नई दिल्ली।
दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार की सुबह गोवा स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। 75 वर्षीय अभिनेता के निधन पर कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों और नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। सभी ने ईश्वर से प्रार्थना की है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान और शोकाकुल परिजनों व प्रशंसकों को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।
गोवा के अस्पताल में डॉक्टरों की 45 मिनट तक चली कोशिश
घटना के समय अभिनेता नाना पाटेकर गोवा के डोना पाउला स्थित अपने घर पर मौजूद थे। देर रात अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और वे घर पर बेहोश पाए गए। इसके तुरंत बाद, रात करीब 3:30 बजे उन्हें डोना पाउला के ही मणिपाल अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी सांसे थम चुकी थीं। अस्पताल के ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. शेखर सालकर ने जानकारी दी कि नाना पाटेकर का निधन गंभीर कार्डियक अरेस्ट की वजह से हुआ। डॉक्टरों की टीम ने उन्हें बचाने के लिए अथक प्रयास किए और लगातार 45 मिनट तक सीपीआर (CPR) दिया गया, लेकिन उनके शरीर में कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई। इसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने लिखा, “प्रख्यात अभिनेता, रंगमंच के सशक्त कलाकार और संवेदनशील समाजसेवी ‘पद्म श्री’ नाना पाटेकर का निधन कला जगत की अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपने विलक्षण अभिनय से भारतीय सिनेमा को समृद्ध किया और अपने सामाजिक सरोकारों से समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को भी अभिव्यक्त किया। प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान और शोकाकुल परिजनों व प्रशंसकों को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।”
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी ने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा कि प्रसिद्ध अभिनेता नाना पाटेकर के निधन का अत्यंत दुखद समाचार प्राप्त हुआ। उन्होंने अपने सशक्त अभिनय और प्रभावशाली संवाद से भारतीय सिनेमा में एक विशिष्ट पहचान बनाई। विभिन्न भूमिकाओं में उनके जीवंत अभिनय ने हिंदी सिनेमा को समृद्ध किया। उनका निधन फिल्म व कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। ईश्वर से प्रार्थना है कि पुण्यात्मा को श्रीचरणों में स्थान और शोकाकुल परिजनों व प्रशंसकों को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी जी ने लिखा, “महान अभिनेता नाना पाटेकर के अचानक निधन की दुखद खबर सुनकर गहरा सदमा लगा। भारतीय सिनेमा ने अपनी सबसे दमदार, सच्ची और बेमिसाल आवाजों में से एक को खो दिया है। नाना जी ने सिर्फ किरदार नहीं निभाए, उन्होंने हर भूमिका में बेबाक और असली सच्चाई को जीवंत कर दिया। ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’ और ‘प्रहार’ की जबरदस्त ऊर्जा से लेकर ‘अब तक छप्पन’ की गहरी तीव्रता तक, उनकी कला ने एक ऐसा मानक स्थापित किया, जिसके करीब पहुंचने की उम्मीद भी बहुत कम लोग कर सकते हैं।”
