छत्तीसगढ

आधुनिक सुख सुविधाओ से सुसज्जित मरवाही आज भी ग्राम पंचायत, मिले नगर पंचायत का दर्जा: प्रमोद परस्ते

पीथमपुर पेन्ड्रा (छत्तीसगढ़) से मनोज कुमार साकत की रिपोर्ट                              

ग्राम पंचायतों के परिसीमन का कार्य जारी है। इसी अवधि में मरवाही नगर पंचायत की घोषणा कर नए सिरे से तीनो पंचायतों को मिलाकर वार्डो के विभाजन की प्रक्रिया की जाती तो और अच्छा रहता। नये जिले की घोषणा के उपरांत जिले के विकास की परिकल्पना से सभी जिलेवासी आह्लादित है। ऐसे में कांग्रेस नेता प्रमोद परस्ते ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से लोहारी, मरवाही और कुम्हारी पंचायतों को मिलाकर मरवाही को नगर पंचायत के रूप में अपग्रेड करने की माँग की है। ऐसे मे अब यह माँग जोर पकडता जा रहा है।

ज्ञात हो कि मरवाही एक पुराना और बड़ा तहसील मुख्यालय है। सिंचाई विभाग और फारेस्ट विभाग का डिविशनल मुख्यालय है। यहाँ के विधानसभा क्षेत्र का नाम भी मरवाही से ही है। यहाँ स्कूल, कॉलेज, होस्टल, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, रेस्ट हाउस, बैंक, थाना, उद्यान, होटल, लॉज आदि सभी सुविधाएं हैं। किन्तु विडम्बना ही है कि अभी तक यह ग्राम पंचायत ही है। जबकि लगभग एक एक किलोमीटर के अंतर पर लोहारी, मरवाही, बरिईहा और कुम्हारी हैं, जो आपस मे जुड़ चुके हैं। यदि इन्हें मिलाकर नगर पंचायत बना दिया जाता है तो दस हजार की न्यूनतम जनसंख्या से अधिक जनसंख्या हो जाती है।

नये जिले के लिहाज से भी मरवाही का नगर पंचायत बनाया जाना लाज़मी होगा। मरवाही की जनता आधारभूत सुविधाओं से अभी तक वंचित है। जबकि वे इसके हक़दार हैं। नगर पंचायत बनने से सड़क, नाली, फायर ब्रिगेड, सफाई, प्रकाश, गली, सुरक्षा, जल आपूर्ति आदि की सुविधाओं में आमूलचूल वृद्धि होगी। इसके अतिरिक्त अधोसंरचना में भी विस्तार होगा। मरवाही का शहर के रूप में पहचान बढेगा।

मरवाही के समुचित विकास के लिए इसका नगर पंचायत के रूप में अपग्रेड किया जाना आवश्यक हो गया है । मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जिस तरह गाँव के विकास के लिये प्रयासरत हैं, उनसे मरवाहीवासियों को पूरी उम्मीद है कि विकास की एक और कड़ी में उन्हें नगर पंचायत का सौगात जरूर मिल सकता है।

 

मरवाही में अतिरिक्त जिलाध्यक्ष पेंड्रारोड, एवं अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पेंड्रारोड का लिंक कोर्ट,,न्यायालय कार्य कर रहा है। इसे भी नामित किये जाने की माँग की जावेगी। किसानों एवं आम मतदाताओं को सीमांकन एवं अन्य प्रकार के चालान पटाने हेतु 48 किलोमीटर दूर उप कोषालय गौरेला जाना पड़ता है।दूर जाने में समय भी बर्बाद होता है एवं पैसे भी खर्च होते है।विगत लोहारी,मरवाही प्रवास पर माननीय भूपेश बघेल मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन रायपुर को ज्ञापन देकर मरवाही में उप कोषालय खोलने की माँग की गई थी।इस प्रकरण को भी मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाई जाएगी।

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