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संकल्प दिवस के रुप मे मना राष्ट्र सेविका समिति की आद्य संघचालिका लक्ष्मीबाई केलकर का अवतरण दिवस
0 मातृ शक्ति को राष्ट्र शक्ति मे परिवर्तित करने का प्रांत प्रचार प्रमुग ने किया आह्वाहन
मीरजापुर। राष्ट्र सेविका समिति विंध्याचल विभाग की ओर से समिति की संस्थापक एवं आद्य संघचालिका वंदनीया लक्ष्मीबाई केलकर (मौसीजी) का अवतरण दिवस “संकल्प दिवस” का गरिमामयी आयोजन शुक्रवार, 24 जुलाई को के घंटाघर स्थित सभागार मे संपन्न हुआ।

इस वर्ष का संकल्प दिवस, राष्ट्र सेविका समिति की सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण की 90 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा को समर्पित रहा। इस अवसर पर वंदनीया मौसीजी के राष्ट्रजीवन, नारी जागरण और समाज सेवा के आदर्शों का स्मरण करते हुए मातृशक्तियों ने स्वयं को समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों के निर्वहन हेतु पुनः संकल्पित किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ उनके चित्र पर माल्यार्पण व पुष्पार्चन करके मुख्य वक्ता राष्ट्र सेविका समिति काशी प्रांत की प्रांत प्रचार प्रमुख ऋचा नारायण, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही बिनानी कॉलेज की पूर्व प्राचार्या प्रोफेसर डॉ वीना सिंह, समिति की विभाग कार्यवाहिका संध्या त्रिपाठी ने किया। तत्पश्चात सामूहिक रूप से आद्य संघचालिका प्रणाम किया गया।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता राष्ट्र सेविका समिति काशी प्रांत की प्रांत प्रचार प्रमुख ऋचा नारायण ने कहाकि राष्ट्र सेविका समिति का गठन लक्ष्मीबाई केलकर जी ने सन 1936 में मातृशक्तियों के लिए किया था। बाद में यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का प्रथम अनुसंग घोषित हुआ। जहां अन्य महिला संगठन अपने अधिकार तथा प्रतिष्ठा के बारे में बताती है कि राष्ट्र का एक घटक होने के नाते एक मां का क्या कर्तव्य है। समिति उन्हें जागृत कर उनके भीतर छिपी राष्ट्र निर्माण के प्रतिभा का दर्शन कराते हुए राष्ट्र निर्माण की भूमिका के प्रति जागृत करती है। उन्होंने बताया कि समिति मातृशक्ति बेटी बहनो और माताओं को जागृत करते हैं।

उन्होने कहा कि समिति समाज के पिछड़े अभावग्रस्त और वनवासी क्षेत्रों में विशेष रूप से कार्य कर रही है। ताकि यहां का समाज और बच्चे भी देश के विकास की राह पर आगे बढ़ सके। नक्सलवाद और आतंकवाद ग्रस्त क्षेत्रों की बच्चियों के लिए भारत के अनेक शहरों में छात्रावास चलाए जा रहे हैं। जहां उनके निशुल्क आवास और पढ़ाई की व्यवस्था की जाती है। इन छात्रावासों की अनेक लड़कियां उच्च शिक्षा प्राप्त कर स्वावलंबी भी बन चुकी हैं।

ऋचा नारायण ने कहाकि मातृशक्तियों को एक सूत्र में बंधे रहना चाहिए। साथ ही तीन आदर्श मातृत्व, कर्तव्य और नेतृत्व की क्षमता होनी चाहिए। उन्होंने मातृ शक्ति को राष्ट्र शक्ति परिवर्तित करने का आह्वाहन किया। सैकड़ों महिलाओं के समक्ष राजमाता जीजा बाई, भगिनी निवेदिता और अहिल्या बाई होल्कर, रानी लक्ष्मी बाई के आदर्शों का जिक्र किया।

कार्यक्रम का समापन सूर्या जी द्वारा वंदे मातरम के उपरांत ध्वज प्रणाम एवं विकिर के साथ हुआ। इस अवसर पर प्रमुख रूप से इंदु गुप्ता, रितु केसरी, प्रतीक्षा, कल्पना, चंपा, स्वप्निका सहित भारी संख्या में मात्र शक्तियों उपस्थित रही। कुशल संचालन मंजू लता जायसवाल ने किया।

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