0 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मीरजापुर की ओर से मनायी गयी संत रविदास जी की जयंती
0 कहा- कुत्सित विचार रखने वालो के मन मे आज भी भेदभाव, कलुष है, वह दूर होना चाहिए
0 बिना निमंत्रण लाखो लाख लोगो द्वारा गंगा स्नान और स्नान के दौरान जाति बिरादरी का भेदभाव न होना भी हमारे राष्ट्र की समरसता का परिचायक
मीलजापुर।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विंध्याचल विभाग के विभाग प्रचारक कौशल किशोर जी ने कहाकि महापुरुषों की जयंतियों के पीछे एक बड़ा इतिहास होता है और इतिहास उन्हीं का लिखा जाता है, जिन्होंने सामाजिक जीवन में कार्य किये हो। ऐसे ही सतगुरु संत रविदास की जयंती पर हम कहना चाहेंगे कि व्यक्तिगत जीवन तो सब जीते हैं, लेकिन समाज और राष्ट्र के लिए कुछ ही लोग जीते हैं और ऐसे लोगों को याद करने से संस्कृति की महत्ता बढ़ती है। व्यक्ति, विचार और देश जब पराधीन है तो सुख सपने में भी नहीं है। भक्ति से ही शक्ति और संस्कृति होती है, बहुत से लोग पैदा हुए, लेकिन याद कुछ ही लोग किए जाते हैं। विभाग प्रचारक संत रविदास पार्क मे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मीरजापुर नगर की ओर से आयोजित श्री रविदास जयंती कार्यक्रम मे मंचासीन नगर कार्यवाह लखन, पार्क के केयरटेकर सोहनलाल के साथ माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के उपरांत अमृत वचन एकल गीत के बाद बतौर मुख्य वक्ता उपस्थित लोगो को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि पूर्वजों की रीतिनीति परंपराओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी हम सबकी है। सामाजिक ताना-बाना के बीच दायित्व निर्माण भी करना पड़ता है, लेकिन जरा सोचे की क्या हम ने मानव कल्याण के लिए कुछ किया है क्या और जो ऐसा करते हैं मनुष्य के बजाय देवत्व की श्रेणी में पूजने के योग्य हो जाते हैं और यही कार्य संत रविदास जी ने किया।
वर्ष 1337 में जब उनका जन्म हुआ, तो मुगलों का आधिपत्य था। जिन्होने एक हाथ में कुरान दूसरे हाथ में तलवार के जरिए भक्ति पर बंधन लगाया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि हमारी संस्कृति, समाज, सज्जन विभिन्न मतों में परिवर्तित हुए विघटित हुई, लेकिन संत रविदास जी ने अपने भक्ति के माध्यम से सर्व समाज को एकत्रित किया भक्ति के द्वारा उनके द्वारा किया गया परिवर्तन भी सराहनीय है।
ऐसे ही महापुरुषों के पदचिन्हो पर चलकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने संगठन खडा किया, क्योकि देश मे नेतृत्व करने वालो का अभाव हो गया था। सर्व समाज को लेकर शोषित, वंचित, पीड़ित, उपेक्षित की संवेदना, करुणा के द्वारा खड़ा हुआ यह संगठन है। उस कालखंड मे अंग्रेजों ने कोई कसर नहीं छोड़ी हिंदू समाज को विखंडित करने में। एक्जेलेंडर, महमूद गजनवी, मोहम्मद बिन कासिम सभी ने देश को तोड़ने, लूटने, माता बहनों की आबरू लूटने, भारत की आत्मा की हत्या करने जैसा घृणित कार्य किया। बाद में आत्महीनता घृणा शुरू हुआ और उसी का नाम छुआछूत अस्पृश्यता था। वे हमको लूटकर चले गये और हम जाति बिरादरी मे बंटकर रह गये।