उन्होंने आगे लिखा, “सिनेमा की दुनिया से परे, उनका सादापन, गहरा विनम्र स्वभाव और सामाजिक कार्यों व ग्रामीण समुदायों के प्रति निस्वार्थ समर्पण उनके महान व्यक्तित्व को दर्शाता है। नाना पाटेकर की आत्मा को शांति मिले। आपकी आवाज, आपका जोशीला अंदाज और आपकी शानदार विरासत हमेशा हमारे दिलों में बसी रहेगी। उनके परिवार, दोस्तों और दुनिया भर में मौजूद लाखों प्रशंसकों के प्रति गहरी संवेदना। ओम शांति।”
संघर्ष से भरा शुरुआती दौर में 35 रुपये की कमाई से लेकर करोड़ों की संपत्ति तक का सफर
1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में जन्मे नाना पाटेकर का शुरुआती जीवन बेहद संघर्षपूर्ण और कठिनाइयों से भरा रहा था। उन्होंने आर्ट्स विषय से ग्रेजुएशन किया था और फिल्मों की चकाचौंध से कोसों दूर रहते थे। अपने शुरुआती दिनों में वे एक जगह पार्ट-टाइम नौकरी करते थे, जिसके एवज में उन्हें रोजाना सिर्फ 35 रुपये मिलते थे। तंगहाली के उस दौर में उन्होंने जीवनयापन के लिए सड़कों पर जेब्रा क्रॉसिंग पेंट करने और फिल्मों के पोस्टर बनाने जैसे कठिन काम भी किए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अपनी बेजोड़ मेहनत के बल पर उन्होंने करीब 80 से 100 करोड़ रुपये की नेटवर्थ बनाई। हालांकि, करोड़ों के मालिक होने के बावजूद उनका रहन-सहन हमेशा बेहद साधारण रहा और वे चकाचौंध से दूर अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा सामाजिक कार्यों व एनजीओ को दान करते थे।
उसूलों के पक्के थे नाना पाटेकर: एक फिल्म के लिए मांगे थे रिकॉर्ड 1 करोड़ रुपये
नाना पाटेकर उन गिने-चुने कलाकारों में गिने जाते हैं जिन्होंने कभी अपने उसूलों और काम से समझौता नहीं किया। सामान्य तौर पर वे एक फिल्म के लिए 2 से 3 करोड़ रुपये चार्ज करते थे। अभिनेता परेश रावल के अनुसार, नाना पाटेकर हिंदी सिनेमा के ऐसे पहले कैरेक्टर एक्टर बने थे जिन्होंने एक फिल्म के लिए रिकॉर्ड 1 करोड़ रुपये की मांग रखी थी और उसे हासिल भी किया था। हाल के प्रोजेक्ट्स की बात करें तो उन्हें फिल्म ‘ओ रोमियो’ (2026) के लिए लगभग 4 करोड़ रुपये मिले थे, जबकि फिल्म ‘द वैक्सीन वॉर’ के लिए उन्होंने अपनी तय फीस का केवल 20 फीसदी हिस्सा ही लिया था, जो यह साबित करता है कि वे पैसों से ज्यादा अच्छी पटकथा और कला को तवज्जो देते थे।
आखिरी समय तक परदे पर रहा अभिनय का अमर जलवा
साल 1978 में फिल्म ‘गमन’ से अपने अभिनय करियर की शुरुआत करने वाले नाना पाटेकर को असली पहचान साल 1986 में आई फिल्म ‘अंकुश’ से मिली। उन्होंने हिंदी सिनेमा के साथ-साथ मराठी सिनेमा में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी। ‘परिंदा’ में खतरनाक गैंगस्टर का किरदार हो, ‘प्रहार’, ‘तिरंगा’ और ‘क्रांतिवीर’ का धमाकेदार एक्शन अवतार हो, या फिर ‘खामोशी’, ‘वेलकम’, ‘अब तक छप्पन’, ‘गुलाम-ए-मुस्तफा’, ‘नटसम्राट’ और ‘अपहरण’ जैसी मास्टरपीस फिल्में हों, उन्होंने हर किरदार में अपनी जान फूंक दी। साल 2025 में वे मल्टीस्टारर फिल्म ‘हाउसफुल 5’ में नजर आए थे, और इसके बाद शाहिद कपूर के साथ ‘ओ रोमियो’ तथा अनिल कपूर के साथ ‘सूबेदार’ जैसे प्रोजेक्ट्स में उनका खास अंदाज देखने को मिला था। नाना पाटेकर भले ही आज हमारे बीच शारीरिक रूप से नहीं हैं, लेकिन उनकी बेहतरीन फिल्में और बेमिसाल अदाकारी हमेशा प्रशंसकों के दिलों में अमर रहेगी।





