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नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध कर विपक्ष ने अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारी है: नन्दी

0 इस विरोध ने विपक्ष के महिला विरोधी और रूढ़िवादी एजेण्डे को बेनकाब किया: नन्दी

0 मातृशक्ति अपने जनादेश से इन अवसरवादियों को देंगी माकूल जवाब

0 प्रभारी मंत्री ने पत्रकार वार्ता कर अपने विचार साझा किए
मीरजापुर।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संसद में प्रस्तुत ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के खिलाफ विपक्ष की निंदनीय एवं निराशाजनक भूमिका पर उत्तर प्रदेश सरकार के औद्योगिक विकास मंत्री एवं जनपद मिर्जापुर के प्रभारी मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी ने पत्रकार वार्ता कर अपने विचार व्यक्त किए।

पत्रकारों से बातचीत करते हुए मंत्री नन्दी ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम देश की आधी आबादी को न्याय और भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम था। लेकिन विपक्ष जो मुद्दाविहीन, बुद्धिविहीन और दृष्टिविहीन है उसने इस विधेयक का विरोध करके अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारी है। इस विरोध ने विपक्ष के महिलाविरोधी और रूढ़िवादी एजेण्डे को बेनकाब कर दिया है।

विपक्ष का महिलाविरोधी, संविधानविरोधी और देशविरोधी चरित्र उजागर हो चुका है। आने वाले चुनावों में मातृशक्ति अपने जनादेश से इन अवसरवादियों को माकूल जवाब देंगी। मंत्री नन्दी ने कहा कि इस विरोध ने विपक्ष के महिलाविरोधी और रूढ़िवादी एजेण्डे को बेनकाब कर दिया है। ये लोग मातृशक्ति को घर की चौखट तक सीमित रखना चाहते हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें विधानसभाओं और संसद की चौखट तक पहुँचाना चाहते हैं।

कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत पूरे विपक्ष ने परिसीमन की बेबुनियाद अफवाह के माध्यम से हमेशा की तरह तुष्टिकरण को ही बढ़ावा दिया है। यही कारण है कि इस ऐतिहासिक अवसर पर जब उन्हें नायकों के समूह में खड़ा होना था, उन्होंने खलनायक की भूमिका ही चुनी। संसद में केवल यह विधेयक नहीं गिरा है बल्कि सम्पूर्ण विपक्ष आधी आबादी की नजरों से गिर गया है।

मंत्री नन्दी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2014 में इस देश की बागडोर सँभालने के साथ ही महिला सशक्तिकरण को विशेष प्राथमिकता दी है। आवास योजना का पंजीकरण महिलाओं के नाम पर होता है। उज्ज्वला योजना और इज्जत घर ने महिलाओं के स्वास्थ्य और आत्मसम्मान को सुनिश्चित किया है। ड्रोन दीदी और स्वयं सहायता समूहों ने महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है।

अब राजनैतिक भागीदारी को मजबूत करने की बारी आयी थी। लोकसभा-विधानसभाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाना वास्तविक अर्थ में उनकी क्षमता और सामर्थ्य का सम्मान है। लेकिन विपक्ष के कुत्सित षड्यंत्र ने इस अभूतपूर्व पहल पर पानी फेर दिया। उन्होंने इस अधिनियम में बाधा डालकर प्रतिनिधित्व और भागीदारी के संवैधानिक अधिकार का गला घोंटा है। विपक्ष का महिलाविरोधी, संविधानविरोधी और देशविरोधी चरित्र उजागर हो चुका है।

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