पडताल

नियमो को ताख पर रखकर धड़ल्ले से चल रहा है मिर्जापुर जिले मे मिट्टी का खनन

0 पोर्टल के अनुसार 11 ईंट भठ्ठो के आवेदन परीक्षण की प्रक्रिया में है
0 250 भठ्ठो को खनन की स्वीकृति प्रदान करने का दावा
0 आरटीआई के तहत विभाग नही दे रहा है ईसी की कापी
भास्कर ब्यूरो, मिर्जापुर। 
जिले में ईंट मिट्टी के अवैध खनन के खेल में खान विभाग तथा जिला प्रशासन की भूमिका पर सवाल तो लम्बे समय से उठ रहा है,  किन्तु सूचना कानून के तहत जिले में मिट्टी के खनन से जुडी जानकारी मॉगने पर खान विभाग सूचना देने में कभी पीछे नही रहा। सूचना की प्रमाणिकता पर संदेह उस समय गहरा गया, जब गत वर्ष किसी ईंट भठ्ठे को मिट्टी खनन हेतू पर्यावरणीय स्वीकृति जारी न करने की सूचना देने वाले विभाग में न जिला स्तरीय पर्यावरण प्रभाव निर्घारण प्राधिकरण (डीईआईएए) के बैठक की सूचना, न ही कार्यवृत्ति का पता। अचानक 250 भठ्ठो को खनन की स्वीकृति प्रदान करने का दावा करने लगा। पूरे जिले में नियमो को ताक पर रखकर धड़ल्ले से मिट्टी का खनन शुरु हो गया। जबकि  इससे जुडी आधिकारिक पोर्टल पर दर्ज ऑकडो के अनुसार 11 ईंट भठ्ठो के आवेदन परीक्षण की प्रक्रिया में है। कोई भी ईसी जारी नही किया गया है।  मामले पर लम्बे समय से कार्य रहे एक पर्यावरण कार्यकर्ता ने सूचना कानून के तहत विभाग की ओर जारी सभी पर्यावरणीय स्वीकृति की छायाप्रति मॉगी तो विभाग की मुसीबत बढ गयी। खान अधिकारी ने पहले भ्रामक पत्र भेजकर सूचना प्राप्त करने की बात कही। इस पर आपत्ति करने पर पत्रावली की 1028 पृष्ट बताकर शुल्क का चालान जमाकर प्राप्त करने सूचना दी गयी। आवेदक जब चालान का फार्म प्रमाणित कराने के लिये खान अधिकारी से सम्पर्क किया तो खान अधिकारी ने प्रमाणित करने से मना कर दिया। सूचना कानून के उल्लंधन के इस प्रकरण में खान अधिकारी के विरुद्व राज्य सूचना आयोग से शिकायत की गयी है।
दूसरी ओर ईसी के सम्बन्ध में खान अधिकारी की सूचना तथा आधिकारिक पोर्टल पर दर्ज ऑकडो में विसंगति पर पर्यावरण कार्यकर्ता ने विभाग में शिकायत करके जारी सभी 250 ईट भठ्ठो की ईसी को तत्काल पोर्टल पर आनलाईन करने की मॉग की गयी तो खान अधिकारी ने अपनी निस्तारण आख्या में यथाशीघ्र प़त्रावली को आनलाईन करने की बात कही, किन्तु 15 दिन बीतने के बाद एक भी पत्रावली आनलाईन नही की जा सकी है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि आखिर क्या वजह है कि एक ओर खान विभाग अब तक जारी ईसी की कापी नही देना चाहता है तो दूसरी ओर पत्रावली पोर्टल पर आनलाईन भी नही कर रहा है।
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