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जिला भाजपा मे वैश्य समाज से पदाधिकारियों की संख्या घटने से असंतोष

मीरजापुर। जिले में बीजेपी के नवनियुक्त जिलाध्यक्ष और उनकी नवगठित कमेटी, जिनमे 21 जिला पदाधिकारी सहित कुल 67 लोग शामिल है। संगठन के जिलाध्यक्ष की कमान दलित समाज के कार्यकर्ता को देने की घोषणा के बाद जहां अंदर ही अंदर खुसूर-फुसूर शुरू हो गई थी, लेकिन किसी ने खुल कर विरोध का साहस नहीं किया। वहीं पार्टी संगठन ने आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए दलित मतों को साधने के लिए दलित चेहरे को जिलाध्यक्ष के रुप में घोषित कर न केवल सभी को हैरत में डाल दिया था, बल्कि संतुलन साधने का भरपूर प्रयास किया है। लेकिन जिला कमेटी में पदाधिकारियों को लेकर विरोध के स्वर तेज़ होने लगे हैं।

     एक वर्ग विशेष को को साधने के बाद बाकी कमेटी में बनिया समाज की उपेक्षा को लेकर चर्चा तेज़ हो गई है। लोगों का कहना है कि पहले संगठन के मुख्य जिला कमेटी में वैश्य समाज को भरपूर स्थान दिया गया था, लेकिन इस बार वैश्य समाज को हांसिए पर रख छः की जगह दो पर लाकर सीमित कर दिया गया है। इसके मुकाबले 7 ब्राह्मण चेहरों को प्राथमिकता दी गई है। नवगठित कमेटी में ब्राह्मण समाज से उदयभान तिवारी उपाध्यक्ष, हेमंत तिवारी उपाध्यक्ष, रवि पांडे महामंत्री, रोहित त्रिपाठी मंत्री, सुनीता शर्मा मंत्री, भावेश शर्मा मीडिया प्रभारी एवं मनोज दुबे को कार्यालय मंत्री का दायित्व दिया गया है। 

  उल्लेखनीय है कि बालेंदु मणि त्रिपाठी जब जिला अध्यक्ष थे, तब 5 पदाधिकारी वैश्य समाज के बनाए गये थे, जिसमें आशुकांत चुनाहे, संतोष गोयल, डाली अग्रहरी, नीलम सोनी और बचाऊ लाल सेठ के साथ कायस्थ अमित सिन्हा को रखा गया था। बृजभूषण सिंह की टीम में वैश्य समाज से चार चेहरे क्रमश: सन्तोष गोयल महामंत्री, श्याम सुंदर केशरी उपाध्यक्ष, गौरव उमर मंत्री और नितिन गुप्ता मंत्री बनाए गये थे। किंतु, इस बार केवल दो पदाधिकारी वैश्य समाज से रखते हुए जिला कार्यसमिति सदस्य बनाकर कोरम पूर्ति कर दी गयी। 

    

भागेदारी नहीं, थमाया झुनझुना

       वहीं बात करें वैश्य और बनिया समाज की, तो वर्तमान में एक उपाध्यक्ष गौरव ऊमर और दूसरे चंद्रांशु गोयल को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी देकर एक तरह से वैश्य समाज को किनारे कर दिया गया है। सूत्रों की मानें, तो वैश्य बिरादरी के ही एक पदाधिकारी द्वारा अपने और स्वजातियों को किनारे लगा दिया गया है, जिसकी आम जनमानस में खूब अच्छी खासी चर्चा है। दिलचस्प बात तो यह है कि जिला कमेटी के करीब आधे से ज्यादा पदाधिकारी नगर विधानसभा सभा से ही लिए गये हैं, जिसकी चर्चा जिले में खूब हो रही है। 

      बताते चलें कि बीजेपी जिला कमेटी घोषित होने से पहले नामित सभासदों की जो लिस्ट जारी हुई, उसमें भी एक भी सभासद वैश्य समाज का नहीं रहा। इन सब बातों को लेकर एक तरह वैश्य समाज बीजेपी के मौजूदा रवैए को लेकर अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहा है। वैश्य समाज से जुड़े लोगों का कहना है कि इसका परिणाम 2027 के विधान सभा चुनाव में मीरजापुर जनपद मे देखने को मिल सकता है।

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