0 कहा- राम मंदिर से राष्ट्र मंदिर का निर्माण अभी बाकी
0 स्वयंसेवकों ने मनाया विवेकानंद शाखा का वार्षिक उत्सव, गतिविधियों का किया प्रदर्शन
मिर्जापुर। रविवार, 08 मार्च 2026 को नगर के आवास विकास कालोनी में नित्य लगने वाले विवेकानंद शाखा का वार्षिक उत्सव कालोनी स्थित पानी की टंकी के पास उत्साहपूर्वक मनाया गया। शाखा के उपस्थित सभी स्वयंसेवक नियमित शाखा पर होने वाले शारीरिक कार्यक्रम जैसे सामूहिक खेल, आसन योग, प्राणायाम, सूर्य नमस्कार आदि का प्रदर्शन उपस्थित जनता के बीच किया। जिसमें समय पालन, एकरुपता, साहस एवं दृढ़संकल्प व विश्वास दिखाई दिया। समारोह की अध्यक्षता प्रभात जी ने किया।
मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला प्रचारक रजत प्रताप जी ने समारोह को संबोधित करते हुए कहाकि हिन्दू समाज को एक सूत्र में पिरोने का काम संघ की दैनिक शाखा पर होता है। उन्होंने कहा कि पूज्य डा हेडगेवार ने उच्च शिक्षा प्राप्त कर समाज के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनके मन में बाल पन में ही हिन्दूत्त का ज्वार उठा रहा था, जिसको पूरा करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना १९२५ में विजय दशमी के दिन नागपुर में की। इस शाखा का उददेशय व्यक्ति से राष्ट्र निर्माण थी। उस समय हम बंटे और बिखरे हुए थे।
फाहयान ‘सोने की चिडिया’ को देखने भारत आया, तो एक जगह देखा दो किसान नोकझोक कर रहे थे, एक ने जमीन बेची और दूसरे ने खरीदी थी। जब उसी खेत मे सोने के सिक्के से भरा घडा मिला, तो दोनो उस पर एक दूसरे का अधिकार बताकर देना चाह रहे थे। एक ने कहा मैने खेत बेच दिया, खेत से जो मिला वह आपका तो दूसरे ने कहा खेत भले मैने खरीदी लेकिन यह संपत्ति आपके पूर्वजो की संचित पूजी है। यह देखकर फाहयान समझ गया कि भारत पर अधिकार जमाना है तो शक्ति पर नही, संस्कृति पर वार करना होगा और आक्रांताओ ने यही किया, फूट डाला और राज किया।
लक्ष्मीबाई, अहिल्याबाइ, शिवाजी, विवेकानंद जैसे लोगो ने हिंदुत्व भारतीय संसकृति के लिए काम किया। गुरुपुत्रो का बलिदान इसी के लिए हुआ। इसी कडी मे संघ संस्थापक हेडगेवार जी ने बाल्यकाल मे बिक्टोरिया के राज्याभिषेक का मिठाई नही खाया, यूनियन जैक उतार दिया और अंग्रेज अधिकारी के सामने सामूहिक रूप से वंदे मातरम के साथ क्रांति का सूत्रपात किया। कलकत्ता को केंद्र बनाया। वही डाक्टरी पढकर अस्पताल या नोकरी नही कर आजादी के लिए 1925 मे संगठन खडा किया और 1926 मे शाखा शुरु हुई।
उन्होने कहाकि संघ का उद्देश्य परं वैभव और मा भारती की जयकार है। संघ की शाखा साधना का केंद्र बिंदु है। संस्कृति के लिए तन मन धन समर्पण के भाव जागरण से राम मंदिर का निर्माण संभव हुआ है। राष्ट्र मंदिर का निर्माण अभी बाकी है।संघ के 101 वे वर्ष मे हम कार्य कर रहे है। परिवार से समाज के अंदर पंच परिवर्तन का विकेंद्रीरण हो, इस हेतु हम सभी लगे हुए है। ऐसे मे उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रत्येक हिन्दू को संघ की शाखा में जाकर शारीरिक एवं बौद्धिक क्षमता का संवर्धन करें।
उक्त अवसर विभाग धर्म जागरण प्रमुख वीरेंद्र मौर्य, जिला धर्मजागरण संयोजक इन्द्र जीत शुक्ल, जिला सम्पर्क प्रमुख सन्तोष मिश्र, नगर बौद्धिक शिक्षण प्रमुख विमलेश अग्रहरि, अधिवक्ता परिषद के जिला अध्यक्ष शिवप्रसाद सिंह, नरेश शर्मा, पहाड़ी के पूर्व खण्ड कार्यवाह अनिल अग्रहरि, शाखा कार्यवाह ब्रजेश सिंह, मुख्य शिक्षक राजेश, निलेश, दयाल, रवि सहित काफी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे।




