0 विद्या भारती के विद्यालयों मे देशव्यापी सामूहिक वंदे मातरम का गायन
0 भारतीय शिशु मंदिर नारघाट में 345 लोगों ने किया गायन
मीरजापुर। वन्दे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर विद्या भारती की ओर से देश के समस्त शिशु मंदिरों एवं विद्या मंदिरों सहित विद्यालयों में देशव्यापी सामूहिक वंदे मातरम गायन के क्रम में शुक्रवार, 25 सितंबर को प्रातः 11:00 बजे भारतीय शिशु मन्दिर नारघाट में वन्दे मातरम् का सामूहिक गायन हुआ। कार्यक्रम में विद्यालय के बच्चे, अभिभावक आचार्य-आचार्या, कर्मचारी और अन्य सम्मानित जन सहित कुल 345 लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्या भारती के क्षेत्रीय अभियान प्रमुख (संस्कृति बोध परियोजना) राजेंद्र देव के देखरेख एवं प्रधानाचार्य सचिन कुमार सिंह की उपस्दिति में विभाग प्रचारक विंध्याचल विभाग कौशल किशोर, अध्यक्ष नगर पालिका श्याम सुन्दर केशरी, विद्यालय के अध्यक्ष जवाहर सिंह आदि ने भारत माता के चित्र के समक्ष पुष्पार्चन एवं दीप प्रज्वलन कर किया। तत्पश्चात सामूहिक रूप से वंदे मातरम का गायन किया गया।
उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विंध्याचल विभाग प्रचारक कौशल किशोर ने कहाकि देश की आत्मा उसकी संस्कृति मे है, संस्कृति विलुप्त तो देश विलुप्त। इसलिए अपनी सभ्यता और संस्कृति को बचाए रखना हम सबका ध्येय हो। कहाकि “यूनान, मिश्र, रोमा सारे मिट गये जहां से, कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी”, अर्थात यूनान मिस्र और रोम जैसे देश की सभ्यता और संस्कृति को नष्ट कर उनका नाम ही दुनिया से विलुप्त प्राय कर दिया गया लेकिन आज हमारे देश की सभ्यता और संस्कृति को बचाए रखने में सनातन का बहुत बड़ा योगदान है।
‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ दो वाक्यो ने देश में संस्कार, संस्कृति और जीवन मूल्य को बचाए रखा। इसी में राष्ट्रभक्ति और संस्कृति छिपी है। जो नही कहेगा, वह देशद्रोही ही कहलाएगा। अपने मुखारविंद से जब यह समूचे राष्ट्र में गुंजायमान रहेगा, तो यह हमे अपने पुरातन की याद दिलाते हुए देश को अखंड भारत और परं वैभव की ओर ले जाएगा।
विशिष्ट अतिथि नगर पालिका चेयरमैन श्याम सुंदर केशरी ने कहा कि नेशन और राष्ट्र मे अंतर है। राष्ट्र की कोई निश्चित भौगोलिक सीमा या राजनीतिक नक्शा होना अनिवार्य नहीं है। यह लोगों के बीच मानसिक और आध्यात्मिक जुड़ाव पर आधारित है। ऐसे राष्ट्र का भाव अखंड भारत बनने से ही वैचारिक अधिष्ठान पूरा होगा। 370, सीएए, काशी, विंध्य, राम मंदिर, महाकालेश्वर जैसे आस्था के केंद्र को विकसित कर सरकार ने सनातन को बल दिया है। अब 2047 तक विकसित भारत बनाने के लिए सांस्कृतिक जागरण करने की आवश्यकता है।
बताया कि ‘सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धार्मिक कारणों से कोई व्यक्ति गीत नहीं गाता है, तो उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं की जा सकती’, इस पर सुप्रीम कोर्ट को फिर से विचार करना चाहिए। चेयरमैन ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि वंदे मातरम का गायन देशवासियों के लिए अनिवार्य किया जाना आवश्यक है। वंदे मातरम किसी धर्म अथवा संप्रदाय से संबंधित नहीं, बल्कि भारत माता का गायन है और इसका गायन अनिवार्य होना ही चाहिए और सर्व समाज को इसका गायन करना भी चाहिए।
विद्या भारती के क्षेत्रीय अभियान प्रमुख (संस्कृति बोध परियोजना) राजेंद्र देव ने कहा कि वंदे मारत राष्ट्र की जय चेतना और राष्ट्रपति की प्रेरणा का गान है। इस अवसर पर विद्यालय के समस्त शिक्षक शिक्षिकाएं एवं कर्मचारी गण मौजूद रहे। संचालन एवं आभार ज्ञापन प्रधानाचार्य सचिन कुमार सिंह ने किया।





