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राष्ट्र सेविका समिति की 90 वर्षों की स्वर्णिम यात्रा पूरी होने पर मातृशक्तियो ने किया पथ संचलन
0 गणवेश में चल मातृशक्तियों मे दिखा एक अद्वितीय शक्ति और राष्ट्रभक्ति भाव
मीरजापुर।
विजयदशमी का पर्व पुरुषार्थ, पराक्रम और शक्ति- जागरण का प्रतीक है। इसी शुभ दिन, वर्ष 1936 में वंo लक्ष्मी बाई केलकर उपाक्य मौसी जी ने राष्ट्र सेविका समिति की अखंड साधना का शुभारंभ किया।
वर्ष 2025 में हमारी यह साधना 90 वर्षों की स्वर्णिम यात्रा पूरी कर रही है। यह केवल समिति की यात्रा नहीं, बल्कि मातृशक्ति हिंदू समाज के आत्मविश्वास और विश्व कल्याण के संकल्प की यात्रा है।
आज जब हम चारों ओर नारी के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण की बात करते हैं, तब हमें यह स्मरण करना चाहिए कि नारी कभी अबला नहीं रही — वह सदा से शक्ति रही है। उसी शक्ति को जागृत करने का संकल्प लेकर, वंदनीया मौसी जी लक्ष्मीबाई केलकर जी ने वर्ष 1936 में राष्ट्र सेविका समिति की स्थापना की थी।
यह यात्रा केवल वर्षों की नहीं, बल्कि त्याग, तपस्या, सेवा और समर्पण की है। यह नारी चेतना के जागरण और राष्ट्र के पुनर्निर्माण का जीवंत इतिहास है।
सर्वप्रथम ध्वजारोहण शस्त्र पूजा के बाद पद संचलन प्रारंभ हुआ। सभी मातृ शक्तिया गणवेश में इस प्रकार चल रही थी, जैसे लग रहा था मिर्ज़ापुर नगर में भी मात्र शक्तियों की एक अद्वितीय शक्ति है। संचलन लाल डिग्गी पार्क से प्रारंभ होकर रस कुंज तिराहे से होते हुए मुकेरी बाजार, गणेशगंज, बी० एड० विभाग की तरफ से पंडित दीनदयाल उपाध्याय चौराहे पर वापस लाल डिग्गी पार्क में समापन हुआ।
“हम नारी हैं, केवल शक्ति नहीं, संस्कार हैं। हम राष्ट्र की रचना हैं, इतिहास का आधार हैं। इस अवसर पर प्रियंका, संध्या, नीलम, इंदु, उमा, डा बीना, रितु, दीपा, गीता सहित सैकड़ो मातृशक्तियो ने कार्यक्रम में भाग लिया।

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