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गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस मानवता और धर्म की रक्षा का प्रतीक

0 गुरु तेग बहादुर साहिब की 350वाँ शहीदी दिवस मनाया गया और नगर में निकला भव्य शोभायात्रा

अहरौरा, मीरजापुर। सिख समुदाय गुरु तेग बहादुर की पुण्यतिथि पर शहीदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्हें केवल सिखों के नौवें गुरु ही नहीं बल्कि मानवता के रक्षक और धार्मिक स्वतंत्रता के प्रतीक के रूप में भी याद किया जाता है। गुरु तेग बहादुर का जन्म 21 अप्रैल 1621 को अमृतसर में माता नानकी और गुरु हरगोबिंद के घर हुआ था। बचपन से ही उनका स्वभाव तपस्वी और न्यायप्रिय था, जिसे देखकर उनके भविष्य की महानता का अनुमान लगाया जा सकता था।
गुरु तेग बहादुर ने अपने जीवन में मुगलों द्वारा जबरन धर्मांतरण और धार्मिक उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष किया। केवल 13 वर्ष की आयु में ही उन्होंने एक मुगल सरदार के खिलाफ युद्ध में विजय प्राप्त कर अपनी वीरता का परिचय दिया। उनके साहस, त्याग और शौर्य के कारण उन्हें ‘त्यागमल’ कहा गया। उन्होंने शिक्षा, आध्यात्मिक ज्ञान और कविता के माध्यम से समाज को मार्गदर्शन दिया। उनकी 116 काव्य भजन रूपी रचनाएँ पवित्र ग्रंथ ‘गुरु ग्रंथ साहिब’ में शामिल हैं।
गुरु तेग बहादुर ने पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में यात्रा कर प्रचार केंद्र स्थापित किए और सिख धर्म के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने पंजाब के चक-ननकी क्षेत्र में नगर बसाया, जो बाद में आनंदपुर साहिब का हिस्सा बन गया। वर्ष 1675 में औरंगजेब के आदेश पर उन्हें दिल्ली में शहीद कर दिया गया। उनके शहीद होने के बाद भी उनके पुत्र गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा की पहचान और शक्ति को आगे बढ़ाया।
इसी क्रम में अहरौरा नगर क्षेत्र के गुरुद्वारा तप स्थान श्रीगुरु तेग बहादुर साहिब, भाई सति दास, भाई मती दास, भाई दयाल जी दा शहीदी दिवस मनाया गया।
25 नवंबर दिन मंगलवार को सुबह 9 बजे से अखंड पाठ समाप्ति 10 बजे तक किया गया और दोपहर में अटूट लंगर वितरण हुआ। इसके बाद बाद भव्य शोभायात्रा निकालकर पूरे नगर में भ्रमण गया।
गगन दीप सिंह लखनऊ ने कहा कि जब धर्म के नाम पर मर मिटने की बात आती है तो सिख समुदाय का नाम हमेशा ही सम्मान के साथ लिया जाता है। सिखों के नौवें गुरु गुरु तेग बहादुर ऐसे ही एक विलक्षण प्रतिभा के धनी थे जिन्होंने हिंदू धर्म के सम्मान को बरकरार रखने के लिए अपनी जान की भी परवाह नहीं की।
हिंदू धर्म की रक्षा के लिए गुरु तेग बहादुर ने हंसते हंसते बलिदान दे दिया परंतु सिख और हिंदू धर्म को झुकने नहीं दिया।वे भारत और भारतीयता अर्थात हिंदुत्व की रक्षा के लिए सदैव स्मरण किए जाएंगे। इस दौरान सरदार सतपाल सिंह, सरदार ईश्वर सिंह, सरदार दर्शन सिंह, गुरमीत सिंह सहित सैकड़ों सिख समुदाय के लोग रहे। सुरक्षा के दृष्टि से थाना प्रभारी निरीक्षक सदानंद सिंह व नगर चौकी प्रभारी आशीष सिंह मय पुलिस फोर्स के मौजूद रहे।

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