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जनरल मेडिसिन एवं रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त नवीन कार्यालय परिसर का किया उद्घाटन

मीरजापुर। मंगलवार, 7 अप्रैल 2026 को प्रधानाचार्य डॉ संजीव कुमार सिंह के नेतृत्व में माँ विंध्यवासिनी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। संस्थान में जनरल मेडिसिन एवं रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त नवीन कार्यालय परिसर का उद्घाटन किया गया।

यह नया परिसर विभागीय कार्यप्रणाली को अधिक व्यवस्थित एवं अकादमिक रूप से सक्षम बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। इसमें विभागाध्यक्ष कक्ष, फैकल्टी कक्ष, सेमिनार रूम, लाइब्रेरी रूम तथा प्रशासनिक कार्यालय जैसी आवश्यक संरचनाएं शामिल हैं। पूर्व में इन विभागों के लिए केवल ओपीडी व्यवस्था उपलब्ध थी तथा चिकित्सकों के लिए पृथक कार्यालय का अभाव था, जिससे शिक्षण, शोध एवं अकादमिक गतिविधियों के संचालन में बाधाएं उत्पन्न होती थीं।

नवीन अवसंरचना के विकसित होने से न केवल स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के पठन-पाठन को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि अनुसंधान कार्यों, केस डिस्कशन, जर्नल क्लब एवं सेमिनार जैसी शैक्षणिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। आधुनिक चिकित्सा शिक्षा के मानकों के अनुरूप यह पहल संस्थान में एक सुदृढ़ अकादमिक वातावरण स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।

उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ सचिन किशोर, चिकित्सा अधीक्षक डॉ सुनील कुमार सिंह, आकस्मिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ प्रशांत त्रिपाठी, रेस्पिरेटरी मेडिसिन के विभागाध्यक्ष डॉ पंकज पांडे, जनरल मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ कुसैन अख्तर, चीफ प्रॉक्टर डॉ दुर्गेश सिंह, सहायक प्राचार्य डॉ राजेश कुमार मिश्रा, नर्सिंग सुपरिटेंडेंट श्रीमती शकुंतला, हॉस्पिटल मैनेजर डॉ पूजा सलूजा एवं डॉ शिवांगी सहित अन्य चिकित्सक एवं स्टाफ उपस्थित रहे।

इस अवसर पर प्रिंसिपल ने कहा कि “उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा शिक्षा एवं रोगी देखभाल के लिए सुदृढ़ अवसंरचना अत्यंत आवश्यक है। यह नई व्यवस्था न केवल विभागीय कार्यक्षमता को बढ़ाएगी, बल्कि विद्यार्थियों एवं चिकित्सकों के लिए एक बेहतर शैक्षणिक वातावरण भी प्रदान करेगी।”
यह पहल संस्थान को एक उन्नत शिक्षण एवं अनुसंधान केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।

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