मीरजापुर।
विंध्याचल, मां विंध्यवासिनी देवी का प्रसिद्ध महाशक्तिपीठ, जहां मां का एक दर्शन मात्र से जन्म-जन्मांतर के पाप कट जाते हैं। यह धाम उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में गंगा तट पर विंध्य पर्वत की गोद में बसा है। यहां की आस्था और भक्ति के साथ-साथ समाज सेवा का भी एक सुंदर उदाहरण देखने को मिलता है। श्री विंध्य धाम चैरिटेबल ट्रस्ट निरंतर जरूरतमंदों की मदद कर रहा है, जो मां की कृपा और भक्तों के पुण्य कार्यों का जीवंत प्रमाण है।
ट्रस्ट की ओर से कड़क ठंड में बार-बार गरीबों, असहायों और श्रद्धालुओं को कंबल वितरित किए जाते हैं। विंध्य पर्वत पर बंदरों को चना खिलाना भी ट्रस्ट की नियमित सेवा है, जो प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति करुणा दर्शाता है। समय-समय पर नेत्र शिविर आयोजित कर चश्मा, दवाइयां और निशुल्क आंखों के ऑपरेशन करवाए जाते हैं। गर्मियों में लू की तपिश में श्रद्धालुओं को शरबत वितरित करना ट्रस्ट के उद्देश्यों की पूर्ति करता है। ये सभी कार्य मानव सेवा, पर्यावरण संरक्षण और धार्मिक भावना के संगम को दर्शाते हैं।
इस पावन कार्य में मां विंध्यवासिनी के परम भक्त सुशील अग्रवाल, मुकेश अग्रवाल, आलोक पोद्दार, रवि अग्रवाल और रवि गोयल ने विशेष योगदान दिया है। इन भक्तों ने अपनी अर्जित संपत्ति का कुछ अंश मां की सेवा में समर्पित कर कंबल वितरण जैसे पुनीत कार्यों में सहयोग किया। ऐसा विश्वास है कि मां के ऐसे अनन्य भक्तों के इस प्रयास से न केवल उनके अपने पाप कटते हैं, बल्कि उनके इष्ट मित्रों, सगे-संबंधियों के भी सारे दोष दूर होते हैं और जीवन सफल हो जाता है।
कार्यक्रम के दौरान मां विंध्यवासिनी धाम के श्रृंगारिया एवं प्रधान पुजारी तथा ट्रस्ट के ट्रस्टी पंडित शेखर सरन उपाध्याय ने अपना संदेश दिया। उन्होंने कहा, “मां विंध्यवासिनी की कृपा से ही सेवा का यह मार्ग प्रशस्त होता है। कंबल, नेत्र शिविर और जीव-सेवा जैसे कार्य भक्तों के जीवन को धन्य बनाते हैं और मां के चरणों में समर्पण की भावना को मजबूत करते हैं। सभी भक्तों को प्रेरित करता हूं कि धन का कुछ हिस्सा समाज सेवा में लगाएं, इससे पुण्य की प्राप्ति होती है।”
इसी तरह, मां विंध्यवासिनी धाम के श्रृंगारिया एवं प्रधान पुजारी पंडित राघवेंद्र उपाध्याय ने कहा, “मां का धाम सेवा का केंद्र है। ट्रस्ट द्वारा की जा रही ये गतिविधियां मां की जागृत शक्ति का प्रमाण हैं। भक्तों का सहयोग देखकर हृदय प्रसन्न होता है। यह सेवा मां की इच्छा से ही संभव हो रही है, जो सभी के कल्याण के लिए है।”
इस अवसर पर पंडित रघुवर महाराज जी, पंडित विनय उपाध्याय जी, पंडित जगरनाथ दुबे जी (बबवा जी, अध्यक्ष जी), पंडित पंकज दुबे महराज जी और पंडित उदयादित्य पांडेय जी सहित अन्य गणमान्य संत-महंत उपस्थित रहे।
श्री विंध्य धाम चैरिटेबल ट्रस्ट का यह प्रयास विंध्याचल की आस्था को और मजबूत कर रहा है। यह सिद्ध करता है कि मां के दरबार में भक्ति के साथ सेवा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। ऐसे कार्यों से समाज में करुणा और सहानुभूति की भावना बढ़ती है, तथा मां विंध्यवासिनी की महिमा और अधिक फैलती है। जय मां विंध्यवासिनी।



