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उप मुख्यमंत्री ने आज विन्ध्याचल में आयोजित त्रिदिवसीय क्षेत्रीय वैदिक सम्मेलन का मुख्य अतिथि के रूप में दीप प्रज्ज्वलन कर किया शुभारम्भ

वेद केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि जीवन जीने की वैज्ञानिक पद्धति – उप मुख्यमंत्री

उपाध्यक्ष राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के आवास पहुंचकर परिजनों से की भेंट

मीरजापुर। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ने आज जनपद मीरजापुर में अपने भ्रमण के दौरान विन्ध्याचल स्थित होटल विन्ध्य रेजीडेंसी में आयोजित त्रिदिवसीय क्षेत्रीय वैदिक सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचकर मंत्रोच्चार के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वैदिक सम्मेलन में सम्मिलित होने का अवसर प्राप्त हुआ है। यह हमारे लिए गर्व की बात है। कार्यक्रम में प्रख्यात विद्वानों, संतों, वैदिक परम्परा से जुड़े विद्वतजनों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के आयोजक पंडित अगस्त्य द्विवेदी ने उप मुख्यमंत्री सहित विधायक नगर रत्नाकर मिश्र, उपाध्यक्ष राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग सोहन लाल श्रीमाली, सदस्य विधान परिषद श्याम नारायण सिंह उर्फ विनीत सिंह, जिला अध्यक्ष भाजपा लाल बहादुर सरोज, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद मीरजापुर श्याम सुन्दर केसरी व अन्य विद्वतजनों को मां विन्ध्यवासिनी देवी का चित्र व अंग वस्त्रम भेंटकर स्वागत व अभिनन्दन किया।

 उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अपने सम्बोधन में कहा कि वेद केवल धार्मिक ग्रंथ ही नहीं है अपितु यह जीवन जीने की वैज्ञानिक पद्धति भी है। आज के युवा पीढ़ी को अपनी सनातन जड़ों से जोड़ने के लिए इस प्रकार के वैदिक सम्मेलनों का आयोजन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति का ही ज्ञान आज पूरे विश्व में दर्शन करा रहा है।

 उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने संबोधित करते हुए कहा कि कार्यक्रम के संयोजक पंडित अगस्त्य द्विवेदी जी ने प्रयागराज के वेद विद्यालय से, महर्षि भारद्वाज वेद विद्यालय से शिक्षा दीक्षा प्राप्त की है। आज यहां पर इतना बड़ा कार्यक्रम आयोजन हो रहा है और यह तीन दिन तक कार्यक्रम चलेगा। मैंने कहा कि 3 दिन तक रहना मुश्किल होगा लेकिन पहले दिन उद्घाटन के तौर पर मैं उपस्थित रहूंगा। विद्यालय के प्राचार्य, आचार्य, विद्यालय बटुकों सभी का अभिवादन किया।

 आज मैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का बाल स्वयंसेवक, संघ की शाखा में गीत की दो लाइन मैं आप सबके सामने कहूंगा – वेदों का यह देश हमारा, सुंदर स्वर्ग समान है, इसकी नदियों में अमृत है, कण-कण में भगवान है। गंगा के पावन तट पर जैसा कि बताया जाता है कि यह विश्व का केंद्र बिंदु है। यहां विंध्यवासिनी माता विंध्याचल पर्वत पर विराजमान हैं, साक्षात विराजमान हैं। मां काली का मंदिर जहां मुझे आज दर्शन करने का सौभाग्य मिला। जब आप द्वापर में जाते हैं तो योग माया के रूप में माता अष्टभुजी यहीं पर हैं। जब कंस के द्वारा उनको जमीन पर पटका गया तो उनके हाथ से छूट करके वे यहीं पर आकर विराजमान हुईं। भगवान श्री कृष्ण की एक तरह से बड़ी बहन हैं। और जब महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद संस्थान उज्जैन की चर्चा होती है, भगवान कृष्ण जी की, बलराम की और सुदामा जी की मित्रता की चर्चा और शिक्षा की चर्चा सब कुछ इसी प्रतिष्ठान से जुड़ा हुआ है। हम लोग भी सुनते हैं, पढ़ते हैं, जानते हैं।

