माता भगवती देवी शर्मा के जन्म शताब्दी वर्ष एवं अखंड दीप शताब्दी वर्ष का भव्य आयोजन
मीरजापुर।
वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी के जन्म के सौ वर्ष पूर्ण होने पर वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना से नारी उत्कर्ष एवम् सम्मान समारोह के साथ ही अखंड दीप शताब्दी वर्ष पर शताब्दी वर्ष समारोह का आयोजन रविवार, 16 अगस्त 2026 को ओझला बावनवीर स्थित गायत्री परिवार के रचनात्मक चेतना केंद्र के सभागार मे संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ अतिथियों द्वारा मां गायत्री एवं वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा
के पूजन से हुआ। तत्पश्चात नारी उत्कर्ष एवम् सम्मान समारोह मे विशिष्ट मात्र शक्तियों को सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि मझवा विधायक सुचिस्मिता मौर्या ने कहाकि विश्व की सभी समस्याओं का समाधान भारतीय परंपरा में ही निहित है और भारत का पुनर्निर्माण समग्र विश्व के लिए कल्याणकारी होगा।
1925-26 का कालखंड राष्ट्रीय पुनर्जागरण का काल था, उसी समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, गीता प्रेस और अखंड ज्योति का शुभारंभ हुआ था।
कहाकि पं श्रीराम शर्मा जी ने आस्था, अध्यात्म और संस्कृति से व्यक्ति निर्माण, व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण से युग निर्माण की संकल्पना रखी।
‘हम बदलेंगे, युग बदलेगा’ का संदेश देकर पंडित आचार्य शर्मा जी ने पूरे राष्ट्र को नई दिशा और संकल्प शक्ति दी थी, जिसे आज भी गायत्री परिवार आगे बढा रहा है।
विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश महिला आयोग की सदस्य श्रीमती नीलम प्रभात ने कहा कि पं राम शर्मा जी ने कहा कि धर्म और विज्ञान एक-दूसरे के पूरक हैं, विरोधी नहीं। उन्होंने अध्यात्म को तर्क और विवेक की कसौटी पर कसने में अहम योगदान दिया। एक जमाने में लोग हिंदुत्व की बात करने में भी झिझकते थे, आज गर्व से अपने धर्म की बात करते हैं। गायत्री मंत्र से जो ऊर्जा और चेतना जागृत होती है, उसके उपयोग से ऐसे भारत की रचना करनी है, जो पूरे विश्व के कल्याण की भावना के साथ आगे बढ़े।
उन्होंने गायत्री परिवार की बहनों से कहाकि नारियों के बीच सुधार के लिए व्यापक प्रयास नही हुआ। लेकिन समय समय पर मातृशक्तियों ने अपने स्वरुप को जनमानस के बीच रखा है। देश को जब शिवाजी की जरुरत पडी तो जीजाबाई आई, अहिल्याबाई आई, अनेक महिलाए आयी। इन सबने क्या
संस्कार संस्कृति छोडा, नहीं। युनान मिश्र रोमा सारे मिट गये जहां से, कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं समारी। ऐसा नहीं कि ये सभी देश नष्ट हो गये, बल्कि वहा की संस्कृति और सभ्यता को नष्ट कर दिया गया और देश अस्तित्वहीन हो गये। इसलिए माताओं बहनो के लिए आवश्यकथा है कि अपने अंदर और अपने अपने बेटे बेटियो को बचाए रखें, उन्हे अपनी संस्कृति सभ्यता से जोडे रखकर समाज की बुरी हवा न लगने दें।
सहायक प्रबंध ट्रस्टी इंद्रजीत शुक्ला ने कहाकि गायत्री मंत्र के 24 अक्षर 24 गुणों से संबंधित ग्रंथियों को संतुलित करते हैं, जब ये 24 गुण विकसित होते हैं, तो परमार्थ, वीरता और बुद्धि बढ़ती है। पं. आचार्य शर्मा जी ने भक्ति को मंदिरों के गर्भगृह से निकालकर गायत्री मंत्र के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाया है।आज़ादी के आंदोलन से लेकर समाज सुधार तक, पंडित श्री राम शर्मा जी ने राष्ट्रनिर्माण में अहम भूमिका निभाई।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से बहन बिंदु, नंदिनी मिश्रा, शीला सिंह, कल्याणी गोड, इंदु मिश्रा, अंजना पाराशर, जिला संयोजक हरिहर सिंह, उपजोन समन्वयक पंडित रमाशंकर द्विवेदी, प्रबंध ट्रस्टी इंजीनियर दिनेश, सहायक प्रबंध ट्रस्टी इंद्रजीत शुक्ला आदि ने संबोधित किया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से राजू गुप्ता, डॉक्टर राधेश्याम मौर्य, शशि गुप्ता, हरिश्चंद्र, डा. रामबली बिन्द, विभा शुक्ला, मीना चौरसिया, राजकुमार, लखन अग्रवाल आदि मौजूद रहे।





