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बूथ स्तर तक अनुशासन-व्यवस्था, कार्यकर्ताओं में परिवार भाव, संगठनात्मक संस्कृति दीनदयाल की देन: भानु प्रताप सिंह

मीरजापुर। भाजपा जिला कार्यालय सभागार में जिलाध्यक्ष लालबहादुर सरोज की अध्यक्षता में “सेवा संकल्प” के अंतर्गत पं. दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती के शुभ अवसर पर संगोष्ठी एवं कार्यकर्ता संवाद सम्पन्न हुई। शुभारम्भ पं0 दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर किया गया भाजपा जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में मुख्य अतिथि/जिला प्रभारी/क्षेत्रीय उपाध्यक्ष काशी क्षेत्र भानु प्रताप सिंह के मीरजापुर प्रथम आगमन पर जोरदार स्वागत किया गया।

कार्यक्रम के पूर्व पं0 दीनदयाल उपाध्याय चौराहा मुकेरी बाजार स्थित पं0 दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा की साफ–सफाई कर माल्यार्पण कर कार्यकर्ताओं ने मिष्ठान वितरण किया। तत्पश्चात् भाजपा जिलाध्यक्ष कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आये हुए मुख्य अतिथि एवं मंचासीनगणों व सामने बैठे हुए सभी प्रबुद्धगण, भाजपा पदाधिकारीगण एवं कार्यकर्तागणों का स्वागत अभिनंदन किया और कहाकि पं. दीनदयाल के दर्शन का सबसे अनमोल रत्न है— अंत्योदय।

वो कहा करते थे “नीतियाँ केवल धनी और शक्तिशाली के लिए नहीं होनी चाहिए, बल्कि सबसे गरीब, सबसे निर्बल और सबसे उपेक्षित के उत्थान के लिए होनी चाहिए” आज हम गर्व से कह सकते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत ने इस अंत्योदय के सिद्धांत को व्यवहारिक रूप में बदल दिया है।

मुख्य अतिथि भानु प्रताप सिंह ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए बताया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने भारत को केवल एक दृष्टि ही नहीं दी, बल्कि एक मार्ग भी दिया – वह मार्ग है ‘एकात्म मानववाद’ का। यह दर्शन केवल एक सिद्धांत नहीं है, यह हमारी सनातन भारतीय संस्कृति की आत्मा है, जो जीवन के हर आयाम में संतुलन और समरसता का संदेश देता है।

उन्होंने कहा कि पं. दीनदयाल जी का जीवन बहुत कठिनाइयों से भरा रहा। उनके माता-पिता का निधन बाल्यावस्था में ही हो गया था। बाद में इनके भाई का भी स्वर्गवास हो गया। ऐसा दुख किसी को भी तोड़ देता है, परंतु दीनदयाल जी ने उस पीड़ा को राष्ट्र के लिए आजीवन तपस्या में बदल दिया। वे विलक्षण छात्र थे, पर उन्होंने सत्ता, धन या भौतिक सुख का मार्ग नहीं चुना।

उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक बनकर स्वयं को पूर्णतः राष्ट्र सेवा को समर्पित कर दिया। उनका जीवन सादगीपूर्ण, तपस्वी जैसा था, हर क्षण मातृभूमि के लिए समर्पित था। 1940 के दशक और उसके बाद पं. दीनदयाल जी ने राष्ट्रधर्म, पांचजन्य, देश जैसी पत्रिकाओं की स्थापना और संपादन किया और ऑर्गेनाइज़र के लिए लेखन किया। ये केवल पत्रिकाएँ नहीं थीं – ये वो विचारों के विद्यालय थे, जहाँ राजनीति ने समाज की सेवा करना सीखा, उस पर हावी होने नहीं दिया।

राष्ट्र वाद की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचने के लिए, उन्होंने 1951 में श्री श्यामा प्रसाद मुख़र्जी के साथ भारतीय जनसंघ की स्थापना की। भारतीय जनसंघ के महामंत्री बनने के बाद पंडित जी ने संगठन को संस्कारों और सिद्धांतों पर खड़ा किया। बूथ स्तर तक की अनुशासन-व्यवस्था, कार्यकर्ताओं में परिवार की भावना, संगठनात्मक संस्कृति – ये दीनदयाल जी की ही देन हैं।

पंडित जी केवल 52 वर्ष का जीवन जिए, परंतु उनकी धरोहर आज भी हमें दिशा देती है । यही तपस्या और संघ जीवन की साधना आगे चलकर अनेक कार्यकर्ताओं के लिए आदर्श बनी। आज भी हम देखते हैं कि कैसे उसी पथ पर चलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी निरंतर राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन जिला महामंत्री डॉ0 सी0एल0 बिन्द ने किया।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से विधायक मड़िहान रमाशंकर सिंह पटेल, विधायक नगर पं0 रत्नाकर मिश्र, विधायक चुनार अनुराग सिंह, विधायक मझवां शुचिस्मिता मौर्या, चेयरमैन नपाप श्याम सुन्दर केसरी, अध्यक्ष जिला सहकारी बैंक डा. जगदीश सिंह पटेल, पूर्व जिलाध्यक्ष मनोज जायसवाल, उत्तर कुमार मौर्य, दिनेश तिवारी, अनिल सिंह, बालेन्दुमणि त्रिपाठी के साथ समस्त जिला पदाधिकारीगण एवं मण्डल अध्यक्षगण, मण्डल प्रभारीगण, मोर्चा जिलाध्यक्ष एवं महामंत्री के साथ अन्य कार्यकर्तागण उपस्थित रहे। यह जानकारी जिला मीडिया प्रभारी पं0 भावेश शर्मा ने दिया।

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