मीरजापुर। मीरजापुर की माटी, लोकजीवन और सावन की स्मृतियों को अपने सुरों में संजोए कजली महोत्सव में रविवार को लोकसंस्कृति का अद्भुत रंग देखने को मिला। लायंस स्कूल सभागार में संस्कार भारती एवं लायंस क्लब, मीरजापुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित महोत्सव में देर रात तक कजली की स्वर-लहरियां गूंजती रहीं। लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान, संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश के सहयोग से आयोजित इस समारोह में कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
महोत्सव का विशेष आकर्षण एक ही रंग के हरित परिधान में लगभग 100 महिलाओं द्वारा सामूहिक रूप से प्रस्तुत ढुनमुनिया कजरी रही। एक साथ उठे सौ कंठों के सुरों ने सभागार में ऐसा वातावरण रचा, मानो सावन की फुहारें गीत बनकर बरस रही हों। पारंपरिक वेशभूषा और सामूहिक गायन ने मीरजापुर की लोकसंस्कृति की मनोहारी छटा प्रस्तुत की।
इसके बाद कजली गायकों की लंबी श्रृंखला ने देर रात तक अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधे रखा। बिनानी डिग्री कॉलेज की प्राचार्य बिना सिंह, शिवलाल गुप्ता, सुरेश मौर्य, कीर्ति सिंह, रागिनी चंद्रा, तेजल शर्मा, कीर्तन ज्योत कौर, दीपक सोनी सहित अनेक कलाकारों ने अपनी-अपनी कजली प्रस्तुत कर लोकधुनों की विविधता से श्रोताओं को सराबोर किया।
लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान, संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश की ओर से मेहमान कलाकार के रूप में उपस्थित अमरनाथ शुक्ला ने अपनी विशिष्ट गायन शैली में “हमरे मिर्जापुर में अलमस्ती के चाल बा ना” मिर्जापुरी कजरी प्रस्तुत की। उनकी प्रस्तुति ने श्रोताओं में विशेष उत्साह भर दिया और पूरा सभागार तालियों की गडगडाहट से गूंज उठा।





