अपनी सभ्यता, संस्कृति को अक्षुण रखते हुए सकल हिंदू समाज को संगठित रखना संघ का ध्येय: शरद चंद्र उपाध्याय
0 संघ के प्रथम प्रशिक्षण ‘प्रारंभिक शिक्षा वर्ग मे बोले जिला संघचालक
0 नगर सहित सदर एवं कोन खंड के स्वयंसेवक लोहिया तालाब स्थित शिवनाथ मैरिज लान मे ले रहे प्रशिक्षण
मीरजापुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मीरजापुर की ओर से मीरजापुर नगर, सदर और कोन खंड के स्वयंसेवको का तीन दिवसीय प्रारंभिक शिक्षा वर्ग शनिवार, 27 दिसबर को नगर के लोहिया तालाब स्थित शिवनाथ मैरिज लान मे शुरु हुआ। वर्ग का शुभारंभ जिला संघचालक शरद चंद्र जी उपाध्याय एवं वर्ग कार्यवाह संतोष मिश्रा जी ने आद्य सरसंघचालक डाक्टर साहब एवं द्वितीय सरसंघचालक श्री गुरू जी के चित्र के समक्ष पुष्पार्चन कर किया। सह नगर कार्यवाह रितेश जी द्वारा मंच परिचय के उपरांत एकल गीत, अमृत वचन के बाद जिला संघचालक शरद चंद्र जी का पाथेय प्राप्त हुआ।
उन्होने कहाकि आप सभी स्वयंसेवक से कार्यककर्ता की तरफ कदम बढाने वाले शिक्षार्थी है, पूरे मनोयोग से प्रशिक्षण प्राप्त कर आगामी प्रथमिक शिक्षा वर्ग मे भी आपको प्रशिक्षित होना है। उन्होने बताया कि संघ विश्व का सबसे बडा सामाजिक संगठन है। इसकी आवश्यकता क्यो पडी? बताया कि देश की स्ववतंत्रता और संस्कृति को बढावा देने के लिए इसकी आवश्यकता महसूस की गयी। डा. हेडगेवार जी कांग्रेस से विदर्भ प्रांत के मंत्री थे, वे 1921 मे जब जेल गये और चिंतन कर निकलने के बाद 1925 मे स्थापना की। देश परतंत्र क्यो हुआ? विचार करने के बाद पता चला कि असंगठित समाज कमजोर होता है, हम संगठित नही, इसलिए गुलाम हुए। हम अपनी संस्कृति और जीवन गाथा भूल चुके थे, इसलिए हम गुलाम हुए और संघ संस्कृति, सभ्यता को बढावा दे रहा है।
बताया कि इतिहास से छेडछाड कर सिकंदर को महान बताया जा रहा है। 17 बार पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गोरी को हराया, लेकिन उन्होने क्षमा मांगने पर उसे छोड दिया, कोई इतिहासकार इसे नही बताता। तलवार के दम पर मुस्लिम बनाने का प्रयास किया, किंतु गुरु गोविन्द सिंह व पुत्रो को डिगा नही सका। जब छोटे ने बडे भाई से पूछा क्यो रो रहे हो? तो कहा छोटे होकर भी पहले आप बलिदान हो रहे हो इसलिए।
उन्होने कहा कि ईरान, मिश्र, रोमा, सब मिट गये जहा से, कुछ बात है कि हस्ती मिटती नही हमारी अर्थात भारत की सभ्यता और संस्कृति को बहुत प्रयास के बाद भी कोई समाप्त नही कर सका।
जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसि के भाव के साथ संघ हमारे जीवन मूल्य और संस्कृति को लेकर आगे बढते हुए हिंदू समाज को संगठित कर रहा है, ताकि गुलामी का दंश भविष्य मे न झेलना पडे। डाक्टर साहब और गुरूजी के जीवन के बारे मे बताते हुए कहाकि गुरू जी के कालखंड मे ही देश के सभी जिलो मे संघ का कार्य शुरु हो गया था उन्होने संघ को एक वटवृक्ष बना दिया था।
आज 45 आनुसंगिक संगठन काम कर रहे है और संघ सहित सभी आनुसंगिक संगठन पंच परिवर्तन के लिए कार्य कर रहे है। हिन्दव: सोदरा: सर्वे, न हिंदू पतितो भवेत, मम दीक्षा हिंदू रक्षा, मम मंत्रम समानता अर्थात सभी हिंदू सहोदर भाई है और कभी पतित नही हो सकते। हमारी दीक्षा हिंदू समाज की रक्षा और मंत्र समानता का भाव है और इसी को आत्मसात करते हुए संघ के करोडो कार्यकर्ता एवं स्वयंसेवक आगे बढ रहे है। द्वितीय दिवस रविवार को विभाग कार्वाह सच्चिदानंद जी ने डाक्टर साहब एवं संघ विषय पर स्वयंसेवको को पाथेय प्रदान किया।
इस अवसर पर वर्ग के सर्व व्यवस्था प्रमुख सुनील तिवारी जी, विभाग धर्म जागरण प्रमुख वीरेंद्र मौर्य, वर्ग कार्यवाह संतोस मिश्रा जी, जिला बौद्धिक प्रमुख गुंजन चौधरी ‘गर्ग’, वर्ग के मुख्य शिक्षक अनमोल जी, नगर प्रचारक अंजनी जी, बौद्धिक शिक्षण प्रमुख विमलेश अग्रहरि, सेवा प्रमुख शिवशान्त कुमार ऊर्फ सोनू दीक्षित जी, गोरक्षा प्रमुख विनोद यादव जी, सह नगर सेवा प्रमुख आशीष शर्मा जी, विवेक पाठक जी, अलंकार जायसवाल जी, नीरज बैजू जी, महेंद्र मिश्रा जी, रवींद्र मिसहितश्रा जी, आदर्श अग्रहरि जी सहित अन्य कार्यकर्ता एवं स्वयंसेवक बंधु रहे।



