मीरजापुर। अपर जिलाधिकारी वि0/रा0 विनोद कुमार सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि धान क्रय केन्द्रों पर कृषकों के धान खरीद सुविधा के दृष्टिगत भारत सरकार की एग्रीस्टैक योजना के अन्तर्गत प्रदेश में बनायी गयी किसानों की फॉर्मर आईडी (किसान पहचान पत्र) के आधार पर धान क्रय किया जायेगा जिसके लिये विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होगी। फॉर्मर आईडी से प्राप्त किसान के बोये गये धान के रकबे एवं कृषि विभाग द्वारा उपलब्ध कराये गये जनपदवार धान की उत्पादकता के आंकड़ों के आधार पर अधिकतम विक्रय सीमा तक ई-पॉप डिवाइस पर फॉर्मर आईडी दर्ज कर क्रय केन्द्र प्रभारी द्वारा धान क्रय किया जायेगा। उन्होंने बताया कि शासनादेश के अनुसार यदि किसी कृषक के पास फॉर्मर आईडी उपलब्ध नहीं है तो किसानों को फॉर्मर आईडी बनवाने हेतु सभी सम्बन्धित अधिकारियों द्वारा प्रोत्साहित किया जायेगा। कृ
षक के पास फॉर्मर आईडी उपलब्ध नहीं होने पर अपरिहार्य स्थिति में कृषकों को खाद्य विभाग की वेबसाइट fcs.up.gov.in पर खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 की फसलों के लिए एक ही ऑनलाइन पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा, परन्तु प्रतिबन्ध यह रहेगा कि ऑनलाइन भू-लेख उपलब्ध होने पर किसान के आधार में अंकित नाम तथा खतौनी में दर्ज नाम में 70 प्रतिशत या उससे अधिक नाम मैच हो। 70 प्रतिशत से कम नाम मैच वाले गाटा को पंजीकरण में दर्ज करवाने हेतु किसान को अपने क्षेत्र के उपजिलाधिकारी को लिखित/पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन अपील करनी होगी। उपजिलाधिकारी द्वारा पोर्टल पर ऑनलाइन अनुमति, अपनी डीएससी से लॉक करनी होगी।
ऐसे गाटों में अंकित नाम का पुनः सत्यापन नहीं किया जायेगा। पंजीकरण कृषक द्वारा क्यूआर कोड के माध्यम से किसान मित्र एप डाउनलोड कर स्वयं अथवा जनसूचना केन्द्र/साइबर कैफे के माध्यम से कराया जा सकेगा। क्रय केन्द्रों पर क्रय केन्द्र प्रभारी द्वारा निःशुल्क पंजीकरण किया जायेगा। कृषकों का पंजीकरण उनके आधार संख्या, भूलेख एवं पंजीकरण के समय कृषक द्वारा दर्ज मोबाइल नम्बर पर प्रेषित ओटीपी के आधार पर किया जायेगा।
धान बिक्री के समय क्रय केन्द्रों पर किसान के स्वयं उपस्थित न होने की दशा में किसान द्वारा पंजीकरण के समय पोर्टल पर ही पंजीकरण प्रपत्र में परिवार के नामित सदस्य (मात/पिता, पति/पत्नी, पुत्र/पुत्री, दामाद/पुत्रवधू, सगा भाई/सगी बहन में से) का विवरण एवं उनका आधार नम्बर फीड कराना अनिवार्य होगा। धान खरीद वर्ष 2026-27 के अन्तर्गत पंजीकृत ट्रस्ट का भी धान क्रय किया जा सकेगा। इस श्रेणी के अन्तर्गत धान विक्रय हेतु ट्रस्ट के भूलेख/सत्यापित खतौनी व ट्रस्ट के संचालक/अधिकृत प्रतिनिधि के आधार कार्ड तथा पंजीकरण के समय दर्ज मोबाइल नम्बर पर ओटीपी प्रेषित कराते हुये पंजीकरण की प्रक्रिया पूर्ण की जायेगी।
