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मीरजापुर में मंगल को बडा अमंगल होने से बचा; एक या सवा घंटे बाद गिरती जुबिली कालेज की छत, तो होता अंतर्राष्ट्रीय हादसा

0 पचास छात्रों वाले कक्ष मे 7 बजे से चलती क्लास, लेकिन छ बजे पूरी तरह धराशाई हो गया छत
मीरजापुर। अंग्रेजी हुकूमत के दौरान सन् 1885 में स्थापित शहर के एकमात्र ए एस जुबली इंटर कॉलेज का जर्जर छत गार्डर और पटिया सहित पूरी तरह से धराशाई हो जाना और अंदर रखे डेस्क बेंच तक का जनाजा निकल जाना विद्यालय भवन की मजबूती और सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़ा करता है। जरा सोचिए, यदि विद्यालय की छत सुबह 6:00 की बजाय 7:00 बजे गिरती तो यह घटना शायद अंतरराष्ट्रीय स्तर की घटना बनती, तो फिर इसका जिम्मेदार कौन होता?

मीरजापुर के ऐतिहासिक जुबिली कॉलेज के भवन का एक कक्ष, जिसमे आठवी के छात्र अध्ययन करते थे, मंगलवार को सुबह 6 बजे भरभराकर तेज आवाज के साथ गारडर और पटिया सहित पूरी तरह से ध्वस्त हो गया। हादसे मे क्लासरुम के सभी डेस्क बेंच तक का जनाजा निकल गया। बताया जाता है कि विद्यालय का समय सुबह सात बजे से था।

यदि यही घटना एक-सवा घंटे बाद होती तो मीरजापुर मे मंगल को बडा अमंगल होता और क्लासरुम मे न जाने कितने अभिभावकों का चिराग बुझ जाता और मीरजापुर की यह घटना एक अंतर्राष्ट्रीय घटना बनती। तब इसका जिम्मेदार कौन होता? सवाल उठता है कि आखिर क्यों जर्जर भवन मे बैठाए जा रहे थे आठवीं के बच्चे? क्या कालेज भवन के जर्जर होने की अधिकारियों को दी गयी थी सूचना? क्या आजादी के बाद से अब तक नहीं मिली मरम्मत के लिए कोई बजट?

ताकि न हों हादसे: स्कूल कालेजों का इंजीनियर्स से कराया जाय सर्वे
जिला प्रशासन को नगर सहित समूचे जनपद में जर्जर अवस्था में पहुंच चुके स्कूल कॉलेज का इंजीनियर के माध्यम से सर्वे करना चाहिए और विद्यालयों को पूर्व में जारी किए गए मरम्मत निर्माण आदि के लिए दिए गए धन का भी हिसाब करना चाहिए, और आवश्यकता हो तो बजट की व्यवस्था कर मरम्मत आदि कर दिया जाए ताकि समय से उनका ध्वस्तीकरण अथवा सुदृढिकरण और भविष्य में ऐसी घटनाएं ना हो।

गिरे हुए कमरा व जांचोपरान्त पाए गए असुरक्षित कक्ष को प्रोजेक्ट अलंकार के तहत कराया जाएगा मरम्मत: जिलाधिकारी
मीरजापुर। ए0एस0 जुबली इण्टर कालेज में जर्जर कक्ष में पटिया व गाटर गिरने की सूचना पर जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार तत्काल विद्यालय पहुंचकर कक्ष का निरीक्षण किया। निरीक्षणोपरान्त जिलाधिकारी ने प्राचार्य को निर्देशित करते हुए कहा कि विद्यालय के भवन का तकनीकी रूप से भी निरीक्षण कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि अध्यापकों व छात्रों की सुरक्षा के दृष्टिगत विद्यालय में सुरक्षित कक्षों में ही व्यवस्था कर पठन पाठन कराया जाए। उन्होंने कहा कि विद्यालय के गिरे हुए कमरे व जो तकनीकी जांच में असुरक्षित कक्ष पाया जाता है उसे तत्काल प्राथमिकता के आधार पर प्रोजेक्ट अलंकार योजना के तहत विस्तृत कार्य योजना बनाते हुए मरम्मत कराया जाए। उन्होंने कहा कि विद्यालय को सुरक्षित रखने के लिए हर जरूरी कार्य किया जाएगा।

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