विभाग प्रचारक ने कहाकि गुरु नानक जी ने कहा था की संगत पंगत एक होगी, तो विचार का समावेश भी होगा। तभी तो आरएसएस पूरे दुनिया में इकलौता संगठन है, जो हर समाज को समान दृष्टि से देखा है आज भी जमीन पर बैठने वाले लोग केवल आरएसएस के है और यही आर एस एस की समरसता है।
उन्होंने कहाकि ईश्वर अंश जीव अविनाशी अर्थात हम एक ही ब्रह्म के उपासक हैं, तो फिय भेद, विभेद, घृणा, ईर्ष्या और द्वेष क्यों? संपूर्ण हिंदू समाज को आज के दिन इस संकल्प को अंगीकार करने की आवश्यकता है कि हमारी एक ही पहचान है हम हिंदू राष्ट्र के अंगभूत संगठक हैं और हिंदू भाई का धर्म परिवर्तन हुआ, तो हमारा समाज शक्तिहीन होगा, इसे हमे हर हाल मे रोकना और ऐसा कृत्य करने वालो को सबक सिखाना होगा।
उन्होंने कहाकि रविदास, कबीर, सूर तुलसी जैसे महापुरुषों ने भक्ति के माध्यम से देश को जगाने और संपूर्ण हिंदू समाज को एक सूत्र में बांधने का काम किया। हम और हमारा समाज ज्ञान, कर्म और भक्ति इन तीनों में से किसी एक को ध्येय बना सकता हैं, लेकिन ध्यान रहे कि कर्म भी धर्म आधारित होनी चाहिए और भक्ति उसकी कसौटी है।
विभाग प्रचारक ने कहाकि आज हर वर्ग अपने व्यवसाय को भूलता जा रहा है। मूल कार्य को छोड़कर दूसरे कार्य में लग रहे हैं। स्वदेशी की बजाय ब्रांडेड की तरफ भाग रहे हैं। आज आवश्यकता है वह स्व आधारित जीवन शैली अपनाने की और इसी से देश का व्यवसाय बढ़ेगा। पेड, पर्यावरण, पानी को बचाकर प्लास्टिक का उपयोग न करे। राष्ट्र कल्याण की सोच ही राष्ट्रीयत्व है और जब राष्ट्र की बात आती है, तो एक राष्ट्र प्रकटीकरण करना है और वह हिंदू सनातन संस्कृति ही है, जो सबको समेटने की क्षमता रखता है।
कहाकि यूनान, मिश्र, रोमा सब मिट गये जहा से, कुछ बात है कि हस्ती मिटती नही हमारी। हमारा युगाब्द 5127, विक्रमी संवत 2082, माघ मास की पूर्णिमा तिथि और बिना निमंत्रण के लाखो लाख लोगो द्वारा गंगा स्नान और गंगा मे स्नान के दौरान एक दूसरे से जाति बिरादरी का भेदभाव न होना हमारे राष्ट्र की समरसता ही है। फिर भी, कुत्सित विचार रखने वालो के मन मे आज भी भेदभाव, कलुष है, वह दूर होना चाहिए। परंतु ध्यान रहे कि ऐसे लोगो को भी हम हेय दृष्टि से न देखें। आज नही तो कल दोनो एक साथ मिलकर चलेंगे। आरएसएस हिंदूसमाज को एकरस कर एकदिशा मे चलने चलाने के साथ परं वैभव की ओर अग्रसर है।
इस अवसर पर पूर्व चेयरमैन मनोज जायसवाल, चेयरमैन श्यामसुंदर केशरी, नगर प्रचारक अंजनी, गौरव ऊमर, संजय सेठ, श्यामजी, देवराम, रीतेश कुमार, नीरज गुप्ता बैजू, अखिलेश यादव, प्रदीप पाण्डेय, विमलेश अग्रहरि, सोनू दीक्षित, राजेश शाह, सुधांशु अस्थाना, स्वप्निल, सहित भारी संख्या मे संघ विचार परिवार के लोग एवं आमजन मौजूद रहे। संघ प्रार्थना एवं संत रविदास जी को सभी के द्वारा पुष्पार्चन नमन के उपरांत भव्य जलपान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।



