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जगह-जगह हवन पूजन, पहाड़ पर पहुंचने पर विधि-विधान से मंदिर में हुई मां की स्थापना

0 डोली पर सवार होकर मायके से मुख्य मंदिर पहुंचीं मां भंडारी

फोटोसहित
अहरौरा, मीरजापुर। मां भंडारी देवी डोली पर सवार होकर अपने मायके राजा कर्णपाल सह के पहाड़ से अपने मुख्य मंदिर के लिए चल पड़ीं। डोली पर सवार मां का जगह-जगह हवन के साथ पूजन किया गया। इसके साथ मां भंडारी देवी पहाड़ पर पहुंचीं, जहां मां को विधि-विधान के साथ मंदिर में स्थापित किया गया। मंगलवार को मां का डोला लाने के लिये सुबह से ही अहरौरा डीह स्थित शायर देवी मंदिर पर श्रद्धालु जुटने लगे। यहां से विधिवत हवन-पूजन कर लोग सीयुर गांव के दक्षिण तरफ स्थित राजा कृपाल बाबा के पहाड़ी पर गये। वहां कहार प्रेमचंद, बबलू राम सेवक एवं चंदन द्वारा डोली तैयार की गयी।

 इसके बाद दर्शनार्थी सुक्खू बाबा विश्वकर्मा द्वारा लगभग चार घंटे तक पूजन, अर्चन करने के बाद मां को तैयार किया गया और डोली में बिठाया गया। फिर कहारों के साथ पुजारी जयप्रकाश पांडेय, अजय पाण्डेय, आशु पाण्डेय एवं विनय गुप्ता, शिशिर पाण्डेय, विष्णुपति चौबे के साथ हजारों की संख्या में भक्त मां का जयकारा लगाते हुए डोला लेकर चल पड़े।

 जगह-जगह रास्ते में प्रसाद व भंडारे का आयोजन था। मां का डोला जब राजा कर्ण पाल के पहाड़ से चल कर नीचे आया तो सीयुर गांव के दक्षिण एवं पहाड़ के नीचे खेत में डोला रखा गया और वहां महिलाओं ने धार देकर पूजा-अर्चना किया। फिर वहां से डोला कहार लेकर आगे बढ़ गए।

यहां से डोला चलकर भगवानपुर गांव में नीम के पेड़ के पास जाकर रुक गया और यहां भी हवन-पूजन किया गया। यहां से डोला उठाकर कहार जुड़ई बगीचे के पास आए और यहां भी पूजन-अर्चन किया गया। फिर कई जगह पूजन अर्चन के बाद मां का डोला देर शाम शायर देवी मंदिर पर अहरौरा डीह पहुंचा। यहां देर रात तक हवन पूजन के बाद फिर कहार डोला लेकर चल दिए और मां के मंदिर पहुंचे।

मां के सवार होते ही वजनी हो जाता है डोला
अहरौरा डीह निवासी शिशिर पांडेय ने बताया कि राजा बाबा के पहाड़ पर जब दर्शनिया पूजन अर्चन के बाद मनवना कर डोली में बिठाते हैं, तो डोली का वजन अपने आप बढ़ जाता है। भंडारी देवी का डोला प्रत्येक तीसरे वर्ष राजा कर्णपाल के पहाड़ से आता है। मां अपने मंदिर से कब वापस जाती हैं यह कोई नहीं जानता लेकिन उनको पुनः मंदिर में लाने के लिये तीसरे वर्ष भक्त गाज-बाजे के साथ जाते हैं और लाखों श्रद्धालु इसके साक्षी बनते हैं। इसी बीच रास्ते में श्रद्धालु नाचते गाते चलते हैं।

चाक चौबंद की सुरक्षा व्यवस्था
क्षेत्र के डीह पर स्थित शायर माता मंदिर पर सुबह से ही थानाध्यक्ष अजय मिश्रा मय पुलिस पीएसी फोर्स के साथ डोला के साथ-साथ चलते रहे। वही सीयूर से दोपहर दो बजे मां के डोला के साथ पुलिस फोर्स भण्डारी देवी के लिए रवाना ही गए। इस सुरक्षा व्यवस्था में अहरौरा थाना सहित आस पास के कई थानों के थाना प्रभारी मौजूद रहे।

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