मीरजापुर। डैफोडिल्स पब्लिक स्कूल संकट मोचन शाखा का वार्षिकोत्सव “अस्मिता” लोहिया तालाब परिसर में “विविध परंपराएँ, एक उत्सव” थीम पर हुआ। कार्यक्रम में संस्कृति, कला, प्रतिभा और एकता की भावना का सुंदर संगम देखने को मिला।
शुभारंभ दीप प्रज्वलन कर मुख्य अतिथि श्रीमती बिंदु सैनी, विद्यालय के निर्देशकगण अपराजिता सिंह, अमरदीप सिंह, साहिबा एवं काशिका, संकट मोचन शाखा की प्रधानाचार्या पूजा अग्रवाल, नारघाट शाखा एवं लोहिया तालाब शाखा के प्रधानाचार्य व उप-प्रधानाचार्या तथा प्रशासक श्रीमती मिठठू बनर्जी व श्रीमती सिंघानिया ने किया।
कार्यक्रम के आरंभ में विद्यालय ने पेश की समाज के प्रति कर्तव्य की नई मिसाल 6 बेटियों
को पंखों की उड़ान मिली।
शेयर और केयर के तत्वावधान में 2026 के वार्षिक उत्सव के भव्य मंच से छह जरूरतमंद व होनहार बेटियों को शिक्षा के निरंतर ज्योति जलाए रखने हेतु पंखों की उड़ान के रूप में 6 साइकिल में भेंट की गई।
बताते चलें की तीन दिवसीय चलने वाले वार्षिक उत्सव में पूरी 19 बेटियों की शिक्षा में दूरी बांधा न बनने पाए, इसी संकल्प के साथ यह छोटा सा सहयोग किया गया। प्रस्तुतियों का आरंभ “फैंटेसी लैंड” से हुआ, जिसमें प्री-प्राइमरी के नन्हे विद्यार्थियों ने परियों, कल्पना और अलादीन की जादुई कथा के माध्यम से दर्शकों को सपनों और रोमांच की दुनिया में पहुँचा दिया। उनकी मासूमियत और रचनात्मकता ने सभी का मन मोह लिया।
कार्यक्रम अपनी केंद्रीय थीम “विविध परंपराएँ, एक उत्सव” की ओर बढ़ा। यूकेजी से कक्षा आठवीं तक के विद्यार्थियों ने गोवा, पंजाब, असम, बंगाल और कश्मीर की सांस्कृतिक झलकियाँ प्रस्तुत कीं। महाराष्ट्र का प्रसिद्ध गोंधल नृत्य, गुजरात का रंगारंग गरबा और राजस्थान का कालबेलिया नृत्य विशेष आकर्षण रहे। इन प्रस्तुतियों में देश के विविध रीति-रिवाजों, परिधानों और लोक-कलाओं की झलक मिली। संदेश यही रहा कि भाषाएँ, परंपराएँ और त्योहार भले अलग हों, हम सब भारतीय होने की भावना से एक सूत्र में बँधे हैं।
शास्त्रीय नृत्य “कथक” की प्रस्तुति भी दर्शकों को खूब पसंद आई। इसमें पुरानी धुनों के साथ शास्त्रीय नृत्य की सुंदरता का मनमोहक मेल दिखा। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भव्य समापन “महादे् से महाकाल” नामक भक्तिमय प्रस्तुति से हुआ, जिसमें विद्यार्थियों ने भक्ति, आस्था और सांस्कृतिक गौरव का वातावरण रच दिया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ कराटे, स्काउट्स, योग, ऑर्केस्ट्रा, गायन एवं अन्य कौशल-आधारित गतिविधियों की प्रस्तुतियाँ भी हुईं। इनसे यह स्पष्ट हुआ कि विद्यालय पुस्तकीय शिक्षा से आगे बढ़कर विद्यार्थियों में अनुशासन, शारीरिक दक्षता, टीमवर्क, रचनात्मकता और नेतृत्व क्षमता का विकास करता है।
सांस्कृतिक विभाग की प्रभारी श्रीमती राधा गुप्ता, बलजीत कौर कार्यक्रम संचालिका ,नृत्य प्रशिक्षक शिवम, आईटी प्रभारी इक़रा अंजुम वेशभूषा प्रभारी श्रीमती प्रतिमा, कला एवं शिल्प प्रभारी श्रीमती स्वाति तथा संगीत विभाग प्रभारी मुस्तकीम का विशेष योगदान रहा। इनके साथ शोभित, कृष्णा, अभिनव, अभिषेक, हर्षिता, भूमिका, फ़ौज़िया, शीबा, अलंकृता, शिवांगी, पूजा सिंह, प्रियंका श्रीवास्तव, नाज़िया, इशिका, दर्शिका, दिव्या, वसुंधरा, नेहा, आदर्श, कार्तिका, रती, शाहनाज़, प्रीति, अनुष्का, यूएस पाल
सौम्या, वंदना, अरुण एवं सुरेश के अथक परिश्रम से यह आयोजन यादगार बन सका। समापन राष्ट्रगान और “जय हिंद” के उद्घोष के साथ हुआ।