पंजीकरण प्रपत्र में दर्ज भूमि एवं धान के बोये गये रकबे का नियमानुसार शत-प्रतिशत ऑनलाइन सत्यापन किया जायेगा। क्रय केन्द्र पर ट्रस्ट के संचालक/अधिकृत प्रतिनिधि का बायोमेट्रिक सत्यापन कराते हुये धान क्रय किया जायेगा तथा भुगतान ट्रस्ट के बैंक खाते में पीपीए मोड के माध्यम से कराया जायेगा।
भूमि के जितने रकबे के सापेक्ष बटाईदार द्वारा पंजीकरण कराया गया है, के शेष रकबे पर मूल कृषक द्वारा पंजीकरण कर अपना धान विक्रय किया जा सकेगा। किसी भी दशा में मूल स्वामी के जमीन के कुल रकबे के सापेक्ष अधिकतम बिक्री योग्य धान की सीमा (भू-स्वामी तथा बटाईदार की उपज का योग) से अधिक धान की खरीद नहीं की जायेगी।
पपप. बटाईदार के द्वारा विक्रय किये गये धान के मूल्य का भुगतान पीएफएमएस के माध्यम से बटाईदार के बैंक खाते में किया जायेगा। बटाईदार से अधिकतम 100 कुन्तल धान क्रय किया जायेगा। फार्मर आईडी न होने पर विभाग के पोर्टल पर कराये गये पंजीकरण में दर्ज विवरण का सत्यापन यथा- कृषक पंजीकरण में राजस्व विभाग के भूलेख पोर्टल तथा भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा विकसित एग्रीस्टैक पोर्टल पर उपलब्ध वर्तमान तथा गत वर्षों के आंकड़े (डाटा) एवं ई-पड़ताल डाटा के आधार पर Verification score दिया जायेगा।
खाद्यायुक्त द्वारा एक न्यूनतम अंक तय किया जायेगा जिसके ऊपर अंक प्राप्त करने वाले किसानों को स्वयं सत्यापित मान लिया जायेगा। जिन किसानों का उपरोक्त तरीके से स्वयं सत्यापन न होने की स्थिति में किसानों के पंजीकरण प्रपत्र में दर्ज विवरण का इस प्रकार सत्यापन किया जायेगा जैसे- धान खरीद वर्ष 2026-27 के समस्त किसानों के पंजीकरण प्रपत्र को सीधे लेखपाल की लॉगिन पर भेजा जायेगा और इस पंजीकरण प्रपत्र में दर्ज विवरण का सत्यापन/संशोधन कर विवरण को उनकी अधिकार सीमा में लेखपाल/तहसीलदार/उप जिलाधिकारी/अपर जिलाधिकारी द्वारा लॉक किया जा सकेगा। लेखपालों द्वारा सत्यापन हेतु डीएससी की अनिवार्यता नहीं होगी, जबकि अन्य अधिकारियों द्वारा डीएससी का उपयोग किया जायेगा।
भूमि के रकबे की सीमा तक सत्यापन की अधिकारिता क्षेत्र निम्नवत होगा-लेखपाल-सीमान्त कृषकों की भूमि का तहसीलदार-लघु कृषक एवं अन्य कृषकों के तीन हेक्टेयर तक उप जिलाधिकारी-तीन हेक्टेयर से ऊपर तथा पांच हेक्टेयर तक अपर जिलाधिकारी-पांच हेक्टेयर से ऊपर उक्त अधिकारियों द्वारा इस प्रकार प्राप्त पंजीकरण प्रपत्रों में दर्ज विवरण यथा- आधार व खतौनी में दर्ज नाम की समानता, कुल रकबा, अंश निर्धारण, बोई गयी फसल का रकबे का परीक्षण व सत्यापन करते हुए लॉक किया जायेगा। चकबंदी के अन्तर्गत ग्रामों के किसानों के पंजीकरण प्रपत्र में दर्ज उपरोक्तानुसार विवरण का शत-प्रतिशत सत्यापन चकबंदी संबंधी संगत अभिलेख के आधार पर सर्वप्रथम चकबंदी विभाग के लेखपालों द्वारा तत्पश्चात तहसील स्तरीय चकबन्दी अधिकारी (सीओ) द्वारा अपनी लॉगिन में ओटीपी के माध्यम से लॉक कर किया जायेगा।
ई-उपार्जन पोर्टल पर इसकी व्यवस्था एनआईसी के सहयोग से उपलब्ध करायी जायेगी। सर्वे प्रक्रिया के अन्तर्गत गांवों में किये गये पंजीकरण का सत्यापन उप जिलाधिकारी द्वारा अपनी डीएससी से किया जायेगा।




