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छह दशक, एक संदेशः “जिस शांति की तुम्हें तलाश है, वह तुम्हारे अंदर है”

0 एक संदेश जिसने दुनिया को जोड़ाः प्रेम रावत जी के छह दशकों की शांति यात्रा

0 सीमाओं से परे शांति का संदेश प्रेम रावत जी की 60 वर्षीय शांति यात्रा
मीरजापुर।
राज विद्या केंद्र दिल्ली द्वारा यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर द्वारका नई दिल्ली में तीन दिवसीय विशेष समारोह का आयोजन किया गया। यह समारोह प्रेम रावत द्वारा पिछले 60 वर्षों से शांति का संदेश जन-जन तक पहुँचाने के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों के 60 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। इन तीन दिवसीय समारोह के अंतर्गत 31 जुलाई, 1 अगस्त तथा 2 अगस्त 2026 को पाँच विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें हजारों लोगों ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया, जबकि लाखों लोगों ने ऑनलाइन माध्यमों से इस ऐतिहासिक अवसर का आनंद लिया।

अपने 60 वर्षों की शांति यात्रा के इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रेम रावत ने अपने संबोधन में कहा कि मानव जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि बाहरी सफलता नहीं, बल्कि अपने भीतर विद्यमान शांति, आनंद और अपने आप को पहचानना है। उन्होंने कहा कि आज संसार में सुविधाएँ और संसाधन बढ़े हैं, लेकिन मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप और जीवन के उ‌द्देश्य से दूर होता जा रहा है। जब तक मनुष्य स्वयं को नहीं जानता, तब तक उसकी इच्छाएँ, संघर्ष और असंतोष समाप्त नहीं हो सकते। इसलिए जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता स्वयं को समझना और प्रत्येक श्वास के अमूल्य उपहार का सम्मान करना है। धन, पद, प्रतिष्ठा और उपलब्धियाँ समय के साथ समाप्त हो जाती हैं, लेकिन जिसने अपने भीतर की शांति का अनुभव कर लिया, वही वास्तव में सफल और समृद्ध है।

संसार की परिस्थितियाँ सदैव बदलती रहेंगी और चुनौतियाँ आती रहेंगी, लेकिन यदि मनुष्य अपने भीतर की शांति से जुड़ जाए तो कोई भी परिस्थिति उसके जीवन के आनंद को छीन नहीं सकती। “जिस शांति की खोज संसार में की जा रही है, उसका स्रोत प्रत्येक मनुष्य के अपने हृदय में ही है इसलिए हमें भय, अहंकार और दूसरों की राय से ऊपर उठकर कृतज्ञता, प्रेम और आनंद के साथ इस जीवन को सुख और शांति से बिताना चाहिए, और ये सुख और शान्ति हमारे अंदर ही हैं।

प्रेम रावत का जन्म 10 दिसंबर 1957 को कनखल, हरिद्वार में हुआ। मात्र चार वर्ष की आयु से ही उन्होंने अपने पिता हंस जी महाराज के साथ हजारों लोगों की विशाल सभाओं को संबोधित करना प्रारंभ कर दिया था। जब उनकी आयु आठ वर्ष की थी, तब उनके पिता, जो उनके गुरु भी थे, का शरीर पूरा हुआ। उनके निधन से सभी लोग शोकाकुल थे। ऐसे समय में केवल आठ वर्ष की आयु में उन्होंने शांति के इस संदेश को प्रत्येक मनुष्य तक पहुँचाने की जिम्मेदारी ली। इस प्रकार, महज आठ वर्ष की अल्पायु में शुरू हुई उनकी शांति की यात्रा आज 60 वर्षों का गौरवपूर्ण सफर तय कर चुकी है।

इसी उद्देश्य से उन्होंने संसारभर का भ्रमण करने का संकल्प लिया, ताकि देश-विदेश के प्रत्येक व्यक्ति तक यह संदेश पहुँच सके कि “जिस शांति की तुम्हें तलाश है, वह तुम्हारे अंदर है और उसका अनुभव आप अपने जीवन में, जीते-जी कर सकते हैं।” इसी संकल्प के साथ उन्होंने मात्र तेरह वर्ष की आयु में अपनी पहली विदेश यात्रा लंदन से प्रारंभ की और उन्हें देश विदेश से अनेकों आमंत्रण आने लगे। शांति के इस संदेश को जन-जन तक पहुँचाने और अपने समय का सर्वोत्तम उपयोग करने के लिए उन्होंने पायलट का प्रशिक्षण भी प्राप्त किया।

