अंबेडकर, लोकनायक, नेहरु, गांधी और सुभाष सभी ने संघ की तारीफ की: सह प्रांत कार्यवाह राज बिहारी जी
0 कबा- संघ की सफलता का रहस्य
और शक्ति का केंद्र शाखा है: प्रांत कार्यवाह
0 हिंदुत्व के वैचारिक अधिष्ठान की प्रतिबद्धता है
0 शाखा संगम मे नगर के विभिन्न बसःतियों से कुल 35 ध्वजों के साथ 35 शाखाएं लगी
फोटोसहित
मीरजापुर।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम के तहत रविवार को नगर के बीएलजे मैदान में शाखा संगम का आयोजँ किया गया, जिसमे नगर के विभिन्न बस्तियों से कुल 35 ध्वजों के साथ 35 शाखाएं लगी।
शाखा संगम का शुभारंभ सह प्रांंत कार्यवाह जी एवं नगर संघचालक अशोक सोनी जी द्वारा भारत माता, डाक्टर हेडगेवार एवं गुरु जी के चित्र पर पुष्पार्चन कर किया गया। शाखा संगम मे लगी शाखाओं मे अपने अपने शाखा मे स्वयंसेवकों ने योग व्यायाम, खेल, सूर्य नमस्कार आदि किया। ततपश्चात एकलगीत, अमृत वचन के बाद मुख्य वक्ता सह प्रांत कार्यवाह राज बिहारी जी का पाथेय प्राप्त हुआ।
सह प्रांत कार्यवाह राज बिहारी जी ने कहाकि अपने जीवन के अंतिम समय तक संघ का कार्य संघ कार्यकर्ता करता है और यहा आने की कोई आयु नहीं है। संघ की शक्ति का आधार हमारा कार्यकर्ता और संघ का लक्ष्य हिंदुत्व के चिंतन के आधार पर भारत माता की जय है।
इसी को अंतरभूत करते हुए स्वयंसेवकों ने हर युद्ध मे ने सहयोग किया है। गोरक्षा के लिए करोडो देशवासियों का हस्ताक्षर अभियान चलाया गया, भुज, सुनामी जैसे तमाय आपदाओं में स्वयंसेवकों कार्य किया है।
बताया कि महात्मा गांधी जी ने संघ के एक वर्ग मे कहा था कि जिसकी हम बात करते है, डाक्टर हेडगेवार साहब आप करके दिखा रहे हैं। सब लोग बिना भेदभाव एक साथ भोजन कर रहे हैं। डा. अंबेडकर ने कहा कि संघ का कार्य अच्छा है, यह कार्य और तेजी से होना चाहिए। नेता जी सुभाष चंद्र बोष जी ने संघ की तारीफ की, रहां तक कि डा. हेडगेवार से मिलने गये, लेकिन मुलाकात नही हो सकी थी और उसके कुछ दिन बाद डा. साहब का निधन हो गया था। समाजवादी लोकनायक जय प्रकाश जी ने 1975 के आपातकाल के विरुद्ध कार्यकर्ताओं के आंतरिक आंदोलन को देखकर उसकी प्रशंसा की थी। प्रधानमंत्री नेहरू जी संघ के विपरीत चिंतन के बाद भी 1962 की लडाई मे स्वयंसेवकों की सहायता के कार्य को इंटेवीजेंस के माध्यम से जानकर प्रभावित हुए थे और कहा था कि 1963 के परेड मे स्वयंसेवक शामिल हो। सन 1963 मे 3000 संघ स्वयंसेवक दिल्ली के परेड मे शामिल हुए। सब ने संघ की प्रशंसा की, क्योकि संघ और संघ का स्वयंसेवक स्व की बजाय देश और राष्ट्र के लिए कार्य कर रहा है। वसुधैव कुटुंबकम और सर्वे भवंतु सुखिनः के साथ विश्व कल्याण संघ का मूलभाव है।
उन्होने कहाकि देश में सांस्कृतिक आधार पर समाज को जगाने का कार्य कर रहा है. संघ का संगठन हर क्षेत्र मे आगे बढ रहा है। उन्होने संघ के पंचप्रण के विषयो सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, स्व का भाव स्वदेशी जागरण, पर्यावरण, नागरिक कर्तव्य को रखते हुए इसे समाज परिवर्तन का आधार बताया। इस अवसर पर भारी संख्या मे संघ के दायित्वधारी एवं स्वयंसेवक बंधु मौजूद रहे।


