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विंध्य महोत्सव में दूसरे दिन अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का हुआ भव्य आयोजन

0वक़्त ने रख दिया है गले पर छूरी, ऐसे में गीत गाने का मन कैसे हो”: कवि लल्लू तिवारी

0 “दुनियां समझ रही है कि चमक गया हूँ मैं, पर दिल ही जानता है कितना थक गया हूँ मैं: कवि स्वयं श्रीवास्तव
मिर्जापुर। वासन्तिक नवरात्र 2026 के अवसर पर नव निर्माण के 09 वर्ष के अवसर पर विंध्याचल रोडवेज परिसर में चल रहे ऐतिहासिक विंध्य महोत्सव में दूसरे दिन अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन अत्यंत सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि विधायक छानबे श्रीमती रिंकी कोल, जिलाधिकारी मीरजापुर पवन कुमार गंगवार व अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अजय कुमार सिंह द्वारा दीप प्रज्वलन एवं माँ विंध्यवासिनी के पूजनोपरांत लखनऊ से पधारी कवयित्री शिखा श्रीवास्तव ने वाणी वन्दना कर काव्यनिशा की औपचारिक शुरुआत की।

उन्नाव से पधारे देश के स्टार कवि व गीतकार स्वयं श्रीवास्तव ने तनाव, चिन्ता और अवसाद भरे हालातों के बीच प्रेरणा और आत्मविश्वास की बात करते हुए कहा- “दुनियां समझ रही है कि चमक गया हूँ मैं, पर दिल ही जानता है कितना थक गया हूँ मैं, आसान लग रहा है सफर देखने में पर दीवानगी की आखिरी हद तक गया हूँ मैं”। मीरजापुर के सुविख्यात कवि व गीतकार ने अपने मनहर मुक्तकों व गीतों से श्रोताओं का मन मोह लिया।

उन्होंने आज की सामाजिक विसंगतियों पर कहा- आदमी आदमी अब नहीं यंत्र है, सारा जीवन ही जइसे की षड़यंत्र है, वक़्त ने रख दिया है गले पर छूरी, ऐसे में गीत गाने का मन कैसे हो” लखनऊ से पधारे ओज के राष्ट्रीय कवि शिवकुमार व्यास ने अपने बगावती तेवर में दुर्व्यवस्था पर प्रहार करते हुए कहा- “वीर बलिदानियों की जुबानी लिखो, विकसित भारत की अनुपम कहानी लिखो, जब लिखो तब किसी पर मुरव्वत नहीं, दूध को दूध पानी को पानी लिखो”।

बाराबंकी से आये कवि सम्मेलन का संचालन कर रहे हास्य कवि विकास बौखल ने अपने संचालन और हास्य कविताओं से श्रोताओं को हंसा कर लोट पोट कर दिया। उन्होंने अपने चुटिले अंदाज में कहा-“किसी खंजर से ना तलवार से जोड़ा जाए, सारी दुनियां को चलो प्यार से जोड़ा जाए, ये किसी सख्श को दोबारा ना मिलने पाए, प्यार के रोग को आधार से जोड़ा जाए”। लखनऊ से पधारी गीत, श्रृंगार, छंद व गज़लों की सुकुमार कवयित्री शिखा श्रीवास्तव ने अपने मुक्तक व गीतों से श्रोताओं की भाव विभोर कर दिया। उन्होंने कहा

“मैं नारी चाहत का एक समंदर रखती हूँ, संग हौसलों के मैं चाहत का पर रखती हूँ, घर से लेकर दफ्तर तक की जिम्मेदारी है, कदमों में धरती आँखों में अंबर रखती हूँ”।
रामनगर बाराबंकी से आये हास्य के धुरंधर कवि प्रमोद पंकज ने अपनी हास्य पैरोडियों से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।
कहा कि- “शब्द गढ़ते तो तुलसी के पुजारी बन गए होते सुर के सिंधु के तट के प्रभारी बन गए होते, तनिक मीरा कि गागर का रसामृत पान कर लेते, उलटि गागर में सागर को बिहारी बन गए होते”। बाराबंकी से ही ओज? का युवा कवि शिवेश राजा ने अपनी धारदार ओजस्वी रचनाओं से श्रोताओं का मन झकझोर दिया।

उन्होंने कहा- “कुहासा झूठ का जब सत्य को ढकने लगेगा, जब मूल्य मानव जाति का घटने लगेगा और जब भी पितामह अन्याय के संग दिखेंगे, तब कवि तलवार से कविता लिखेगा”।
अन्त में अपर जिलाधिकारी अजय कुमार सिंह, उप जिलाधिकारी संजीव कुमार यादव एवं जिला सूचना अधिकारी ओम प्रकाश उपाध्याय ने कवियों को शाल चुनरी, स्मृति चिन्ह एवं प्रमाण पत्र भेट कर सम्मानित किया।

इस अवसर पर जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार, पुलिस अधीक्षक, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ने सभी श्रोताओं, आँगनतुकों व कवियों के प्रति आभार ज्ञापित किया। इस अवसर पर अपर्णा कौशिक रजत सहित जनपद स्तरीय सभी अधिकारी, कर्मचारी, पत्रकार व हजारों श्रद्धालु श्रोता उपस्थित रहे।

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