चुनार, मीरजापुर।
श्री राघवेंद्र रामलीला कमेटी के तत्वावधान में चल रहे इक्कीस दिवसीय रामलीला मंचन में रविवार की रात धनुष यज्ञ, परशुराम लक्ष्मण संवाद लीला का मंचन हुआ। जनक नगरी के रूप में फूल माला और रंग बिरगें झालरों से मंच की हुई सजावट लीला प्रेमियों को आकर्षित कर रहा था। लीला में शिवजी के धनुष का खंडन करने देश देश के राजा आएं थे, जो धनुष को तनिक हीला भी न सके। विश्वामित्र श्रीराम को धनुष खंडन करने के लिए उठने का इशारा करते हैं। गुरू से अनुमति लेकर जैसे ही श्रीराम धनुष को उठाते हैं और प्रत्यंचा चढाते ही धनुष खंड खंड हो जाता है। धनुष का खंडन होते ही प्रभु श्रीराम चन्द्र की जय, सियावर राम चन्द्र की जय के जयघोष से समूचा परिसर गुंजायमान हो उठता है। लीला के दौरान रावण और बाणासुर का संवाद व परशुराम लक्ष्मण का संवाद बड़ा ही रोचक रहा। लीला में समर्थ वैद्य (राम) वाचस्पति (भरत), अश्विनि दूबे (लक्ष्मण), लक्ष्य पुजारी (शत्रुध्न), वैकटेश्वर पांडेय (विश्वामित्र) यश मिश्रा (सीता), शशिकांत पांडेय (जनक), गोविंद जायसवाल (रावण), राम आसरे दास (बाणासुर), चन्द्रहास गुप्ता (पेटफुलनवा राजा) व कमेटी अध्यक्ष लक्ष्मीकांत पांडेय ने (परशुराम) का बहुत ही सुंदर अभिनय किया। लीला देखने के लिए शाम से ही आसपास के गांव व स्थानीय लीला प्रेमियों की भीड उमड़ी रही। लीला को सकुशल संपन्न कराने में कमेटी संरक्षक बचाऊ लाल सेठ, रमाशंकर पांडेय, अखिलेश मिश्रा, फूलचंद, संजय साहू, पवन जायसवाल, अमित कुमार गुप्ता, अजय शेखर पांडेय, करतार सिंह, पवन कुमार, आदि लोग सहयोग एवं श्रद्धाभाव से लगे रहे।



