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समस्त हिन्दू समाज को गो मय जीवन जीने का संकल्प लेना चाहिए: प्रान्त संयोजक अरविंद

0 टांडाफाल गौशाला में गो आराधना, गो समर्पित गो नवरात्र एवं गोपाष्टमी महोत्सव का हुआ आयोजित
मीरजापुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गौ सेवा विभाग व सुरभि शोध संस्थान के गो आश्रय स्थल के संयुक्त तत्वावधान में टांडाफाल स्थित गौशाला में गो आराधना, गो समर्पित गो नवरात्र एवं गोपाष्टमी महोत्सव कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गोपूजन कर आरती उतारी गयी।
उपस्थित जन को संबोधित करते हुए प्रांत संयोजक अरविंद ने कहाकि गाय को अपने जीवन में धारण करने का संकल्प लेने का दिन है। आज गौ माता हमें पालती है, हम माता को नहीं पालते। समस्त हिन्दू समाज को गो मय जीवन जीने का संकल्प लेना चाहिए।

 उन्होने कहाकि वैदिक सनातन धर्म की मूल गौ माता है। जब असुरों ने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया, तो अमृत की खोज के लिए समुद्र मंथन किया क्या, जिसे प्राप्त कर देवता अमर हो सके। समुद्र मंथन से चौदह रत्न निकले, जिसमें सर्वप्रथम कामधेनु की उत्पत्ति हुई। जिसका वर्णन हमारे धर्मशास्त्र पुराणों में किया गया है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गौ सेवा विभाग काशी प्रांत के प्रांत गो पालन एवं संवर्धन प्रमुख शुभम मिश्र ने कहाकि दीपावली के दिन कार्तिक शुक्ल अमावस्या के दिन प्रातःकाल अरुणोदय की बेला समुद्र मंथन से क्षीर सागर से जो मातृ स्वरूपा पांच गायें उत्पन्न हुई, उनके नाम नंदा, सुभद्रा, सुरभि, सुशीला, बहुआ एवं सायंकाल की बेला में समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ। इस दृष्टि से माता गौ माता अग्रजा है और माता लक्ष्मी अनुजा है।

 हमारे धर्मग्रंथों ने हमें प्रकाश दिया, अपने सनातन धर्म में कुल पांच नवरात्र पर्व मनाए जाते है तीन प्रकट नवरात्रि वासंतिक शारदीय एवं गो नवरात्र, एवं दो गुप्त नवरात्र मनाए जाते है। दीपावली के अगले दिन कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से अक्षय नवमी तक गो आराधना को समर्पित गो नवरात्रि महापर्व मनाया जाता है।

 गोपाष्टमी महोत्सव भी अपने इसी गो नवरात्रि की अष्टमी तिथि को बनाया जाता है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण और भगवान बलराम जी ने गो चारण लीला आरंभ किया था। हमारे सनातन धर्म के आराध्य भगवान राम कृष्ण के प्राकट्य का मूल उद्वेश्य ही गौ सेवा था। गो तंत्र नामक ग्रन्थ में भगवान शंकर ने माता पार्वती से कहा कि हे पार्वती जो मनुष्य गाय में पशुबुद्धि रखता है, वह मनुष्य नहीं नरपशु है।

 चार पैर वाले प्राणियों में गाय साक्षात भगवान की विभूति है। गाय के सर्वांग में समस्त देवी देवताओं का वास है, एक साथ संपूर्ण देवताओं का आलय है पूज्या गौ माता का शरीर, गौ माता के गोबर में माता लक्ष्मी का वास है, गो मूत्र में माता गंगा का वास है।
कहा कि आज गो नवरात्र के पावन गोपाष्टमी पर हम सभी सनातनी बंधुओं को गो आधारित जीवन पद्धति धारण कर जीवन में पंचगव्य से निर्मित गो मय उत्पादों को प्रयोग कर तथा नित्य प्रतिदिन गो ग्राम निकालकर गौ व्रती बनने का संकल्प लेना चाहिए।
उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने गो आधारित कृषि व्यवस्था पर विस्तृत प्रकाश डाला।

 आयोग के सदस्य रमाकांत उपाध्याय ने भी गो माता के महात्म्य पर प्रकाश डाला। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ काशी प्रांत के बौद्धिक प्रमुख डॉ कुलदीप पांडेय ने समाज के सज्जनशक्ति को गो सेवा में बढ़ चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया।

 इस दौरान विशेष उपस्थिति पूज्य संत महेंद्र जी महराज, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गौ सेवा गतिविधि काशी प्रांत के प्रांत संयोजक अरविंद जी, उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ काशी प्रांत के बौद्धिक शिक्षण प्रमुख कुलदीप, पूर्व में गौ सेवा विभाग ब्रज प्रांत के प्रांत संयोजक का दायित्व निर्वहन कर चुके वर्तमान में उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के सदस्य रमाकांत, काशी प्रांत के प्रांत गौपालन एवं संवर्धन प्रमुख शुभम मिश्र, गौ सेवा विभाग मीरजापुर के संयोजक शिवेंद्र, जिल प्रचारक रजत प्रताप, प्रचारक शंखनाद,
इंद्रजीत, अभय, दिनेश, दिलीप, निराला समेत बड़ी संख्या में गौ भक्त कार्यकर्ता स्वयंसेवक बन्धु तथा सनातनी नागरिक सज्जनशक्ति उपस्थित रहे।

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