राष्ट्रीय

नीति आयोग की बैठक में पुरानी पेंशन बहाली का विरोध करना ठीक नहीं: बी पी सिंह रावत 

मिर्जापुर। 

देश के 85 लाख एनपीएस कार्मिकों की मांग के लिए राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा लगातार आंदोलनरत है। पुरानी पेंशन बहाली मांग के लिए पूरे देश में हर दिन हर रोज अनेकों आंदोलन कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे है। राष्ट्रीय अध्यक्ष बी पी सिंह रावत ने कहा है कि राजस्थान छत्तीसगढ़ झारखंड पंजाब हिमाचल सरकार ने पुरानी पेंशन बहाली का निर्णय लिया है। इसी तरह अन्य राज्य सरकारों को भी जल्द पुरानी पेंशन बहाली का निर्णय लेना चाहिए।

बी पी सिंह रावत ने कहा है कि गत दिवस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ  नीति आयोग की बैठक में पुरानी पेंशन बहाली पर विचार न करने पर जोर दिया है, जिससे देश के 85 लाख एनपीएस कार्मिकों ने नराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि 2024 के लोक सभा चुनाव से पहले पुरानी पेंशन बहाली का निर्णय नही लिया, तो देश  के 85 लाख एनपीएस कार्मिक घर घर जाकर  पुरानी पेंशन बहाली के लिए देश की जनता से समर्थन मांगेगे इसके लिए बड़ी कार्ययोजना तैयार की जायेगी।

बी पी सिंह रावत ने स्पष्ट कहा है कि देश के 85 लाख एनपीएस कार्मिकों को केंद्र सरकार को हल्के में नहीं लेना चाहिए। लाखो हजारों अनुनय विनय करने बाद अब आर या पार के लिए तैयारी तेज की जा रही है। केंद्र सरकार को अच्छी तरह से समझना चाहिए कि हिमाचल और कर्नाटक में पुरानी पेंशन बहाली मुद्दे ने सरकार बदल दी है। अब देश के 85 लाख एनपीएस कार्मिकों की नजर 2024  के लोक सभा चुनाव पर है।

बी पी सिंह रावत ने कहा है कि एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पुरानी पेंशन को लेकर आर्थिक बोझ समझते हैं। दूसरी तरफ नया संसद भवन निर्माण में करोड़ों रुपए खर्च करते है, इसमें आर्थिक बोझ नहीं समझते है। विडंबना यह है कि मात्र एक दिन के कार्यकाल में भी विधायक सांसद को जीवन भर पुरानी पेंशन का लाभ दिया जाता है और दूसरी तरफ देश के सरकारी कर्मचारी अपने जीवन के   35 वर्ष देश सेवा में समर्पित करता है। उसको मात्र हजार रूपए दिया जाता है जो एक सरकारी कर्मचारी के साथ भद्दा मजाक है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष बी पी सिंह रावत ने कहा है कि देश के सभी एनपीएस कर्मचारी शिक्षक अधिकारी डाक्टर नर्स स्वास्थ्य कर्मी सफाई कर्मी बैंक कर्मी पुलिस कर्मी रेलवे कर्मी सभी कार्मिक 2024 के लिए कमर कस चुके है बड़े आंदोलन कार्यक्रमों की रूप रेखा तैयार की जा रही है।

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