पड़री, मीरजापुर। विकास खण्ड पहाड़ी के जद्दूपुर में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस कथा व्यास पं. विष्णु धर द्विवेदी ने भक्त प्रह्लाद, वामन अवतार, रामकथा एवं श्रीकृष्ण प्राकट्य का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि प्रह्लाद ने पिता हिरण्यकश्यप की यातनाओं के बावजूद प्रभु-स्मरण नहीं छोड़ा। उसकी अटल भक्ति से भगवान नरसिंह प्रकट हुए और अधर्म का अंत हुआ।
उन्होंने राजा बली-वामन चरित्र के माध्यम से गुरु-कृपा की महिमा बताई। कहा कि गुरु की कृपा हो जाए तो परमात्मा भी याचक बन जाते हैं। भगवान नारायण ने राजा बली के द्वारपाल बनकर भक्ति और समर्पण की महत्ता स्थापित की। कथा में रामकथा के माध्यम से धर्म व मर्यादा का संदेश भी दिया गया। इस अवसर पर पं. श्रीनिवास ओझा, पं. विजय चड्ढा, पं. प्रेमशंकर ओझा, आशीष मिश्रा, राधे मिश्रा, पीयूष, पन्नालाल, राजरूप, रामरूप, शिवस्वरूप, महेश्वर, जयप्रसाद, प्रमोद, राजेंद्र, आशुतोष, पंकज, चंद्रेश, आशीष, आनंद, भाजपा नेता प्रसून शुक्ला एवं पूर्व जिला मीडिया प्रभारी भाजपा ज्ञान प्रकाश दुबे, प्रेमशंकर शुक्ला आदि उपस्थित रहे।


