विमलेश अग्रहरि, मीरजापुर।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के राजीव गांधी दक्षिणी परिसर स्थित पशुचिकित्सा एवं पशुविज्ञान संकाय ने स्वदेशी गोवंशीय नस्लों के संरक्षण एवं आनुवंशिक सुधार के उद्देश्य से संचालित राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत वित्तपोषित सहायक प्रजनन तकनीक परियोजना में सातवीं बार मादा बछिया के जन्म की उपलब्धि हासिल की है।
शुक्रवार, दिनांक 21 अगस्त 2026 को, भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक और सेक्स-सॉर्टेड सीमन के उपयोग से एक गंगातीरी सरोगेट गाय ने 24 किलोग्राम वजन की स्वस्थ साहीवाल बछिया को जन्म दिया। उच्च आनुवंशिक क्षमता वाले साहीवाल स्रोत से जन्मी इस बछिया में प्रतिदिन 14–16 लीटर दूध उत्पादन की क्षमता होने का अनुमान है। यह उपलब्धि उन्नत प्रजनन तकनीकों के माध्यम से उच्च आनुवंशिक क्षमता वाले स्वदेशी गोवंश की संख्या बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इस जन्म के लिए 11 नवंबर 2025 को एक उच्च दुग्ध उत्पादन वाली साहीवाल गाय में सुपर ओव्यूलेशन कराया गया और एक श्रेष्ठ साहीवाल सांड के सेक्स-सॉर्टेड सीमन से कृत्रिम गर्भाधान किया गया। इस प्रक्रिया से छह उच्च गुणवत्तावाले भ्रूण प्राप्त हुए, जिन्हें बाद में सिंक्रोनाइज्ड रिसिपिएंट गायों में प्रत्यारोपित किया गया।
यह परियोजना डॉ. मनीष कुमार, प्रधान अन्वेषक के निर्देशन में संचालित की जा रही है। इसमें डॉ. कौस्तुभ किशोर सराफ और डॉ. अजीत सिंह सह-प्रधान अन्वेषक के रूप में कार्य कर रहे हैं।
इस अवसर पर बीएचयू के वित्त अधिकारी डॉ. मनोज कुमार पांडेय तथा कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. वी. के. मिश्र ने सरोगेट गाय और नवजात बछिया का निरीक्षण किया तथा फार्म की प्रबंधन व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने शोध दल के प्रयासों की सराहना करते हुए परियोजना को और मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित किया।
पशुचिकित्सा एवं पशुविज्ञान संकाय के अधिष्ठाता डॉ. अमित राज गुप्ता तथा राजीव गांधी दक्षिणी परिसर, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रभारी प्रोफेसर डॉ. बी. एम. एन. कुमार ने कहा कि सहायक प्रजनन तकनीक का सफल उपयोग आनुवंशिक सुधार की गति बढ़ाने, दुग्ध उत्पादन एवं पशुधन की गुणवत्ता में वृद्धि करने तथा किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने स्वदेशी गोवंश के संरक्षण एवं आनुवंशिक उन्नयन के लिए टीम के प्रयासों की सराहना की।
पशुचिकित्सा एवं पशुविज्ञान संकाय की टीम अगले चरण में ओवम पिक-अप, इन विट्रो फर्टिलाइजेशन एवं एम्ब्रियो ट्रांसफर जैसी उन्नत तकनीक को अपनाने की दिशा में प्रयासरत है। इस तकनीक को विंध्य क्षेत्र के पशुपालकों तक पहुंचाने की भी योजना है, जिससे गंगातीरी सहित अन्य स्वदेशी गोवंशीय नस्लों का तेजी से आनुवंशिक सुधार किया जा सके और पशुपालकों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद मिले।





