मीरजापुर।
ग्लोबल संस्कृत फोरम (विंध्याचल मंडल, उत्तर प्रदेश प्रांत) एवं कन्हैयालाल बसन्तलाल (के.बी.) स्नातकोत्तर महाविद्यालय मीरजापुर के संयुक्त तत्त्वावधान में शनिवार को महाविद्यालय के स्मार्ट क्लास कक्ष में संस्कृत दिवस के उपलक्ष्य में ‘डिजिटल युग में संस्कृत की प्रासंगिकता’ विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के संरक्षक एवं ग्लोबल संस्कृत फोरम विंध्याचल मंडल, उत्तर प्रदेश प्रांत के संरक्षक व प्राच्य भाषा संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रोफेसर शिशिर चंद्र उपाध्याय ने कहाकि आधुनिक संस्कृत संगीत में यूट्यूब और सोशल मीडिया के माध्यम से संस्कृत रॉक, संस्कृत रैप और सुगम संगीत को नए आयाम दिए जा रहे हैं।
विशिष्ट अतिथि के रूप में के.एम. पीजी कॉलेज मीरजापुर की प्राचार्या डॉ. रितु सिंह ने कहा कि पाणिनि व्याकरण से लेकर आधुनिक संस्कृत तक संगीत का सफ़र ध्वन्यात्मक शुद्धता, शास्त्रीय नियमों और आधुनिक प्रयोगों का एक अद्भुत संयोजन है।
मुख्य वक्ता यूइंग क्रिश्चियन महाविद्यालय प्रयागराज के संस्कृत विभागाध्यक्ष एवं ग्लोबल संस्कृत फोरम (प्रयागराज मंडल) के संयोजक डॉ. आरुणेय मिश्र ने कहा कि संस्कृत का व्याकरण, विशेषकर पाणिनि की अष्टाध्यायी, पूरी तरह से तर्क और गणितीय नियमों पर आधारित है। यह एल्गोरिदम की तरह काम करता है, जो कंप्यूटर कोडिंग के बेहद करीब है।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संघटक कॉलेज सी.एम.पी. स्नातकोत्तर महाविद्यालय के संस्कृत विभाग के प्रोफेसर एवं ग्लोबल संस्कृत फोरम (प्रयागराज मंडल) के समन्वयक डॉ. सत्यप्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि विभिन्न भाषाओं के आपसी अनुवाद के लिए संस्कृत एक बेहतरीन ‘मध्यस्थ भाषा’ का काम कर सकती है। इसके स्पष्ट व्याकरण नियमों के कारण अनुवाद के दौरान अर्थ का अनर्थ होने की संभावना न्यूनतम होती है।
संगोष्ठी संचालक/संयोजक डॉ. किरन प्रकाश ने कहाकि डिजिटल दौर में संस्कृत भाषा केवल कर्मकांड या इतिहास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए एक अत्यंत प्रासंगिक भाषा बनकर उभरी है। इस दौरान प्राच्य भाषा संस्कृत को लेकर कल शुक्रवार को आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता में भाग लेने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित भी किया गया।
अतिथियों को धन्यवाद ज्ञापन संगोष्ठी के समन्वयक डॉ. अशोक कुमार पांडेय ने किया। इस मौके पर प्रो. अशोक कुमार सिंह चंदेल, प्रो. इंदुभूषण द्विवेदी, प्रो. मकरंद जायसवाल, प्रो. प्रभात सिंह, डॉ. रत्नेश कुमार, डॉ. सत्यकेतु शुक्ल, डॉ. स्नेह लता पटेल, डॉ. नेहा पटेल, डॉ. प्रीतम कुमार सिंह, डॉ. राजमणि सरोज, डॉ. राम लखन पांडेय सहित अनेक प्राध्यापकगण और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।