हम सभी जानते हैं देश में सब की यही इच्छा है कि वेदों की गूंज अनंत काल तक इस भारत भूमि पर सुनाई देती रहे। उसमें अड़चन डालने वाले बहुत सारे आए और चले भी गए।कार्यक्रम की चर्चा के दौरान उन्होंने बताया कि 100 ऐसे विद्यालय उज्जैन के राष्ट्रीय सांदीपनि वेद प्रतिष्ठान से संबंधित हैं और बहुत ही योग्य ढंग से आज दो वेद विद्यालय विभिन्न स्थानों पर शुरू हुए हैं, वे आगे बढ़ रहे हैं। उसमें जो केंद्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार बनी, उस सरकार की इच्छा थी कि जो वेदों में ज्ञान है, पूरे दुनिया में किसी के पास नहीं है, और उस ज्ञान की रक्षा तभी होगी जब इसे लुप्त होने से बचाया जाए और लुप्त होने से तभी बचाया जा सकता है।

  अब निडरतापूर्वक आप सभी के आशीर्वाद से देश की जो सरकार है अच्छा से अच्छा काम कर रही है। प्रदेश की जो सरकार है वह डंके की चोट पर काफी अच्छा कार्य कर रही है। आज मां विंध्यवासिनी का धाम कैसा है और पहले कैसा था? अगर आज लाखों की संख्या में प्रतिदिन भक्त आ रहे हैं और व्यवस्थित तरीके से दर्शन कर रहे हैं, सुरक्षित आ सकते हैं या सुरक्षित जा सकते हैं, ठहरना चाहें तो ठहरने की भी व्यवस्था की गई है। यही स्थिति बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में है। विश्व हिंदू परिषद के संगठन मंत्री थे परम पूज्य अशोक सिंघल जी जो आज इस धरती पर नहीं हैं।

 उनके बारे में मैं एक ही लाइन बोला करता हूं कि पूज्य अशोक सिंघल जी की अंतिम इच्छा थी कि घर-घर पहुंचे वैदिक शिक्षा। उन्होंने कहा कि मैं सौभाग्यशाली रहा कि ऐसे महान लोगों के साथ कार्य करने का अवसर मिला और वही कार्य करते हुए और जब मुझे काशी विश्वनाथ जी का दर्शन करने के लिए आने का सौभाग्य मिलता था, वह छोटी सी गली और बड़ी मुश्किल से बाबा विश्वनाथ जी के पास जगह मिलती थी। लेकिन आज मुझे गर्व है अगर आज एक लाख लोग वहां दर्शन करने के लिए पहुंचे तो उनके लिए कायदे की व्यवस्था की गई है।

 महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान उज्जैन व श्री मां विंध्यवासिनी श्रवण वेद पाठशाला समिति के तत्वावधान में आयोजित त्रिदिवसीय क्षेत्रीय वैदिक सम्मेलन के आयोजन में मैं आप सभी का उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी और योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व वाली सरकार की तरफ से स्वागत और अभिनंदन करता हूं। कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रोफेसर विरुपाक्ष वि. जड्डीपाल जो सचिव के रूप में देश भर के अलग-अलग स्थानों पर वेद विद्यालय चला रहे हैं, उन्हें बढ़ाने की चिंता करने में बहुत बड़े उत्तरदायित्व का निर्वहन करते हैं।

विन्ध्याचल मां की धरती में उनका स्वागत अभिनंदन करता हूं। कार्यक्रम में उपस्थित मंचासीन लोगों का अभिवादन किया। प्रोफेसर किशोर मिश्रा जी पूर्व सचिव, प्रोफेसर राजाराम शुक्ल पूर्व कुलपति सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी, मां की कृपा से दो बार बने विधायक रत्नाकर मिश्रा जी, विधान परिषद के सदस्य विनीत सिंह, भाजपा जिला अध्यक्ष लाल बहादुर सरोज, पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष सोहनलाल श्रीमाली जी, हमारे जनपद के प्रथम नागरिक और नगर पालिका के अध्यक्ष श्याम सुंदर केसरी, कार्यक्रम के संयोजक अगस्त्य द्विवेदी जी का अभिवादन किया।

उप मुख्यमंत्री अपने निर्धारित कार्यक्रम के तहत ओझला पुल स्थित उपाध्यक्ष राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग सोहन लाल श्रीमाली के जन सम्पर्क कार्यालय/आवास पर पहुंचकर परिजनों से आत्मीय भेंट की। इस अवसर पर उपाध्यक्ष राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग सोहन लाल श्रीमाली ने उप मुख्यमंत्री जी का भव्य स्वागत व अभिनन्दन किया।

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