आध्यात्म

सब देवता की पूजा अर्चना करना सरल है पर लड्डू गोपाल की सेवा उतनी ही कठिन: दिलीप कृष्ण भारद्वाज

विमलेश अग्रहरि, मिर्जापुर @ विंध्य न्यूज़
 महुवरिया स्थित बीएलजे इंटर कालेज के मैदान पर आयोजित श्रीराम कथा के पांचवे दिन के प्रसंग की चर्चा व्यासपीठ से दिलीप कृष्ण भारद्वाज ने कहा कि भगवान श्रीराम के जन्म लेने पर सभी देवी देवता अयोध्या में जा पहुंचे । कैलाश पर्वत के डोलने पर भोलेनाथ की तंद्रा टूटी । भोलेनाथ भी बेचैन हो उठे ।
कथावाचक ने कहा कि भगवान राम के जन्म लेते ही महादेव कैलाश पर्वत छोड़कर नीलगिरी पर्वत पर पहुंचे । वह  काकभुशुण्डि को चेला बनने पर राजी कर अयोध्या नगरी पहुंच गए । वहा सघन पहरा होने के कारण अंदर प्रवेश करने के महादेव गुरु बने और काकभुशुण्डि को चेला पहनाकर नजर झारनें वाले बनकर यशोदा के लल्ला के पास पहुंचे । वहा उन्होंने नजर झारने के साथ ही लल्ला को गोद में लेकर उनका भाग्य बांचा । द्वार पर महादेव के पहुंचने पर लल्ला रोने लगे । नजर उतारने वाले को अंदर लाया गया । भोलेनाथ का दर्शन कर श्रीकृष्ण खिल खिलाकर हंस पड़े ।
उन्होंने कहा कि जब भगवान श्रीकृष्ण वनवास गये तो वह 21 वर्ष की आयु उम्र पूरी कर 22 वें वर्ष में प्रवेश किया था । जब कर दूषण की बहन का नाक काटा तो दोनों भाई अपनी 14 हजार सैनिकों की सेना लेकर आ गये । रघुकुल नंदन श्रीराम के सुन्दर स्वरुप देख कर कहा कि वैसे तो मैंने अनेक हत्यायें की हैं पर ऐसी सुंदरता नहीं देखा है ।
भगवान के प्रति जैसी भावना होती है फल भी वैसा ही फल भी मिलता है ।
कहा कि सब देवता की पूजा अर्चना करना सरल है पर लड्डू गोपाल की सेवा उतनी ही कठिन है । भगवान को भोग में मिश्री तो पसंद है पर वह मसूड़ों में चुभ न जाये इसलिए माखन भी भोग लगाते हैं ।‌ ठण्ड के आने पर सर्दी न लग जाए इसलिए ऊनी वस्त्र धारण कराते हैं । यह हैं भक्त और भगवान की प्रिती । संगीतमय श्रीराम कथा के दौरान भक्तों ने जयकारा लगाते हुए झुमते हुए नृत्य किया ।
कथा के दौरान आलोक अग्रवाल, राजेश चौरसिया, संजय अग्रवाल,  महेंद्र जायसवाल, अनिल बरनवाल, मौजी दूबे, मालती त्रिपाठी, राजकुमारी खत्री, राधा विश्वकर्मा, सुषमा पाण्डेय, अनुप अग्रहरि, मधुकर मिश्र, पारसनाथ मिश्र, सुशील दुबे,  सोनू दुबे, नीलकंठ जायसवाल, एवं रामदत्त पाण्डेय आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे
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