथ तिवारी ने कहा है कि धान क्रय नीति 2026-27 में राइस मिलर्स को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि समाप्त कर किए जाने से प्रदेश के मिलर्स की परेशानी और भी बढ गयी है, जिसके कारण आक्रोश भी बढ रहा है। प्रोत्साहन राशि बहाल नहीं हुई, तो राइस मिलें बंद होने की स्थिति में भी पहुंच सकती हैं। लगातार घाटे के कारण प्रदेश का चावल उद्योग बंदी की कगार पर पहुंच रहा है। उन्होने सरकार से प्रोत्साहन राशि बहाल करने और रिकवरी में छूट बढ़ाकर 2 प्रतिशत करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो मिलर्स सरकारी कार्यों से विरत रहेंगे और आंदोलन कर सकते हैं।
उन्होने बताया कि एक क्विंटल धान से लगभग 48 से 50 किलोग्राम चावल की रिकवरी होती है, जबकि सरकार 67 किलोग्राम चावल लेती है. इसकी भरपाई से मिलर्स को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होने रिकवरी में छूट 1.5 से बढ़ाकर 2 परसेंट करने और पीसीएफ, यूपीएसएस व पीसीयू पर लंबित भुगतान जल्द कराने की मांग की है। कहा कि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो राइस मिलें बंद होने की स्थिति में पहुंच सकती हैं।

उन्होंने बताया कि एसोसिएशन ने सीएम से लगातार मुलाकात कर प्रोत्साहन राशि को धीरे-धीरे बढ़ाकर 35 रुपये प्रति क्विंटल तक कराया, लेकिन इस वर्ष इसे समाप्त कर दिया गया है। ऐसे मे पहले से आर्थिक संकट झेल रहे राइस मिलर्स की मुश्किलें और भी बढ़ गई हैं।
प्रदेश उपाध्यक्ष श्री तिवारी ने कहा कि यदि सरकार ने राइस मिलर्स की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया, तो वे सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) का कार्य करने में असमर्थ होंगे। ऐसी स्थिति में सरकारी खरीद एजेंसियों के सामने भी परेशानी खड़ी होगी और किसानों को अपनी उपज औने-पौने दाम पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि जबरन कार्य कराने का प्रयास किया गया, तो प्रदेश की राइस मिलें बंद होने की स्थिति में पहुंच सकती हैं।

बडी विडंबना: सन 1980 से ही महज 10 रुपये प्रति क्विंटल मिल रही कटाई
बताया कि बडी विडंबना है कि वर्ष 1980 से राइस मिलर्स को कुटाई के लिए मात्र 10 रुपये प्रति क्विंटल सरकार दे रही है। उस समय डीजल, बिजली, मजदूरी और राइस मिल स्थापित करने की लागत काफी कम थी, लेकिन वर्तमान में महंगाई बढ़ने से एक क्विंटल चावल तैयार करने का खर्च करीब 200 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। इसके मुकाबले सरकार से मिलने वाली कुटाई दर केवल 10 रुपये होने के कारण मिलर्स के लिए उद्योग चलाना मुश्किल हो रहा है। एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि राइस मिलर्स को प्रोत्साहन राशि फिर से दी जाए और वर्तमान में मिल रही रिकवरी की 1.5 प्रतिशत छूट को बढ़ाकर 2 प्रतिशत किया जाए, साथ ही, खरीद एजेंसियों पीसीएफ, यूपीएसएस और पीसीयू पर राइस मिलर्स के लंबित भुगतान का शीघ्र निस्तारण करने की मांग की गई है।

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