विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर बिनानी पीजी कॉलेज में हुआ जागरूकता कार्यक्रम
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मीरजापुर। जीडी बिनानी पीजी कॉलेज में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर “Stronger Minds, Brighter Tomorrows” (सशक्त मन, उज्ज्वल भविष्य) विषय पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि जयप्रकाश विश्वविद्यालय छपरा के पूर्व कुलपति प्रोफेसर हरिकेश सिंह तथा विशिष्ट अतिथि हंडिया पीजी कॉलेज के पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर रघुराज सिंह उपस्थित रहे। अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर अशोक कुमार सिंह तथा संचालन मनोविज्ञान विभाग के डॉ. अभिषेक कुमार मौर्य ने किया।
मुख्य अतिथि प्रोफेसर हरिकेश सिंह ने मानसिक स्वास्थ्य के लिए स्वयं को जानने, आत्मविश्लेषण करने तथा आत्मनिरीक्षण की प्रवृत्ति विकसित करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहाकि व्यक्ति को अपने विचारों, भावनाओं, व्यवहार और प्रतिक्रियाओं को समझने का निरंतर प्रयास करना चाहिए। स्वयं के प्रति जागरूकता व्यक्ति को अपनी कमजोरियों को पहचानने, सकारात्मक गुणों को विकसित करने तथा जीवन की चुनौतियों का संतुलित ढंग से सामना करने में सक्षम बनाती है।
प्रोफेसर सिंह ने पाश्चात्य ज्ञान परंपरा के मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोणों के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा की अंतर्दृष्टियों का समन्वय प्रस्तुत किया। उन्होंने भारतीय दर्शन में वर्णित आत्मचिंतन, स्वाध्याय, ध्यान और आत्मबोध जैसी अवधारणाओं की प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए बताया कि ये व्यक्ति को अपने अंतर्मन को समझने और मानसिक संतुलन विकसित करने की दिशा में प्रेरित कर सकती हैं। वहीं, आधुनिक मनोविज्ञान में आत्म-जागरूकता, भावनात्मक प्रबंधन तथा सकारात्मक सोच को मानसिक स्वास्थ्य के महत्त्वपूर्ण आधारों के रूप में देखा जाता है। उन्होंने इन दोनों ज्ञान परंपराओं के सार्थक समन्वय को आज के तनावपूर्ण जीवन में विशेष रूप से उपयोगी बताया।
प्रोफेसर रघुराज सिंह ने भी मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, सकारात्मक चिंतन और संवेदनशील सामाजिक वातावरण के महत्त्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में व्याप्त संकोच और भ्रांतियों को दूर करना आवश्यक है, ताकि प्रत्येक व्यक्ति अपनी समस्याओं को साझा करने और आवश्यकता पड़ने पर उचित सहायता प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित हो सके।
अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य प्रोफेसर अशोक कुमार सिंह ने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में मानसिक स्वास्थ्य की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। शिक्षा का उद्देश्य केवल बौद्धिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में भावनात्मक परिपक्वता, आत्मविश्वास, संवेदनशीलता और जीवन की चुनौतियों से निपटने की क्षमता विकसित करना भी है। उन्होंने महाविद्यालय में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा सहयोगपूर्ण शैक्षणिक वातावरण निर्मित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के संचालक एवं आयोजक डॉ. अभिषेक कुमार मौर्य ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने, खुलकर संवाद करने, दूसरों की बात ध्यानपूर्वक सुनने तथा जरूरतमंद व्यक्तियों को सहयोग प्रदान करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना एक स्वस्थ, संवेदनशील और सहयोगपूर्ण समाज के निर्माण के लिए आवश्यक है।


