विमलेश अग्रहरि, मीरजापुर/हमीरपुर।
एक सितंबर को आये सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यूपी के सरकारी टीचर अलग ही दबाव में चल रहे हैं। स्कूल मे बच्चो को पढाएं या खुद पढे। ऐसे में कुछ टीचर हताश होकर अपनी जान तक दे दे रहे हैं। स्थिति वह बन गयी है, जो 25 जुलाई 2017 को सुप्रीम फैसले के बाद समायोजन निरस्त होने पर यूपी के शिक्षामित्रो की थी। बहरहाल शिक्षक संगठनो द्वारा टीईटी की अनिवार्यता को समाप्त कराने आरटीई एक्ट मे संशोधन की लगातार अपील की जा रही है। सुप्रीम फैसले से आई दिक्कत दूर करने के लिए अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने राष्ट्रव्यापी ज्ञापन का कार्यक्रम 15 सितम्बर को पूरे देश मे एक साथ रखा है। सभी शिक्षको को हताशा निराशा छोड उम्मीद की किरण पर फोकस कर संगठन के इस कार्य को जोरदार बनाना चाहिए।
बता दे कि पहले महोबा में एक प्रधानाध्यापक ने खुदकुशी कर ली। अब हमीरपुर जिले के राठ कोतवाली क्षेत्र में टीईटी अनिवार्यता के दबाव में आकर एक शिक्षक ने आत्महत्या कर ली है।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश में कहा गया है कि जिन शिक्षकों की नौकरी में पांच साल से अधिक सेवा शेष है, उन्हें अनिवार्य रूप से शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करनी होगी। आदेश के बाद से प्रदेश भर के लाखों शिक्षक मानसिक दबाव में हैं। राठ ब्लॉक के गोहानी पनवाड़ी स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में तैनात 52 वर्षीय शिक्षक गनेशीलाल अनुरागी अतरौलिया मोहल्ला के रहने वाले थे। उनके पास सैना रोड पर भी एक मकान था, जहां परिवार रहता था। शनिवार शाम उनके बेटे पीयूष ने पिता की तलाश करते हुए अतरौलिया मोहल्ले स्थित खाली पड़े मकान में प्रवेश किया, तो अंदर का दृश्य देख दंग रह गया। गनेशीलाल का शव फांसी के फंदे पर लटका हुआ था। बेटे ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।
मानसिक दबाव में थे शिक्षक गनेशीलाल अनुरागी
परिजनों के अनुसार, गनेशीलाल तीन दिन पहले गया जाकर दादा-दादी का पिंडदान करने गए थे। शुक्रवार को लौटने के बाद भी वे घर नहीं पहुंचे। इसके बाद से ही परिवार बेचैनी में था। बेटे ने बताया कि पिता हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लेकर गहरे तनाव में थे। इसी दबाव में उन्होंने यह कदम उठा लिया। घटना की सूचना मिलते ही राठ कोतवाली प्रभारी रामआसरे सरोज पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया। फील्ड यूनिट की टीमें भी जांच में जुट गई हैं। कोतवाली प्रभारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। परिजनों के बयान और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ 15 सितंबर को कर रहा राष्ट्रव्यापी ज्ञापन कार्यक्रम
2010 के पहले नियुक्त शिक्षको के इस समस्या से निजात दिलाई के लिए और टीईटी से मुक्त कराने के लिए अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम कर प्रधानमंत्री से 15 अक्टूबर को आरटीई एक्ट मे संशोधन की अपील करेगा। इस क्रम मे उत्तर प्रदेश मे भी शैक्षिक महासंघ के पदाधिकारीगण जनपदो मे पीएम को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौपेंगे। महासंघ के प्राथमिक संवर्ग के मंडल अध्यक्ष अखिलेश मिश्र वत्स ने बताया कि मंडल के तीनो जनपदो मीरजापुर सोनभद्र भदोही मे जोरदार एवं विशाल संख्या मे प्रदर्शन कर ज्ञापन सौपने की तैयारी है। शिक्षको से अपील किया है कि शीघ्र ही समस्या का समाधान निकलेगा। शिक्षक भाई कोई गलत कदम न उठाएं।
25 जुलाई 2017 को सुप्रीम फैसले के बाद शिक्षामित्र भी पहुचे थे सदमे मे
आपको बता दे कि 25 जुलाई 2017 को जब सुप्रीम कोर्ट ने समायोजन को अवैध बताकर समायोजन निरस्त किया और समायोजित शिक्षक फिर से शिक्षामित्र पद पर वापस हो गये। अचानक उनकी आमदनी चौथाई हो गयी। तमाम समायोजित शिक्षामित्र अपने परिवार का भरण पोषण करने मे अक्षम पाने लगे तो परिस्थितिजन्य आत्महत्या भी कर लिए। तमाम लोग अवसाद मे चले गये। आज भी शिक्षामित्रो को कोई राहत नही मिल सकी। हालाकि सरकार आश्वासन दे रही है कि मानदेय वृद्धि होगी, लेकिन कब इसका पता नही। हालाकि हाल ही मे सीएम योगी द्वारा शिक्षामित्रो को कैशलेस चिकित्सा लाभ की घोषणा एवं उस पर कार्रवाई शुरू हो जाने से उनके अंदर भी आस जगी है कि शीघ्र ही सरकार कुछ स्थाई समाधान निकालेगी, जिससे उनका और परिवार का अच्छे से भरण पोषण चल सके।