शांति एवं मानवीय कार्यों में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें विश्वभर में अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं। तेरह वर्ष की आयु में विदेश से मिला पहला आमंत्रण उनके 55 से अधिक वर्षों से जारी शांति संदेश की वैश्विक यात्रा की शुरुआत बना। इस दौरान उन्होंने 69 देशों के 457 से अधिक शहरों में लाखों लोगों को संबोधित किया है। उनके मानवीय प्रयासों के अंतर्गत ‘फूड फॉर पीपल’ (जन भोजन कार्यक्रम), प्राकृतिक आपदा राहत, निःशुल्क नेत्र शिविर और वृक्षारोपण जैसे अनेक सेवा कार्यों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों तक सहायता पहुँचाई जा रही है।

उनके निरंतर प्रयासों को विश्वभर में सराहा गया तथा उन्हें अनेक प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए। वर्ष 2012 में उन्हें ब्रांडलॉरिएट लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। वर्ष 2025 में प्रेम रावत जी को डॉ. बी.आर. अंबेडकर ओपन यूनिवर्सिटी, हैदराबाद द्वारा डॉक्टर ऑफ़ लेटर्स की मानद उपाधि प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त, उनके नाम तीन गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स भी दर्ज हैं।

अपनी छह दशकों की इस यात्रा में प्रेम रावत जी ने विश्वभर के अनेक प्रतिष्ठित मंचों को संबोधित किया है। इनमें यूके की संसद, हार्वर्ड विश्वविद्यालय, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय तथा यूरोपियन यूनियन सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय मंच शामिल हैं। भारत में भी उन्होंने आईआईटी दिल्ली, आईआईएम अहमदाबाद सहित अनेक प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में लोगों को संबोधित किया है।

प्रेम रावत द्वारा रचित “पीस एजुकेशन प्रोग्राम” (Peace Education Program) ने विश्वभर में 7,00,000 से अधिक लोगों के जीवन को प्रभावित किया है। यह कार्यक्रम जेलों, शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, पुनर्वास केंद्रों, सामुदायिक संगठनों तथा विभिन्न सामाजिक संस्थाओं में संचालित किया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानने तथा जीवन के प्रति अपनी समझ को विकसित करने के लिए प्रेरित करना है। वर्तमान में यह कार्यक्रम 84 से अधिक देशों और 45 से अधिक भाषाओं में उपलब्ध है।

छह दशकों का यह शांति-सफ़र केवल उपलब्धियों और सम्मानों की कहानी नहीं है, बल्कि मानवता के प्रति समर्पण, आंतरिक शांति और प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं के भीतर शांति का अनुभव कराने के निरंतर प्रयास को प्रेरित करता है। प्रेम रावत जी का संदेश आज भी उतना ही सरल है जितना छह दशक पहले था- “जिस शांति की तुम्हें तलाश है, वह तुम्हारे अंदर है।”

पिछले 60 वर्षों से प्रेम रावत जी द्वारा विश्वभर में शांति के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने की निरंतर यात्रा का यह विशेष अवसर अनेक लोगों के लिए प्रेरणादायक रहा। उनके संदेश को विश्व के अनेक देशों के साथ-साथ भारत के विभिन्न क्षेत्रों से लाखों लोगों ने टाइमलेस टुडे, इंटेलिजेंट एग्जिस्टेंस तथा प्रेम रावत के आधिकारिक यूट्यूब चैनल के माध्यम से देखा और सुना।

इस ऐतिहासिक अवसर पर विश्व के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों एवं स्थानों से उन्हें बधाई और शुभकामना संदेश भी प्राप्त हुए। तीन दिवसीय समारोह में उपस्थित लोगों ने कार्यक्रम के प्रत्येक क्षण का भरपूर आनंद लिया। समारोह का एक विशेष आकर्षण प्रेम रावत जी की नए अंदाज़ में प्रस्तुत संगीतमय प्रस्तुति रही, जिसने पूरे वातावरण को आनंद और उत्साह से भर दिया तथा उपस्थित जनसमूह ने उसका भरपूर आनंद लिया।

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